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19 देशों के जल स्त्रोतों पर चीन का एकाधिकार पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा

Sun, 24 Feb 2019 01:50 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 24 Feb 2019 01:50 AM IST
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19 देशों के जल स्त्रोतों पर चीन का एकाधिकार पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा
फोटो समाचार
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19 देशों के जल स्रोतों पर चीन का एकाधिकार है गंभीर खतरा
हिमालय सुरक्षित-पर्यावरण सुरक्षित विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पहुंचे आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। प्राकृतिक संसाधनों को लेकर हिमालय पर निर्भर एशियाई देशों के लिए मौजूदा समय में चीन बड़ा खतरा बनता जा रहा है। हिमालय के ऊपरी हिस्से निकलने वाले जल स्रोतों पर चीन के एकाधिकार से 19 एशियाई देश प्रभावित हो रहे है। इससे भविष्य में चीन बड़ा संकट पैदा कर सकता है। यह उद्गार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक एवं भारत-तिब्बत सहयोग मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने व्यक्त किए। वह भारत-तिब्बत सहयोग मंच की ओर से सेक्टर-14 राजकीय महिला महाविद्यालय में हिमालय सुरक्षित-पर्यावरण सुरक्षित विषय पर शनिवार को शुरू हुए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने आए थे।
उन्होंने विदेशी प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि एशियाई देशों में ग्लोबल वॉर्मिंग समेत पर्यावरण को लेकर बढ़ रहे खतरों से निपटने के लिए सबसे पहले चीन के एकाधिकार को मिलकर समाप्त करने की जरूरत है। अगर समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया कि भविष्य में यह एकाधिकार एशियाई देशों के लिए बड़ा संकट पैदा कर देगा। वहीं पर्यावरणविदों ने वैश्विक समस्या के मद्देनजर, ग्लोबल वार्मिंग से हिमालय की प्रकृति, पिघलते ग्लेशियर, हिमस्खलन, भूस्खलन, नदियों के घटते जलस्तर व हिमालय के प्राकृतिक वातावरण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की बातों को प्रमुखता से रखा।
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सम्मेलन में तिब्बत से पहुंची तिब्बतियन सरकार इन एक्साइल की पूर्व गृहमंत्री गैरी डोरमा ने हिमालय सुरक्षित रखने और तिब्बत की आजादी को लेकर खुलकर बातें रखी। उन्होंने जय भारत, जय तिब्बत का नारा लगाया। म्यांमार से पूज्य भिक्षु कुठला एवं पूज्य माता यूसिंगा, बांग्लादेश से ओईंद्रला अतर, जाबिया से बिली, अफगानिस्तान से हारुन सैफी, नाइजीरिया से डॉ क्रिस, नेपाल से अनवेरा एवं राधा, भूटान से तासी फुसोक, मंच के संरक्षक एवं हिमाचल प्रदेश स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के उप कुलपति डॉ. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री, मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी एवं अनेक देशों के प्रमुख राजनयिक शामिल रहे। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के संयोजक प्रमोद गोयल व मलिंग गोंबु ने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन में रविवार को विभिन्न देशों से आए पर्यावरणविद और प्रतिनिधि अपनी-अपनी बात रखेंगे।
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