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Gurugram News: छह की जगह 24 प्रतिशत ब्याज दर से जमा कराएं जुर्माना राशि
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बिजली निगम की अपील को अदालत ने किया खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। बिजली निगम ने बिजली चोरी के एक मामले में निचली अदालत के आदेश को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसवीर सिंह की अदालत ने अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए बिजली निगम की अपील को खारिज कर दिया है। साथ ही बिजली निगम को आदेश दिया है कि उपभोक्ता द्वारा जमा कराई गई जुर्माना राशि का भुगतान 6 प्रतिशत की बजाय 24 प्रतिशत ब्याज दर से किया जाए। ब्याज दर उस बिजली अधिकारी से वसूल की जाए जिसने उपभोक्ता पर जुर्माना लगाया था।
सेक्टर-15 के उपभोक्ता राजेश गाबा के अधिवक्ता क्षितिज मेहता के अनुसार, शीतला काॅलोनी के चोरी किए गए एक बिजली मीटर से बिजली की आपूर्ति ले रहा था। इसका खुलासा 27 दिसम्बर 2017 को हुई जांच में हुआ था। बिजली निगम ने उस पर एक लाख 10 हजार 89 रुपये का जुर्माना लगा दिया था। उपभोक्ता ने जुर्माना राशि का भुगतान कर 10 जनवरी 2018 को अदालत में केस दायर कर दिया था। 31 जुलाई 2023 को सिविल जज वीरेन्द्र कादियान की अदालत ने सुनवाई करते हुए फैसला दिया था कि बिजली निगम के आरोप निराधार हैं। इसलिए उपभोक्ता को जमा कराई गई जुर्माना राशि का भुगतान 6 प्रतिशत ब्याज दर से किया जाए और जिस अधिकारी ने उपभोक्ता को बिजली चोरी करने का नोटिस दिया था। उससे ब्याज की राशि वसूल की जाए। अधिवक्ता का कहना है कि बिजली निगम ने निचली अदालत के आदेश को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। बिजली निगम ने बिजली चोरी के एक मामले में निचली अदालत के आदेश को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसवीर सिंह की अदालत ने अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए बिजली निगम की अपील को खारिज कर दिया है। साथ ही बिजली निगम को आदेश दिया है कि उपभोक्ता द्वारा जमा कराई गई जुर्माना राशि का भुगतान 6 प्रतिशत की बजाय 24 प्रतिशत ब्याज दर से किया जाए। ब्याज दर उस बिजली अधिकारी से वसूल की जाए जिसने उपभोक्ता पर जुर्माना लगाया था।
सेक्टर-15 के उपभोक्ता राजेश गाबा के अधिवक्ता क्षितिज मेहता के अनुसार, शीतला काॅलोनी के चोरी किए गए एक बिजली मीटर से बिजली की आपूर्ति ले रहा था। इसका खुलासा 27 दिसम्बर 2017 को हुई जांच में हुआ था। बिजली निगम ने उस पर एक लाख 10 हजार 89 रुपये का जुर्माना लगा दिया था। उपभोक्ता ने जुर्माना राशि का भुगतान कर 10 जनवरी 2018 को अदालत में केस दायर कर दिया था। 31 जुलाई 2023 को सिविल जज वीरेन्द्र कादियान की अदालत ने सुनवाई करते हुए फैसला दिया था कि बिजली निगम के आरोप निराधार हैं। इसलिए उपभोक्ता को जमा कराई गई जुर्माना राशि का भुगतान 6 प्रतिशत ब्याज दर से किया जाए और जिस अधिकारी ने उपभोक्ता को बिजली चोरी करने का नोटिस दिया था। उससे ब्याज की राशि वसूल की जाए। अधिवक्ता का कहना है कि बिजली निगम ने निचली अदालत के आदेश को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी।
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