दान पेटी में रुपयों की बजाय गरीबों की मदद के लिए दे रहे अनाज
कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे का असर अब दिल्ली के धार्मिक स्थलों पर भी दिखने लगा है। यहां की पेटियों में दान के रूप में नकदी डालने वाले श्रद्धालु पूरी तरह से नदारद हो चुके हैं। मंदिर-गुरुद्वारे ने भी भक्तों के आने पर पाबंदी लगा रखी है। कुछ मंदिरों के कपाट बंद होने से यहां सुबह-शाम की आरती तक बंद हो गई है। ऐसे में संपन्न श्रद्धालु इन धार्मिक स्थलों में कच्चा अनाज देकर पुण्य कमा रहे हैं। धार्मिक स्थलों के प्रबंधक कमेटी भी दान में मिल रहे अनाज की मदद से जरूरतमंदों को दो वक्त का भोजन मुहैया करवा रहे हैं।
दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के पूर्व प्रवक्ता परविंदर सिंह बताते हैं कि लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से दान पेटियां पूरी तरह से खाली पड़ी हैैं। गुरुद्वारे आने वाला जो संपन्न श्रद्धालु पेटी में दान करता था वह घरों में रहकर लॉकडाउन के नियमों का पालन कर रहा है। ऐसे में कुछ श्रद्धालुओं ने मदद के लिए दूसरा तरीका अपनाया है।
यह लोग गरीबों के लिए कच्चा अनाज भेज रहे हैं, जिसकी मदद से दो वक्त का भोजन पैकेट तैयार कर सड़कों पर बेसहारा लोगों को बांटा जा रहा है। वहीं गुरुद्वारे बंगला साहिब में भी जरूरतमंदों के लिए खाने का पैकेट बनाने का काम जारी है। यहां पहले हर दिन सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ लगती थी, जो लॉकडाउन के बाद पूरी तरह बंद हो गई है।
उधर, झंडेवाला मंदिर प्रबंधन ने भी एहतियाती तौर पर 21 मार्च से मंदिर के पट बंद कर दिया था। इस मंदिर पर हर दिन सैकड़ों भक्तों की भीड़ जुटती थी। भक्त बड़ी मात्रा में मंदिर में लगे दान पेटियों में नकद रकम दान किया करता था, जो पिछले कुछ दिनों से पूरी तरह से खाली पड़ा है। फिर भी मंदिर प्रशासन अपनी तरफ से दान की रकम से सैकड़ों लोगों के दो वक्त का भोजन तैयार करा रहा है। मंदिर की तरफ से भक्तों को घरों में रहकर पूजा-पाठ का निर्देश दिया गया है। वहीं, कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में दर्शन करने के लिए आने वाले भक्तों का दान पूरी तरह बंद हो गया है।
दक्षिण दिल्ली के सभी मंदिर हुए बंद
दक्षिण दिल्ली के गोविंदपुरी, कालकाजी, सरिता विहार, जसोला, कैलाश कॉलोनी, ईस्ट आफ कैलाश और ग्रेटर कैलाश के सभी मंदिरों को आम भक्तों के लिए बंद कर दिया गया है। इस दौरान मंदिरों में केवल सेवादारों को प्रवेश दिया जा रहा है। इन मंदिरों में दान में मिली रकम का इस्तेमाल लोगों के लिए खाना मुहैया कराने में किया जा रहा है।
यह धार्मिक स्थल हुए पूरी तरह खाली
दिल्ली के मशहूर धार्मिक स्थलों में अक्षरधाम मंदिर, बिरला मंदिर, छतरपुर मंदिर, बहाई टेंपल, लोटस टेंपल, इस्कॉन टेंपल और हनुमान मंदिर प्रमुख हैं। इन्हें लॉकडाउन के चलते भक्तों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
रोजाना एक लाख लोगों का पेट भर रहा गुरुद्वारा बंगला साहिब
लॉकडाउन के दौरान कोई भूखा न रह जाय, इस मुहिम में दिल्ली के गुरुद्वारे सबसे अहम किरदार अदा कर रहे हैं। अकेले बंगला साहिब गुरुद्वारे में रोजाना एक लाख लोगों को लंगर कराया जा रहा है। गुरुद्वारे की रसोइया में चपाती, पूरी, आलू की सब्जी, कढ़ी और चावल बनता है। पैकेटों में भरकर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचा दिया जाता है। सुबह शाम दोनों पहर यह सिलसिला जारी है।
दिल्ली करनाल रोड पर स्थित सबसे पुराना गुरुद्वारा नानक प्याऊ में खाने के लगभग तीस हजार पैकेट रोज तैयार होते हैं। जिसे रोहिणी, मॉडल टाउन और अलीपुर एसडीएम और कई स्थानीय विधायकों के माध्यम से लोगों में बंटवा दिया जाता है। गुरुद्वारे के अध्यक्ष हरिंदर पाल सिंह ने बताया कि आसपास के रैन बसेरों, बस्तियों और फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को खाने के पैकेट बांटे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के चलते गुरुद्वारे के अंदर लोगों की आवाजाही कम हो गई है। गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाशोत्सव पर जो भी यहां मत्था टेकने पहुंच रहे हैं, उनको प्रसाद वितरित किया जा रहा है। गुरुद्वारा शीशगंज, गुरुद्वारा रकाबगंज और दूसरे गुरुद्वारे भी दोनों पहर लोगों का पेट भरने की कोशिश कर रहे हैं।