शर्मनाक है आठ लाख लोगों के इस शहर का सच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खुले में शौच या पेशाब न करने के लिए देश भर में जागरूकता अभियान चल रहा है। समाचार पत्रों, टीवी आदि में विज्ञापनों के जरिये भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ऐसे में नोएडावासी अगर जागरूक हो भी जाएं तो कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि यहां 50 हजार आबादी पर केवल एक सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है। ऐसे में अगर घर से दुरुस्त होकर न निकले तो जरूरत पड़ने पर सड़क किनारे ही लोगों के पास विकल्प बचता है।
प्राधिकरण के मुताबिक नोएडा में मात्र 16 सार्वजनिक शौचालय बने हुए हैं। जबकि यहां की आबादी करीब आठ लाख है। ज्यादातर सार्वजनिक शौचालय झुग्गियों और गांवों के निकट बने हुए हैं। इनका देखरेख सुलभ इंटरनेशनल के अलावा कुछ निजी संगठनों को दिया गया है। वे ही इसे संभालते हैं। शौच के लिए आने वालों से तय शुल्क भी लेते हैं। इन शौचालयों पर विज्ञापन का अधिकार भी इनको मिला हुआ है। इसके एवज में प्राधिकरण को निश्चित राजस्व भी मिलता है।
सेक्टर पांच, आठ, नौ, दस और 16 में 15 हजार के करीब झुग्गियां बनी हुई हैं। कई गांव ऐसे हैं जिनमें लोगों ने किराए के मकसद से कमरे तो बना दिए मगर शौचालय बहुत कम बनाए। इनमें रहने वालों को सुबह-शाम कतार में लगना पड़ता है। ऐसे लोगों को भी रोज सुबह दिक्कत का सामना करना पड़ता है। शौचालय केसाथ ही शहर में मूत्रालय का भी अभाव है। किसी भी मार्ग से गुजरिये मूत्रालय नजर नहीं आएगा। इसी वजह से सड़क किनारे पेशाब करते लोग दिख जाएंगे।
55 नए शौचालय का प्रस्ताव
सेक्टर-पांच, आठ, नौ, 10, 15 व 16 में करीब 15,000 झुग्गियां बनी हुई हैं। इनमें करीब 50 हजार आबादी रहती है। झुग्गियों में रहने वाले 70 फीसदी लोगों ने टैंक बना लिया है, जिसे शौच के लिए इस्तेमाल करते हैं। बाकी के 30 फीसदी झुग्गीवासी या तो सड़क किनारे शौच के लिए जाते हैं या फिर सेक्टर-आठ, नौ व 10 में बने सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करते हैं। प्राधिकरण ने सेक्टर आठ-नौ में शौचालय वैन खड़ा किया था, मगर रखरखाव के अभाव में वह भी क्षतिग्रस्त हो गया। अब प्राधिकरण ने उसे भी हटा लिया है। नए शौचालय बनाने की मांग की जाएगी।
उदय सिंह, अध्यक्ष, नोएडा झुग्गी-झोपड़ी सेवा उत्थान समिति
पीई, वर्क सर्किल सात, नोएडा प्राधिकरण बीके सिंह ने बताया कि शहर में 55 नए शौचालय बनाने की योजना पर काम चल रहा है। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा। ये सभी बीओटी (बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर) के आधार पर बनाएं जाएंगे। इनकी लागत लगभग पांच से छह लाख होगी। इनको बनाने वाली कंपनी को एक निश्चित समय सीमा के लिए शौचालयों पर विज्ञापन का अधिकार दे दिया जाएगा। इनकी जगह भी चिह्नित कर ली गई है। शहर भर में अलग-अलग जगहों में बनाए जाएंगे।
बस स्टॉप पर भी प्लान
लोगों की जरूरत को देखते हुए प्राधिकरण ने तय किया है कि शहर के सभी प्रमुख बस शेल्टरों के पास जहां भी जगह उपलब्ध हो सकेगी, वहां मूत्रालय बनाया जाएगा। प्राधिकरण के नोएडा ट्रैफिक सेल ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। बस शेल्टरों के साथ इनका भी निर्माण शुरू हो जाएगा।