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Gurugram News: जिले के उद्योगों पर गहरा सकता है संकट
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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही खींचतान का असरसंवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही खींचतान का असर आने वाले दिनों में जिले के उद्योगों पर भी पड़ सकता है। जिले से बड़े पैमाने पर कपड़ा उत्पादों, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान और दवा उद्योग से जुड़े उत्पादों का कारोबार विदेशों में होता है।
ऐसे में अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क बढ़ने या व्यापारिक शर्तें सख्त होने से जिले के निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है। इससे विदेशी खरीदारों से नए ऑर्डर मिलने, पुराने ऑर्डर की कीमत तय करने और दूसरे देशों के उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करने में मुश्किल आ सकती है। केंद्र सरकार के वाणिज्यिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में जिले से कपड़ा, परिधान और हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात लगभग 15,104 करोड़ रुपये रहा। इससे जिले के कपड़ा उद्योग की निर्यात में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी का पता चलता है। हालांकि, यह आंकड़ा केवल कपड़ा, परिधान और हस्तशिल्प क्षेत्र का है, जिले के सभी उद्योगों के कुल निर्यात का नहीं। उद्योग जगत की ओर से जिले के कुल निर्यात को करीब 35 हजार करोड़ से अधिक का बताया जा रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव की प्रमुख वजह आयात शुल्क, बाजार तक पहुंच और ऊर्जा व्यापार जैसे मुद्दे हैं। छह अक्तूबर 2026 को प्रकाशित रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में व्यापार समझौते की रूपरेखा सामने आने के बावजूद दोनों देशों में बातचीत फिर ठहराव पर पहुंच गई है।
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अमेरिका में शुल्क बढ़ने की स्थिति में विदेशी खरीदार भारतीय उत्पादों की कीमतों पर दोबारा बातचीत कर सकते हैं। इससे ऑर्डर और मुनाफे पर दबाव पड़ने की आशंका है।
- अश्विन जैन, कारोबारी
दवा उत्पादों पर शुल्क की स्थिति अलग-अलग होने के कारण कंपनियों को उत्पादवार नियमों की स्पष्टता चाहिए, ताकि निर्यात और उत्पादन की योजना प्रभावित न हो।
- एसपी आहूजा, उद्यमी
अमेरिकी बाजार में शुल्क और व्यापारिक नियमों को लेकर अनिश्चितता रहने से निर्यात की कीमत तय करना तथा लंबी अवधि के आपूर्ति समझौते करना कठिन हो सकता है। - मनीश जैन ऑटोमोबाइल पार्ट्स उद्यमी
निर्यात ऑर्डर में कमी या भुगतान में देरी होने पर छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में बाजारों में विविधता और स्थिर व्यापारिक नीतियां महत्वपूर्ण हैं।
- सुनील यादव, कारोबारी
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गुरुग्राम। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही खींचतान का असर आने वाले दिनों में जिले के उद्योगों पर भी पड़ सकता है। जिले से बड़े पैमाने पर कपड़ा उत्पादों, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान और दवा उद्योग से जुड़े उत्पादों का कारोबार विदेशों में होता है।
ऐसे में अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क बढ़ने या व्यापारिक शर्तें सख्त होने से जिले के निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है। इससे विदेशी खरीदारों से नए ऑर्डर मिलने, पुराने ऑर्डर की कीमत तय करने और दूसरे देशों के उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करने में मुश्किल आ सकती है। केंद्र सरकार के वाणिज्यिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में जिले से कपड़ा, परिधान और हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात लगभग 15,104 करोड़ रुपये रहा। इससे जिले के कपड़ा उद्योग की निर्यात में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी का पता चलता है। हालांकि, यह आंकड़ा केवल कपड़ा, परिधान और हस्तशिल्प क्षेत्र का है, जिले के सभी उद्योगों के कुल निर्यात का नहीं। उद्योग जगत की ओर से जिले के कुल निर्यात को करीब 35 हजार करोड़ से अधिक का बताया जा रहा है।
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भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव की प्रमुख वजह आयात शुल्क, बाजार तक पहुंच और ऊर्जा व्यापार जैसे मुद्दे हैं। छह अक्तूबर 2026 को प्रकाशित रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में व्यापार समझौते की रूपरेखा सामने आने के बावजूद दोनों देशों में बातचीत फिर ठहराव पर पहुंच गई है।
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अमेरिका में शुल्क बढ़ने की स्थिति में विदेशी खरीदार भारतीय उत्पादों की कीमतों पर दोबारा बातचीत कर सकते हैं। इससे ऑर्डर और मुनाफे पर दबाव पड़ने की आशंका है।
- अश्विन जैन, कारोबारी
दवा उत्पादों पर शुल्क की स्थिति अलग-अलग होने के कारण कंपनियों को उत्पादवार नियमों की स्पष्टता चाहिए, ताकि निर्यात और उत्पादन की योजना प्रभावित न हो।
- एसपी आहूजा, उद्यमी
अमेरिकी बाजार में शुल्क और व्यापारिक नियमों को लेकर अनिश्चितता रहने से निर्यात की कीमत तय करना तथा लंबी अवधि के आपूर्ति समझौते करना कठिन हो सकता है। - मनीश जैन ऑटोमोबाइल पार्ट्स उद्यमी
निर्यात ऑर्डर में कमी या भुगतान में देरी होने पर छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में बाजारों में विविधता और स्थिर व्यापारिक नीतियां महत्वपूर्ण हैं।
- सुनील यादव, कारोबारी