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Gurugram News: धनवापुर का तालाब बदहाल, किनारों पर अतिक्रमण
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सही रखरखाव न होने के चलते तालाब की सतह पर जलकुंभी फैली
लाखों रुपये की लागत से शुरू कराया गया सौंदर्यीकरण का काम भी अधूरा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गांव धनवापुर के जोहड़ (तालाब) के सौंदर्यीकरण और विकसित करने के लिए लाखों रुपये से शुरू किए गए काम का कोई नतीजा नहीं निकला। जो काम हुआ उसका भी कोई उपयोग नहीं रहा। अधूरे काम और सही रखरखाव न होने के चलते इस तालाब की सतह पर पूरी तरह जलकुंभी फैल गई है और किनारों पर अतिक्रमण हो गया है। तालाब किसी भी तरह से स्थानीय लोगों के उपयोग में आने की स्थिति में नहीं है। आसपास की आबादी का पानी भी बिना शोधित किए ही तालाब में डाला जा रहा है जिससे एक हिस्से में दलदल जैसी हालत हो गई है। इसमें स्थानीय मवेशी फंस जाते हैं।
तीन वर्ष पहले जल संचयन के ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों को अमृत सरोवर परियोजना के तहत संवारने का लक्ष्य तय किया गया था। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमृत सरोवर परियोजना की मुहिम छेड़ी। इसके बाद गुरुजल सोसाइटी ने 320 तालाबों के जीर्णोद्धार का काम शुरू किया। मिशन के तहत जिले में जोहड़ और तालाबों को जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों के मनोरंजन स्थल के रूप में भी विकसित किए जाने की योजना थी। इनके चारों तरफ ग्रामीणों के सैर सपाटे के लिए पक्का रास्ता बनाया जाना था। गांव के गंदे पानी को शोधित करके तालाब को भरा जाना था। पशुओं के लिए घाट आदि बनाने का काम भी होना था। तालाब के चारों तरफ रास्ता तैयार कर पौधे लगाए जाने थे। धनवापुर के तालाब पर आकर यह सब तस्वीर बदल जाती है। धनवापुर के रहने वाले मनोज कुमार कहते हैं कि तालाब पर काम रुक गया है। कई बार प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाया है। संबंंधित विभाग में भी सीधे अधिकारियों से गुहार की है। दो साल हो गए हैं कोई नतीजा नहीं निकला है।
इस तरह बदहाल है धनवापुर तालाब
- चारों ओर लगाई गई रेलिंग के हिस्से तोड़ दिए गए हैं। बताया गया लोहा निकाल कर उसे बेच दिया गया है
- बिना शोधित किए पानी सीधे तालाब में, जिससे उसका उथलापन बढ़ गया है।
- चारों ओर पौधारोपण का काम किया गया है लेकिन सुरक्षा के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हुए
- बैठने के लिए शेल्टर बनाया लेकिन वह भी बदहाल हालत में हो गया है
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लाखों रुपये की लागत से शुरू कराया गया सौंदर्यीकरण का काम भी अधूरा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गांव धनवापुर के जोहड़ (तालाब) के सौंदर्यीकरण और विकसित करने के लिए लाखों रुपये से शुरू किए गए काम का कोई नतीजा नहीं निकला। जो काम हुआ उसका भी कोई उपयोग नहीं रहा। अधूरे काम और सही रखरखाव न होने के चलते इस तालाब की सतह पर पूरी तरह जलकुंभी फैल गई है और किनारों पर अतिक्रमण हो गया है। तालाब किसी भी तरह से स्थानीय लोगों के उपयोग में आने की स्थिति में नहीं है। आसपास की आबादी का पानी भी बिना शोधित किए ही तालाब में डाला जा रहा है जिससे एक हिस्से में दलदल जैसी हालत हो गई है। इसमें स्थानीय मवेशी फंस जाते हैं।
तीन वर्ष पहले जल संचयन के ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों को अमृत सरोवर परियोजना के तहत संवारने का लक्ष्य तय किया गया था। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमृत सरोवर परियोजना की मुहिम छेड़ी। इसके बाद गुरुजल सोसाइटी ने 320 तालाबों के जीर्णोद्धार का काम शुरू किया। मिशन के तहत जिले में जोहड़ और तालाबों को जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों के मनोरंजन स्थल के रूप में भी विकसित किए जाने की योजना थी। इनके चारों तरफ ग्रामीणों के सैर सपाटे के लिए पक्का रास्ता बनाया जाना था। गांव के गंदे पानी को शोधित करके तालाब को भरा जाना था। पशुओं के लिए घाट आदि बनाने का काम भी होना था। तालाब के चारों तरफ रास्ता तैयार कर पौधे लगाए जाने थे। धनवापुर के तालाब पर आकर यह सब तस्वीर बदल जाती है। धनवापुर के रहने वाले मनोज कुमार कहते हैं कि तालाब पर काम रुक गया है। कई बार प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाया है। संबंंधित विभाग में भी सीधे अधिकारियों से गुहार की है। दो साल हो गए हैं कोई नतीजा नहीं निकला है।
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इस तरह बदहाल है धनवापुर तालाब
- चारों ओर लगाई गई रेलिंग के हिस्से तोड़ दिए गए हैं। बताया गया लोहा निकाल कर उसे बेच दिया गया है
- बिना शोधित किए पानी सीधे तालाब में, जिससे उसका उथलापन बढ़ गया है।
- चारों ओर पौधारोपण का काम किया गया है लेकिन सुरक्षा के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हुए
- बैठने के लिए शेल्टर बनाया लेकिन वह भी बदहाल हालत में हो गया है