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Gurugram News: मेट्रो के रास्ते से हटेंगी बिजली और गैस और सीवर की लाइनें
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गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड की तैयारी शुरू, 62.25 करोड़ रुपये का टेंडर जारी
सेक्टर-9 से साइबर सिटी तक प्रस्तावित है मेट्रो कॉरिडोर
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे चरण के निर्माण में सीवर, पानी, गैस और बिजली की लाइनों के कारण देरी न हो, इसके लिए गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड ने तैयारी शुरू कर दी है। सेक्टर-9 से साइबर सिटी तक प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर में इन सभी लाइनों को शिफ्ट करने और यातायात डायवर्जन के लिए 62.25 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है।
गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक और बसई से सेक्टर-101 तक मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है। दूसरे चरण में सेक्टर-9 से आगे सेक्टर-7 होते हुए साइबर सिटी तक मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण किया जाना है। इसके लिए जीएमआरएल ने 1662.53 करोड़ रुपये का टेंडर पहले ही जारी कर दिया है। अब निर्माण से पहले यूटिलिटी शिफ्टिंग और यातायात डायवर्जन की व्यवस्था की जा रही है। दूसरे चरण का कॉरिडोर घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण निर्माण के दौरान यातायात प्रभावित होने की आशंका है। सेक्टर-9 से रेलवे रोड तक सड़क पर सेंट्रल वर्ज नहीं है। ऐसे में यहां एक ओर से ही मेट्रो के पिलर बनाने की योजना है।
वहीं, सेक्टर-4/5 चौक से रेजांगला चौक, दिल्ली रोड और उद्योग विहार क्षेत्र में भी सड़क की चौड़ाई सीमित है। ऐसे में निर्माण से पहले सीवर, पानी, गैस और बिजली की लाइनों को शिफ्ट करने के साथ यातायात डायवर्जन की व्यवस्था करना जरूरी है। कुछ स्थानों पर सड़क सुधार की भी जरूरत पड़ सकती है। पहले चरण में मेट्रो निर्माण के साथ ही यूटिलिटी शिफ्टिंग का काम चलने से निर्माण प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है। दूसरे चरण में सेक्टर-7, 4, 5, अशोक विहार, सेक्टर-3, बजघेड़ा रोड, पालम विहार एक्सटेंशन, पालम विहार, सेक्टर-23ए, सेक्टर-22, उद्योग विहार फेज-4, उद्योग विहार फेज-5 और साइबर सिटी स्टेशन का निर्माण शामिल है।
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414 पेड़ हटाने के लिए मंजूरी की प्रक्रिया शुरू
दूसरे चरण के मेट्रो कॉरिडोर के रास्ते में 414 पेड़ आ रहे हैं। इन्हें हटाने के लिए जीएमआरएल ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) से वन विभाग के माध्यम से कानूनी मंजूरी लेने का अनुरोध किया है। ये पेड़ मुख्य रूप से सेक्टरों की सड़कों के किनारे बनी ग्रीन बेल्ट में हैं। इनमें नीम, बरगद, पीपल, जामुन, शीशम, सागवान, कदम, सिरस सहित अन्य प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं।
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सेक्टर-9 से साइबर सिटी तक प्रस्तावित है मेट्रो कॉरिडोर
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे चरण के निर्माण में सीवर, पानी, गैस और बिजली की लाइनों के कारण देरी न हो, इसके लिए गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड ने तैयारी शुरू कर दी है। सेक्टर-9 से साइबर सिटी तक प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर में इन सभी लाइनों को शिफ्ट करने और यातायात डायवर्जन के लिए 62.25 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है।
गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक और बसई से सेक्टर-101 तक मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है। दूसरे चरण में सेक्टर-9 से आगे सेक्टर-7 होते हुए साइबर सिटी तक मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण किया जाना है। इसके लिए जीएमआरएल ने 1662.53 करोड़ रुपये का टेंडर पहले ही जारी कर दिया है। अब निर्माण से पहले यूटिलिटी शिफ्टिंग और यातायात डायवर्जन की व्यवस्था की जा रही है। दूसरे चरण का कॉरिडोर घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण निर्माण के दौरान यातायात प्रभावित होने की आशंका है। सेक्टर-9 से रेलवे रोड तक सड़क पर सेंट्रल वर्ज नहीं है। ऐसे में यहां एक ओर से ही मेट्रो के पिलर बनाने की योजना है।
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वहीं, सेक्टर-4/5 चौक से रेजांगला चौक, दिल्ली रोड और उद्योग विहार क्षेत्र में भी सड़क की चौड़ाई सीमित है। ऐसे में निर्माण से पहले सीवर, पानी, गैस और बिजली की लाइनों को शिफ्ट करने के साथ यातायात डायवर्जन की व्यवस्था करना जरूरी है। कुछ स्थानों पर सड़क सुधार की भी जरूरत पड़ सकती है। पहले चरण में मेट्रो निर्माण के साथ ही यूटिलिटी शिफ्टिंग का काम चलने से निर्माण प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है। दूसरे चरण में सेक्टर-7, 4, 5, अशोक विहार, सेक्टर-3, बजघेड़ा रोड, पालम विहार एक्सटेंशन, पालम विहार, सेक्टर-23ए, सेक्टर-22, उद्योग विहार फेज-4, उद्योग विहार फेज-5 और साइबर सिटी स्टेशन का निर्माण शामिल है।
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414 पेड़ हटाने के लिए मंजूरी की प्रक्रिया शुरू
दूसरे चरण के मेट्रो कॉरिडोर के रास्ते में 414 पेड़ आ रहे हैं। इन्हें हटाने के लिए जीएमआरएल ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) से वन विभाग के माध्यम से कानूनी मंजूरी लेने का अनुरोध किया है। ये पेड़ मुख्य रूप से सेक्टरों की सड़कों के किनारे बनी ग्रीन बेल्ट में हैं। इनमें नीम, बरगद, पीपल, जामुन, शीशम, सागवान, कदम, सिरस सहित अन्य प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं।