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दर-दर की ठोकरें खाने के बाद भी महिला को नहीं मिला न्याय
Updated Fri, 20 Jul 2018 06:52 PM IST
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रोडवेज वोल्वो बस अटैचमेंट मामला:-
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दर-दर की ठोकरें खाने के बाद भी महिला को नहीं मिला न्याय
क्रॉसर...
- वोल्वो बस अटैच होने से विभाग को हो रहा लाखों रुपयों के राजस्व का नुकसान
- विभाग के लापरवाह अधिकारियों के कारण 15 दिन बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेवानिवृत्त हुए रोडवेज कर्मचारी की पेंशन नहीं देने को लेकर कोर्ट द्वारा हरियाणा राज्य परिवहन विभाग की वोल्वो बस के अटैचमेंट मामले में महिला को अब तक न्याय नहीं मिला हैै। 4 जुलाई को कोर्ट के आदेश के बाद भी महिला को अपने पति की पेंशन का कोई लाभ नहीं मिला। वहीं दूसरी ओर विभाग के लापरवाह अधिकारियों के कारण 15 दिन से वोल्वो बस अटैच होने से विभाग को रोजाना करीब 60 से 65 हजार रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
टिकली गांव निवासी धर्मवीर परिवहन विभाग के गुरुग्राम डिपो में मैकेनिक कार्यरत था। 2006 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें अभी तक पेंशन नहीं दी गई है। मैकनिक धर्मवीर की पत्नी कैलाश देवी ने इसके लिए कोर्ट में गुहार लगाई। 26 फरवरी 2015 को कोर्ट ने रोडवेज को कैलाश देवी को उसके पति के पेंशन के सभी लाभ देने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी रोडवेज अधिकारियों की नींद नहीं खुली तो कोर्ट ने 4 जुलाई को रोडवेज की वोल्वो बस अटैच करने के आदेश दे दिए। बस अटैच होने के 15 दिन बाद भी विभाग की ओर से महिला को अभी तक कोई लाभ नहीं मिला है। कोर्ट के आदेश के बाद भी महिला दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।
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विभाग को दस लाख हुआ राजस्व नुकसान...
रोडवेज डिपो में करीब 20 वोल्वों की बसें हैं जो सभी चंडीगढ़ और आगरा के लंबे रूटों पर चलाई जाती हैं। कोर्ट ने रोडवेज की जिस वोल्वो बस को अटैच किया है, उसकी रोजाना की करीब 60 हजार से 65 हजार रुपये के राजस्व कमाई थी। बस के अटैच होने के कारण 15 दिन में विभाग को करीब 9.75 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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बयान...
इस मामले की फाइल मुख्यालय को भेज दी गई है। वहीं से ही पेंशन बनकर आएगी। जल्द ही महिला को न्याय मिलेगा।
- गौरव अंतिल, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो, गुरुग्राम।
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दर-दर की ठोकरें खाने के बाद भी महिला को नहीं मिला न्याय
क्रॉसर...
- वोल्वो बस अटैच होने से विभाग को हो रहा लाखों रुपयों के राजस्व का नुकसान
- विभाग के लापरवाह अधिकारियों के कारण 15 दिन बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेवानिवृत्त हुए रोडवेज कर्मचारी की पेंशन नहीं देने को लेकर कोर्ट द्वारा हरियाणा राज्य परिवहन विभाग की वोल्वो बस के अटैचमेंट मामले में महिला को अब तक न्याय नहीं मिला हैै। 4 जुलाई को कोर्ट के आदेश के बाद भी महिला को अपने पति की पेंशन का कोई लाभ नहीं मिला। वहीं दूसरी ओर विभाग के लापरवाह अधिकारियों के कारण 15 दिन से वोल्वो बस अटैच होने से विभाग को रोजाना करीब 60 से 65 हजार रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
टिकली गांव निवासी धर्मवीर परिवहन विभाग के गुरुग्राम डिपो में मैकेनिक कार्यरत था। 2006 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें अभी तक पेंशन नहीं दी गई है। मैकनिक धर्मवीर की पत्नी कैलाश देवी ने इसके लिए कोर्ट में गुहार लगाई। 26 फरवरी 2015 को कोर्ट ने रोडवेज को कैलाश देवी को उसके पति के पेंशन के सभी लाभ देने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी रोडवेज अधिकारियों की नींद नहीं खुली तो कोर्ट ने 4 जुलाई को रोडवेज की वोल्वो बस अटैच करने के आदेश दे दिए। बस अटैच होने के 15 दिन बाद भी विभाग की ओर से महिला को अभी तक कोई लाभ नहीं मिला है। कोर्ट के आदेश के बाद भी महिला दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।
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विभाग को दस लाख हुआ राजस्व नुकसान...
रोडवेज डिपो में करीब 20 वोल्वों की बसें हैं जो सभी चंडीगढ़ और आगरा के लंबे रूटों पर चलाई जाती हैं। कोर्ट ने रोडवेज की जिस वोल्वो बस को अटैच किया है, उसकी रोजाना की करीब 60 हजार से 65 हजार रुपये के राजस्व कमाई थी। बस के अटैच होने के कारण 15 दिन में विभाग को करीब 9.75 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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बयान...
इस मामले की फाइल मुख्यालय को भेज दी गई है। वहीं से ही पेंशन बनकर आएगी। जल्द ही महिला को न्याय मिलेगा।
- गौरव अंतिल, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो, गुरुग्राम।
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