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मानेसर क्षेत्र के विकास का ब्लूप्रिंट तैयार
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गुरुग्राम। आने वाले दो माह में मानेसर नगर निगम क्षेत्र की तस्वीर किसी हद तक बदली नजर आएगी। निगम ने क्षेत्र के विकास का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। इसके तहत समस्याओं को सूचीबद्ध किया गया है। अगर सब कुछ सही रहा तो अगले दो महीने में अधिकांश समस्याओं से क्षेत्र को छुटकारा मिल जाएगा।
पिछले साल 23 दिसंबर को प्रदेश में मानेसर के रूप में 11वें नगर निगम के गठन की घोषणा की थी। इसमें मानेसर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र सहित 29 गांवों को शामिल किया गया। इसका कुल क्षेत्रफल 124.32 वर्ग किलोमीटर का निर्धारित गया था।
इसमें शामिल किए गए गांवों का करीब 350 करोड़ रुपये का राजस्व पंचायत विभाग से नगर निगम में ट्रांसफर हो गया। इनमें शिकोहपुर गांव की सबसे अधिक 120 करोड़ रुपये की राशि निगम में गई है। मानेसर की करीब 80 करोड़, नौरंगपुर की करीब 70 करोड़, रामपुर की करीब 20 करोड़, ढोरका की करीब 10 करोड़ और अन्य गांवों की राशि पांच से दस करोड़ के बीच है।
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सर्वे के आधार पर तय होगी विकास कार्यों की प्राथमिकता
नगर निगम मानेसर के विकास कार्यों की प्राथमिकता सर्वे के आधार पर तय होगी। मानेसर नगर निगम कि अतिरिक्त आयुक्त हरिओम अत्री के मुताबिक सबसे पहले सीवर, सड़क, स्ट्रीट लाइट पर काम होगा। उन स्थानों का सर्वे कराया गया है जहां जलभराव होता है। साथ ही सड़कों के सर्वे का काम भी पूरा कर लिया गया है। जल्द ही सीवर, ड्रेनेज और सड़कों के टेंडर प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी। कोरोना के कारण थोड़ा विलंब हो रहा है। गांव की लाइटों का सर्वे अंतिम दौर में है।
छह महीने से विकास की बाट जोह रहे लोग
नगर निगम से अभी तक गांवों को कोई फायदा नहीं हुआ। लोगों को यह तक मालूम नहीं कि अधिकारी कहां बैठते हैं। जो गांव नगर निगम में शामिल हुए हैं, उनमें समस्याओं का अंबार लग है। सफाई तक नहीं होती।
-धर्मेंद्र यादव, निवासी
पंचायत होती तो समस्याएं विकराल रूप नहीं लेती। गांवों में न सफाई है न स्ट्रीट लाइट, न शुद्ध पेयजल। मंत्री, विधायक और निगम अधिकारियों तक समस्याओं के बारे में अवगत करा दिया, लेकिन कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया जा रहा है। अब भी अगर नगर निगम समय से काम शुरू कर दे तो कोई परेशानी नहीं।
-राज यादव, गढ़ी गांव
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पिछले साल 23 दिसंबर को प्रदेश में मानेसर के रूप में 11वें नगर निगम के गठन की घोषणा की थी। इसमें मानेसर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र सहित 29 गांवों को शामिल किया गया। इसका कुल क्षेत्रफल 124.32 वर्ग किलोमीटर का निर्धारित गया था।
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इसमें शामिल किए गए गांवों का करीब 350 करोड़ रुपये का राजस्व पंचायत विभाग से नगर निगम में ट्रांसफर हो गया। इनमें शिकोहपुर गांव की सबसे अधिक 120 करोड़ रुपये की राशि निगम में गई है। मानेसर की करीब 80 करोड़, नौरंगपुर की करीब 70 करोड़, रामपुर की करीब 20 करोड़, ढोरका की करीब 10 करोड़ और अन्य गांवों की राशि पांच से दस करोड़ के बीच है।
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सर्वे के आधार पर तय होगी विकास कार्यों की प्राथमिकता
नगर निगम मानेसर के विकास कार्यों की प्राथमिकता सर्वे के आधार पर तय होगी। मानेसर नगर निगम कि अतिरिक्त आयुक्त हरिओम अत्री के मुताबिक सबसे पहले सीवर, सड़क, स्ट्रीट लाइट पर काम होगा। उन स्थानों का सर्वे कराया गया है जहां जलभराव होता है। साथ ही सड़कों के सर्वे का काम भी पूरा कर लिया गया है। जल्द ही सीवर, ड्रेनेज और सड़कों के टेंडर प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी। कोरोना के कारण थोड़ा विलंब हो रहा है। गांव की लाइटों का सर्वे अंतिम दौर में है।
छह महीने से विकास की बाट जोह रहे लोग
नगर निगम से अभी तक गांवों को कोई फायदा नहीं हुआ। लोगों को यह तक मालूम नहीं कि अधिकारी कहां बैठते हैं। जो गांव नगर निगम में शामिल हुए हैं, उनमें समस्याओं का अंबार लग है। सफाई तक नहीं होती।
-धर्मेंद्र यादव, निवासी
पंचायत होती तो समस्याएं विकराल रूप नहीं लेती। गांवों में न सफाई है न स्ट्रीट लाइट, न शुद्ध पेयजल। मंत्री, विधायक और निगम अधिकारियों तक समस्याओं के बारे में अवगत करा दिया, लेकिन कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया जा रहा है। अब भी अगर नगर निगम समय से काम शुरू कर दे तो कोई परेशानी नहीं।
-राज यादव, गढ़ी गांव