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नूंह के चुनाव में टकराएंगी दो सियासतें

Mon, 13 Oct 2014 07:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Mon, 13 Oct 2014 07:34 PM IST
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Gurgaon's nooh wiil see clash of two old rivals in election.

मेवात के नूंह विधानसभा क्षेत्र से इलाके के दो सियासी घराने के वारिस आमने-सामने हैं। चौधरी तैयब हुसैन के पुत्र जाकिर हुसैन इंडियन नेशनल लोकदल और चौधरी खुर्शीद अहमद के बड़े बेटे आफताब अहमद कांग्रेस के उम्मीद हैं।

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आफताब इलाके से विधायक होने के साथ भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार में परिवहन मंत्री भी रहे हैं। इसलिए चुनाव मैदान में उनके प्रतिद्वंदी उनके सारे दावों की बखिया उधेड़ने में लगे हैं। पानी, बिजली, नौकरी, रोजगार, उच्च शिक्षा के मसले पर जाकिर एवं आफताब अहमद के अपने-अपने तर्क हैं। यहां प्रस्तुत है उनकी बातचीत के मुख्य अंश।
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आफताब अहमद
हमारे कार्यकाल में नूंह सहित पूरे मेवात में रिकार्ड विकास कराए गए हैं। मेडिकल कॉलेज तक खुलवाया गया। उच्च शिक्षा के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज से लेकर कई नए आईटीआई की व्यवस्था की गई। एमडीयू एवं उर्दू यूनिवर्सिटी के यहां स्टडी सेंटर स्थापित किए गए हैं।
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बुनियादी ढांचा में पिछले पांच वर्षों में व्यापक परिवर्तन आया है। तकरीबन सारी सड़कें सुधर गई हैं। पानी का संकट भी बहुत हद तक दूर हुआ है। कोटला झील पर काम हो रहा है। इस परियोजना के पूरा होने पर सिंचाई का संकट भी दूर हो जाएगा।

आईएमटी और हुडा के सेक्टर के लिए किसानों से अधिग्रहण की गई जमीन का मुआवजा उम्मीद से कहीं अधिक दिया गया है। मुआवा भी सरकार की नई नीति के तहत दिया गया है। इस मसले पर किसानाें का थोड़ा विरोध था जिसे शांत कर दिया गया।

परिवहन व्यवस्था भी बेहतर हुई है। मेवात में कई बस स्टैंड बनाए गए हैं। फिरोजपुर झिरकार में उप डिपो बनाया जा रहा है। एक बस अड्डा पुन्हाना में भी तैयार हो रहा है। लड़कियों के लिए विशेष बसें चलाई जा रही हैं ताकि उनकी उच्च शिक्षा हासिल करने की राह में कोई रोड़ा नहीं आए।

चु़नाव जीतने के बाद पानी, शिक्षा, बुनियादी ढांचा को और बेहतर बनाने को लेकर काम करूंगा। इसके लिए एक खाका भी खींच लिया गया है। चुनाव नहीं होते तो इसपर अमल भी शुरू हो जाता।

जाकिर हुसैन
नूंह से मौजूदा विधायक एवं परिवहन मंत्री बेहद फेंकू हैं। केंद्र की योजनाओं को अपने खाते में जोड़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की योजना इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के मुख्यमंत्रित्वकाल में बनी थी। इसे वह अपने खाते में जोड़ रहे हैं। यूनिवर्सिटी स्थापित करने की मांग पुरानी है।

इसको लेकर विधायक ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। स्टडी सेंटर को ही यूनिवर्सिटी बताते रहे हैं। जबकि उन्हें पता है कि एक फुलफलेज यूनिवर्सिटी एवं स्टडी सेंटर में क्या अंतर है।

सड़कें बवाने और बुनियदी ढांचे में सुधार की बात भी गलत है। बिजली चौबीस घंटे में 10 घंटे भी नहीं रहती। पानी का संकट नूंह के अलावा पूरी मेवात में है। जल आपूर्ति के लिए राजीव गांधी रेनिवेल योजना शुरू की गई है। लेकिन उसका पानी भी नूंह नहीं आता।

नूंह के विधायक मंत्री रहने के बावजूद इलाके के युवाओं के रोजी-रोजगार के लिए कुछ नहीं कराए पाए। नौकरियों में मेवात के लड़कों को नाम मात्र भागीदारी मिली। मेवात कैडर शिक्षक की बात की जा रही है।

इलाके का विधायक परिवहन मंत्री रहते कुछ नहीं कर पाया। महिलाओं के लिए स्पेशल बस भी चुनाव से चंद दिन पहले शुरू की गईं। जबकि मंत्री जी को पता है कि क्षेत्र की लड़कियां किसी तरह दूसरे शहरों के कॉलेजों में पढ़ने जाती हैं।


तावड़ू, नूंह, फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना में बस अड्डे के निर्माण के नाम पर केवल जमाक हो रहा है। आनन फानन में इनका निर्माण कार्य शुरू कराने से जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी नहीं हो पाईं।

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