नक्सलियों की सुगबुगाहट से फैली सनसनी, अलर्ट
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नोएडा में पकड़े गए कुख्यात माओवादी कमांडर कृष्णा मोची उर्फ अभय उर्फ अजय के गुड़गांव कनेक्शन के खुलासे के बाद पुलिस में भी सकते में आ गई है।
हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस ऑपरेशन को लेकर यूपी पुलिस ने उनसे संपर्क नहीं साधा है।
गुड़गांव में रुके माओवादी कमांडर की सूचना को लेकर खुफिया तंत्र के फेल होने के बाद पुलिस अपने स्तर पर जांच पड़ताल में जुट गई है।
यूपी और बिहार पुलिस का ज्वॉइंट ऑपरेशन
यूपी और बिहार पुलिस के ज्वॉइंट ऑपरेशन को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की टीम भी इस पर निगरानी रख रही है। जिसमें उस माओवादी के रिश्तेदार की तलाश की जा रही है।
शुक्रवार रात नोएडा पुलिस की एसटीएफ ने फेज दो क्षेत्र में होजरी कांप्लेक्स के बी ब्लॉक स्थित सीजीएस अपेरल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के बाहर से माओवादी कमांडर कृष्णा मोची उर्फ अभय उर्फ अजय को गिरफ्तार किया था।
जिसके बाद यूपी पुलिस के आला अधिकारियों की निगरानी में हुई पूछताछ में मोची ने खुलासा किया कि 19 मार्च 2014 को पुलिस मुठभेड़ के दौरान विस्फोट से घायल होने के बाद वह पुलिस से बचने के लिए गुड़गांव अपने रिश्तेदार के यहां आया था।
अब हो रही ठिकाने की तलाश
कुछ दिनों तक इलाज कराने के बाद वह मुंबई और फिर दिल्ली के रास्ते नोएडा पहुंच गया था।
जिसमें नोएडा के गांव सलारपुर में कमरा किराये पर लेकर वह फर्जी नाम से नोएडा की एक कंपनी में बतौर हेल्पर नौ हजार रुपये में नौकरी कर रहा था।
माओवादी कमांडर के इस खुलासे के बाद गुड़गांव पुलिस भी सतर्क हो गई है। जिसमें गुड़गांव में किसी ठिकाने पर रुकने और डॉक्टर से इलाज कराने को लेकर पुलिस के आला अधिकारी जांच पड़ताल की जा रही है।
माओवादी ने कहां कराया इलाज?
पुलिस, इंटेलिजेंस से यह जानने में जुटी है कि मार्च में इलाज के दौरान गुड़गांव में रुके माओवादी कमांडर ने कहां और किससे इलाज कराया था।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) विवेक शर्मा ने बताया कि यूपी पुलिस ने अभी तक गुड़गांव पुलिस से संपर्क नहीं किया है।
माओवादी कमांडर के गुड़गांव कनेक्शन को देखते हुए पुलिस का तंत्र सर्तक हो गया है जिसमें यूपी पुलिस से संपर्क किया जाएगा।
मारूति कांड में भी हुई थी सुगबुगाहट
पिछले साल 18 जुलाई को आईएमटी मानेसर स्थित वाहन निर्माता कंपनी मारूति सुजुकी कंपनी में हुए बवाल के बाद इस मामले में माओवादियों का कनेक्शन होने की आशंका सामने आने के बाद पुलिस के अलावा आईबी भी अलर्ट हो गई थी।
इस दौरान श्रमिक संगठनों के बड़े नेताओं के अलावा निचले स्तर पर जांच पड़ताल की गई थी।
हालांकि बाद में पुलिस ने इसे महज अफवाह कहते हुए विराम तो दे दिया था लेकिन आंतरिक स्तर पर इसे लेकर फिर भी आशंका जताई गई।