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आबादी की बैकलीज मसले पर किसानों ने ग्रेनो प्राधिकरण को घेरा, बैनर लगाने को लेकर किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की

Mon, 28 Dec 2020 08:05 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: Mohit Mudgal Updated Mon, 28 Dec 2020 08:05 PM IST
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greater noida authority farmers protest for cancellation of sit report on backlease issue
नोएडा प्राधिकरण के सामने प्रदर्शन करते किसान - फोटो : अमर उजाला

किसानों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर भी डेरा डाल दिया है। आबादी की बैकलीज के मसले पर किसानों ने यह आंदोलन शुरू किया है। वे एसआईटी की जांच रिपोर्ट से नाराज हैं। दोपहर में करीब दो घंटे तक हंगामा करने के बाद किसान गेट पर ही टेंट लगाकर अनिरश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। इससे पहले गेट पर टेंट लगाने को लेकर किसानों व पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

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दरअसल, आबादी की बैकलीज के मामले की एसआईटी जांच हुई है। उसकी रिपोर्ट पर किसानों को आपत्ति है। उनका आरोप है कि इस जांच में बाहरी लोगों के नाम हुई आबादी की बैकलीज को बचा दिया गया, जबकि मूल किसानों के नाम बैकलीज को खत्म करने का षणयंत्र किया गया है। इस रिपोर्ट को खारिज किया जाए और जितने भी किसान हैं, उनके नाम आबादी की बैकलीज की जाए।
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इसी मसले पर किसानों ने सोमवार को प्राधिकरण का घेराव करने की चेतावनी दी थी। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे किसान प्राधिकरण के पास जैतपुर गोलचक्कर पर एकत्रित हुए। वहां से ट्रैक्टर-ट्रॉली, बग्गी, कार आदि वाहनों से सैकड़ों किसान प्राधिकरण की तरफ चलने लगे। वहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। किसानों को रोकने की कोशिश की। पुलिस बेरिकेट कर रखा था, जिसे किसानों ने तोड़ दिया। गेट तक पहुंच गए। गेट पर बैनर लगाने लगे तो पुलिस ने रोका। किसानों व पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। धरना खत्म करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी सचिन कुमार सिंह किसानों से मिलने पहुंचे, लेकिन किसानों ने उन्हें लौटा दिया।
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धरने का नेतृत्व कर रहे किसान (सेवा) संघर्ष समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी का कहना है कि प्राधिकरण के चेयरमैन आलोक टंडन, ग्रेटर नोएडा के सीईओ नरेंद्र भूषण या एसआईटी जांच कमेटी के चेयरमैन डॉ. अरुणवीर सिंह के आने पर ही बात करेंगे। उन्होंने प्राधिकरण अधिकारियों पर बिल्डरों व पूंजीपतियों से मिलीभगत का आरोप लगाया। किसान टेंट लगाकर गेट पर ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। हालांकि प्राधिकरण दफ्तर आने-जाने के लिए दूसरा गेट खुला हुआ है, जिससे आवंटी दफ्तर में जाकर अपना काम करा सकते हैं। 


क्या है मसला
बसपा शासनकाल में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहित की। कई किसानों की आबादी की जमीन भी अधिग्रहित हो गई। बैकलीज की पॉलिसी बनाकर 2010-11 में उन जमीनों की बैकलीज की गई। यह बैकलीज सिर्फ मूल किसानों को होनी थी, लेकिन इसका फायदा कुछ बाहरी लोगों ने भी उठाया। उन्होंने भी अपने नाम काफी जमीन छुड़वा ली। किसानों के विरोध के बाद इसकी जांच हुई। गड़बड़ी सामने आने पर एसआईटी जांच की गई। एसआईटी ने अब अपनी रिपोर्ट दे दी है, जिस पर किसान अब सवाल उठा रहे हैं। 

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