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गुरुग्राम: चिंटेल्स के ई और एफ टावर तुरंत खाली करवाए बिल्डर
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डीटीपी प्रवर्तन ने चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को पत्र लिखा
कहा अगर हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी बिल्डर की होगी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन) ने चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस भेज कर सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के टावर ई और एफ को तत्काल प्रभाव से खाली करवाने के लिए कहा है। इन दोनों टावरों को मंगलवार को ही प्रशासन ने रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया है। डीटीपी प्रवर्तन ने कहा है कि इन टावरों की जर्जर हालत को देखते हुए अगर कोई हादसा होता है तो यह बिल्डर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। जिसके लिए विधिक कार्रवाई की जा सकती है।
आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों की टीम ने संरचनात्मक जांच के बाद हादसाग्रस्त डी टावर के साथ-साथ ई और एफ टावर को भी रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया है। डीटीपी प्रवर्तन ने चिंटेल्स को भेजे पत्र में जांच रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि इन टावरों के निर्माण में क्लोराइड युक्त पानी का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही जो कंक्रीट इस्तेमाल किया है वह भी बेहद घटिया दर्जे का है। इसी के चलते इमारत के ढांचे में जंग लगने की प्रक्रिया शुरू हुई। दिए गए नोटिस में इस टावर में रह रहे 40 परिवारों की जिंदगी को खतरा बताया गया है। जिसके चलते इनको तत्काल प्रभाव से खाली करवाने के लिए कहा है। इसके लिए बिल्डर जो भी जरूरी हो, वह कदम उठाए। इन टावरों की मरम्मत तकनीकी रूप से संभव नहीं है। इस नोटिस की प्रतिलिपि उपायुक्त को भी भेजी गई है। इसके साथ ही एडीसी, वरिष्ठ नगर योजनाकार और सोसाइटी की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को भी भेजी गई है।
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कहा अगर हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी बिल्डर की होगी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन) ने चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस भेज कर सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के टावर ई और एफ को तत्काल प्रभाव से खाली करवाने के लिए कहा है। इन दोनों टावरों को मंगलवार को ही प्रशासन ने रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया है। डीटीपी प्रवर्तन ने कहा है कि इन टावरों की जर्जर हालत को देखते हुए अगर कोई हादसा होता है तो यह बिल्डर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। जिसके लिए विधिक कार्रवाई की जा सकती है।
आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों की टीम ने संरचनात्मक जांच के बाद हादसाग्रस्त डी टावर के साथ-साथ ई और एफ टावर को भी रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया है। डीटीपी प्रवर्तन ने चिंटेल्स को भेजे पत्र में जांच रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि इन टावरों के निर्माण में क्लोराइड युक्त पानी का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही जो कंक्रीट इस्तेमाल किया है वह भी बेहद घटिया दर्जे का है। इसी के चलते इमारत के ढांचे में जंग लगने की प्रक्रिया शुरू हुई। दिए गए नोटिस में इस टावर में रह रहे 40 परिवारों की जिंदगी को खतरा बताया गया है। जिसके चलते इनको तत्काल प्रभाव से खाली करवाने के लिए कहा है। इसके लिए बिल्डर जो भी जरूरी हो, वह कदम उठाए। इन टावरों की मरम्मत तकनीकी रूप से संभव नहीं है। इस नोटिस की प्रतिलिपि उपायुक्त को भी भेजी गई है। इसके साथ ही एडीसी, वरिष्ठ नगर योजनाकार और सोसाइटी की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को भी भेजी गई है।
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