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Gurugram News: कठिन समझे जाने वाले क्षेत्रों में महिलाओं को आगे लाने की कवायद
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कार मैन्युफैक्चरिंग के काम का प्रशिक्षण लेती महिला प्रशिक्षु म हिलाओं वाली खबर के लिए
मेकेनिकल और इलेक्टि्कल प्रशिक्षण में धीरे-धीरे बढ़ रही है महिलाओं की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जिले में ऑटोमोबाइल समेत अन्य उद्योगों, निर्माण कंपनियों और बिल्डिंगों में रोजगार की संभावनाएं हैं। हालांकि, जोखिम और सुरक्षा कारणों से इन क्षेत्रों में महिला कर्मियों की संख्या कम है। प्रशिक्षित महिला कर्मियों की कमी भी एक बड़ी चुनौती है, जिसके कारण कंपनियां महिलाओं को रख नहीं पातीं। सरकार और निजी क्षेत्र के प्रयासों से अब महिलाओं के लिए रास्ते खुल रहे हैं।
कार निर्माता कंपनी मारुति ने पिछले सालों के दौरान महिलाओं को प्रशिक्षण और रोजगार में प्राथमिकता देनी शुरू की है। कंपनी प्रवक्ता के अनुसार, उनके शॉप फ्लोर पर 200 महिलाएं काम कर रही हैं। मारुति के इंस्टीट्यूट फॉर मैन्युफैक्चरिंग में फिलहाल 30 फीसदी महिलाएं नामांकित हैं। एसएनएस फाउंडेशन के प्रोजेक्ट प्रमुख हरदीप बताते हैं कि गुरुग्राम में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। उनके कौशल विकास केंद्र में पिछले कुछ सालों में 1500 लड़कों के मुकाबले 60 लड़कियों ने ऑटोमोटिव समेत अन्य क्षेत्रों में प्रशिक्षण लिया है।
राजकीय आईटीआई के प्राचार्य रविंद्र कुमार के अनुसार, आईटीआई में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण है। इसके बावजूद ऑटोमोटिव, वेल्डर, फीटर और इलेक्ट्रीशियन जैसे कठिन कोर्स में लड़कियां नामांकन नहीं करातीं। यदि वे नामांकन करा भी लेती हैं, तो एक-दो महीने बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं। बमुश्किल एक-दो लड़कियां ही ऐसे कोर्स पूरे कर पाती हैं। यह दर्शाता है कि इन विभागों को लड़कियां अभी भी मुश्किल मानती हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जिले में ऑटोमोबाइल समेत अन्य उद्योगों, निर्माण कंपनियों और बिल्डिंगों में रोजगार की संभावनाएं हैं। हालांकि, जोखिम और सुरक्षा कारणों से इन क्षेत्रों में महिला कर्मियों की संख्या कम है। प्रशिक्षित महिला कर्मियों की कमी भी एक बड़ी चुनौती है, जिसके कारण कंपनियां महिलाओं को रख नहीं पातीं। सरकार और निजी क्षेत्र के प्रयासों से अब महिलाओं के लिए रास्ते खुल रहे हैं।
कार निर्माता कंपनी मारुति ने पिछले सालों के दौरान महिलाओं को प्रशिक्षण और रोजगार में प्राथमिकता देनी शुरू की है। कंपनी प्रवक्ता के अनुसार, उनके शॉप फ्लोर पर 200 महिलाएं काम कर रही हैं। मारुति के इंस्टीट्यूट फॉर मैन्युफैक्चरिंग में फिलहाल 30 फीसदी महिलाएं नामांकित हैं। एसएनएस फाउंडेशन के प्रोजेक्ट प्रमुख हरदीप बताते हैं कि गुरुग्राम में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। उनके कौशल विकास केंद्र में पिछले कुछ सालों में 1500 लड़कों के मुकाबले 60 लड़कियों ने ऑटोमोटिव समेत अन्य क्षेत्रों में प्रशिक्षण लिया है।
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राजकीय आईटीआई के प्राचार्य रविंद्र कुमार के अनुसार, आईटीआई में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण है। इसके बावजूद ऑटोमोटिव, वेल्डर, फीटर और इलेक्ट्रीशियन जैसे कठिन कोर्स में लड़कियां नामांकन नहीं करातीं। यदि वे नामांकन करा भी लेती हैं, तो एक-दो महीने बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं। बमुश्किल एक-दो लड़कियां ही ऐसे कोर्स पूरे कर पाती हैं। यह दर्शाता है कि इन विभागों को लड़कियां अभी भी मुश्किल मानती हैं।
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