बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश: टैक्सी चालक की सतर्कता ने बर्बाद होने से बचाई मासूमों की जिंदगी, ऐसे हुआ खुलासा
गुरुग्राम पुलिस ने बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार महिलाओं समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। एक टैक्सी चालक की सतर्कता के चलते मासूमों की जिंदगी बर्बाद होने से बच गई। टैक्सी चालक को पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कैब चालक की सतर्कता से पुलिस ने शुक्रवार रात बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार महिलाओं सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से दिल्ली से चोरी की गईं 25-25 दिन की दो बच्चियों को बरामद किया है, जिन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) फरीदाबाद के सुपुर्द कर दिया। कैब सवार तीन आरोपी दोनों बच्चियों को अलवर बेचने जा रहे थे। चालक को शक हुआ तो वह कैब को सीधे डीएलएफ फेज तीन थाने ले गया। पुलिस ने शनिवार को आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से तीन दिन की रिमांड पर सौंप दिया, जबकि शाम को दिल्ली से पकड़ी गईं दो महिलाओं से पूछताछ की जा रही है।
एसीपी (क्राइम) प्रीतपाल सांगवान ने बताया कि आरोपियों की पहचान राजस्थान के अलवर में ट्रांसपोर्ट नगर की रहने वाली सुरिंद्र कौर, थाना गोविंदगढ़ के गांव दोगांडी निवासी हरजिंदर सिंह और दिल्ली के रोहिणी निवासी नेहा के रूप में हुई। इनसे पूछताछ के बाद पुलिस ने शनिवार शाम दिल्ली से पूजा और वीणा नाम की दो और महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया।
महिलाओं ने अलवर जाने की बात कही
जांच में पता चला कि सुरिंद्र कौर और नेहा ने रात करीब 10 बजे धौला कुआं से गुरुग्राम जाने के लिए नाथूपुर (गुरुग्राम) निवासी उमेश की कैब बुक की थी। कुछ दूर चलने के बाद महिलाओं ने अलवर जाने की बात कही। चालक ने इसके लिए तीन हजार रुपये किराया मांगा। महिलाओं ने चार हजार रुपये देने की बात कह अलवर से वापस दिल्ली छोड़ने को कहा। इस पर उमेश सहमत हो गया। दोनों महिलाओं की गोद में नवजात बच्चियां थीं। खेड़की दौला टोल के पास उमेश ने कैब में सीएनजी भरवाई। कुछ दूर चलने के बाद महिलाओं ने एक मेडिकल स्टोर से दूध की शीशी और दूध लेने के लिए कहा। इस पर मानेसर फ्लाईओवर पार करने के बाद उमेश ने कैब रोकी और सामान लेने के बाद अलवर रवाना हो गया।
सौदे के लिए बातचीत से हुआ शक
कैब में बैठे लोग किसी से फोन पर बच्चियों को तीन लाख रुपये में बेचने की बात कर रहे थे, लेकिन बात नहीं बन पाई। इस पर महिलाओं ने उमेश से कहा कि अब उन्हें अलवर नहीं जाना। इस पर चालक ने मानेसर अंडरपास से कैब को वापस मोड़ दिया। यह सब बातें सुनकर उमेश समझ चुका था कि कैब में बैठे लोग बच्चा चोरी करके बेचने जा रहे हैं। उसने सतर्कता दिखाते हुए डीएलएफ फेज तीन मेट्रो स्टेशन के पास कुछ सामान लेने की बात कहकर कैब रोकी और नीचे उतरकर पुलिस को सूचना दे दी। थोड़ी देर बाद वह कैब को सीधे डीएलएफ फेज तीन थाने ले गया।
दिल्ली से चोरी की थीं दोनों बच्चियां
आरोपियों ने बताया है कि अपने साथियों के साथ मिलकर वह बच्चों को चोरी करते हैं। जहां अच्छे रुपये मिलते हैं, वहीं उन्हें बेच देते हैं। पूजा और वीणा के सहयोग से उन्होंने दोनों बच्चियां दिल्ली से चोरी की थीं और तीन लाख रुपयों में बेचने का सौदा तय हुआ था।