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Gurugram News: शिक्षा के बाजारीकरण पर जताई चिंता
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-शिक्षक दिवस पर एटक के राज्य महासचिव अनिल पवार ने निजीकरण और संविदा व्यवस्था पर जताई चिंता, शिक्षकों से आर्थिक-सामाजिक विभाजन के खिलाफ एकजुट होने का किया आह्वान
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। श्रमिक संगठन एटक के राज्य महासचिव अनिल पवार ने शिक्षक दिवस पर शिक्षा व्यवस्था के बढ़ते बाजारीकरण और शिक्षकों के व्यावसायिक अवमूल्यन पर चिंता जताई। उन्होंने शिक्षकों से आर्थिक और सामाजिक विभाजन के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया। पवार ने कहा कि शिक्षा को अधिकार के बजाय मुनाफे के कारोबार में बदला जा रहा है। निजीकरण के कारण गरीब परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो रही है। उन्होंने स्थायी नियुक्तियों के स्थान पर संविदा, अतिथि शिक्षक और बाह्य स्रोत से भर्ती व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी सवाल उठाए। इससे शिक्षकों को कम वेतन और असुरक्षित रोजगार का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने की मांग-
अनिल पवार ने शिक्षा को बिकाऊ वस्तु के बजाय मौलिक अधिकार बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सस्ता श्रमिक मानने के बजाय राष्ट्र निर्माता का दर्जा मिलना चाहिए। संविदा और ठेका प्रथा समाप्त कर सम्मानजनक रोजगार देने की जरूरत है। उन्होंने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों के श्रमिक संघ अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। साथ ही शिक्षकों से शोषणमुक्त और समानतामूलक समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। श्रमिक संगठन एटक के राज्य महासचिव अनिल पवार ने शिक्षक दिवस पर शिक्षा व्यवस्था के बढ़ते बाजारीकरण और शिक्षकों के व्यावसायिक अवमूल्यन पर चिंता जताई। उन्होंने शिक्षकों से आर्थिक और सामाजिक विभाजन के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया। पवार ने कहा कि शिक्षा को अधिकार के बजाय मुनाफे के कारोबार में बदला जा रहा है। निजीकरण के कारण गरीब परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो रही है। उन्होंने स्थायी नियुक्तियों के स्थान पर संविदा, अतिथि शिक्षक और बाह्य स्रोत से भर्ती व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी सवाल उठाए। इससे शिक्षकों को कम वेतन और असुरक्षित रोजगार का सामना करना पड़ रहा है।
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शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने की मांग-
अनिल पवार ने शिक्षा को बिकाऊ वस्तु के बजाय मौलिक अधिकार बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सस्ता श्रमिक मानने के बजाय राष्ट्र निर्माता का दर्जा मिलना चाहिए। संविदा और ठेका प्रथा समाप्त कर सम्मानजनक रोजगार देने की जरूरत है। उन्होंने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों के श्रमिक संघ अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। साथ ही शिक्षकों से शोषणमुक्त और समानतामूलक समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया।
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