कैंसरग्रस्त पति व बच्चों को पालने के लिए इन दोनों ने छोड़ा था घर
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नौकरी की आस में नेपाल से भारत फिर सऊदी अरब और फिर भारत लाई गईं नेपाली युवतियों ने सऊदी राजनयिकों के चंगुल से छूटकर अपनी जो आप बीती सुनाई है उससे किसी का भी दिल दर्द से भर उठ सकता है।
सऊदी राजनयिकों के कब्जे से आजाद हुई दो नेपाली महिलाओं में से एक तीस साल की है और नेपाल में उसके दो बच्चे हैं और पति कैंसर से पीड़ित है। वहीं दूसरी महिला करीब 50 साल की है और वो तलाकशुदा है। इनकी पारिवारिक स्थिति ही उन्हें नेपाल से बाहर लाई।
पिछले चार महीनों में इन दोनों महिलाओं ने जो झेला है उसके बाद इन्होंने तय कर लिया है कि कभी अपने देश से बाहर कदम नहीं रखेंगी और इन्होंने दूसरे नेपालियों से भी आग्रह किया है कि काम की तलाश में कभी अपने देश से बाहर न निकलें।
सऊदी पहुंचकर बहुत खुश हई थीं पीड़िताएं
गौरतलब है कि जब तक नेपाली दूतावास दोनों पीड़िताओं को अस्थाई पासपोर्ट उपलब्ध नहीं करा देता ये भारत में ही रहेंगी क्योंकि इनका स्थाई पासपोर्ट अब भी सऊदी राजनयिकों के पास ही है और वो प्राप्त नहीं हो सका है।
सऊदी राजनयिकों की कैद से छूटने के बाद पीड़िताओं ने बताया कि, जब उन्हें पता चला था कि वो सऊदी में नौकरी करने वाली हैं तो वो काफी खुश हुई थीं। उन्होंने परिवार से वादा किया था कि वो हर महीने उन्हें पैसे भेजेंगी, जिससे वो अपना नया घर बना सकें और दुकान भी खोल सकें।
दोनों ही सऊदी पहुंचकर काफी खुश थीं और अपने आपको बहुत भाग्यशाली समझती थीं। उन्होंने अपने मालिक से सैलरी एडवांस में मांगी थी तब उन्हें बताया गया था कि तीन महीने पूरे होने के बाद ही उन्हें सैलरी मिलेगी।
गुड़गांव में ऐसे जहन्नुम बन गई जिंदगी
पीड़िताओं ने बताया कि वो काफी दुखी थीं जब उन्हें साऊदी से भारत वापस लाया जा रहा था। क्योंकि उन्हें लग रहा था कि भारत में उनकी सैलरी काफी कम हो जाएगी, लेकिन उन्हें भरोसा दिलाया गया कि भारत में भी उन्हें साऊदी जैसी सैलरी मिलेगी।
जब वो भारत पहुंची तो उन्हें गुड़गांव के कैट्रीओना अपार्टमेंट, एंबिएंस आइलैंड, गुड़गांव ले जाया गया। वहां उन्हें घर की सफाई, खाना बनाने, कपड़ा धोने और डस्टिंग का काम सौंपा गया। दोनों ही सुबह जल्दी उठ जाती थीं और रात में करीब 1 बजे के बाद ही सो पाती थीं।
बुखार होने पर भी उनसे काम करवाया जाता था और जरा भी दया नहीं दिखाई जाती थी। अक्सर खाना न दिए जाने के कारण उन्हें पानी पीकर ही सोना पड़ता था। पीड़िताओं के अनुसार फ्लैट पर जो मेहमान आते थे वो भी सऊदी राजनयिक जैसी ही भाषा बोलते थे। पीड़िताओं को उनकी भाषा समझ नहीं आती थी और न ही आरोपियों को पीड़िताओं की।
पीड़िताओं को घरवालों के साथ ही मेहमानों के भी मसाज करने को कहा जाता था और बाद में वो उनका रेप करते थे। राजनयिक की पत्नी मेहमानों से मिलने वाले टिप्स लेकर पीड़िताओं को बताती थी।