कभी अकेला नहीं रहा गुड़गांव संसदीय क्षेत्र
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हरियाणा की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाला गुड़गांव कभी पृथक संसदीय क्षेत्र नहीं रहा। स्वतंत्रता के बाद, संयुक्त पंजाब से पहले तथा उसके उपरांत यह कभी फरीदाबाद के साथ रहा तो कभी महेंद्रगढ़ के।
2008 के परिसीमन के बाद गुड़गांव संसदीय क्षेत्र मेवात और रेवाड़ी के विधानसभा सीटों को जोड़कर बनाया गया। यानी गुड़गांव से चुनाव लड़ने वालों के भाग्य का फैसला पहले भी इस जिले के अलावा दूसरे जिलों के लोग भी करते रहे और इस बार भी यही होने वाला है।
आजादी के बाद पहले आम चुनाव से लेकर 1971 तक गुड़गांव-फरीदाबाद एक ही संसदीय क्षेत्र ह़ुआ करता था। इस दौरान मेवात और पलवल जिले नहीं थे।
1977 के चुनाव के समय गुड़गांव को महेंद्रगढ़ संसदीय सीट से जोड़ दिया गया। जबकि मेवात और पलवल फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र का हिस्सा रहे।
नए परिसीमन के बाद गुड़गांव संसदीय क्षेत्र में रेवाड़ी जिले के दो और मेवात के तीन विधानसभा क्षेत्र जोड़े गए हैं। मेवात का हथीन क्षेत्र आज भी फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र के अधीन है। पिछले चुनाव से महेंद्रगढ़ को भिवानी से जोड़ दिया गया है।
पुराने महेंद्रगढ़ में आने वाले विधानसभा क्षेत्र
-सोहना, गुड़गांव, पटौदी, बावल, रेवाड़ी, जाटूसाना, महेंद्रगढ़, अटेली, नारनौल
-अब गुड़गांव संसदीय क्षेत्र में आने वाले विधानसभा क्षेत्र
-गुड़गांव, बादशाहपुर, सोहना, पटौदी, नूंह, फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना, रेवाड़ी, बावल