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अमर उजाला विशेष: 2022 से इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों की फीस सरकार करेगी निर्धारित

Thu, 06 Jan 2022 05:27 PM IST
पूजा त्रिपाठी सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 06 Jan 2022 05:27 PM IST
सार

तकनीकी संस्थानों की फीस ग्रामीण, शहरी, मेट्रो सिटी वर्ग में निर्धारित होएगी। फीस स्लैब  शिक्षकों को मिलने वाला वेतन, इंफास्ट्रक्चर, सीट कितनी भरी, कोर्स समेत अन्य सुविधाओं के आधार पर तय होगा।

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Government will decide engineering and management colleges fees from 2022
फाइल फोटो

विस्तार

इंजीनियरिंग, आर्किटेचर, मैनेजमेंट और फार्मेसी कॉलेज अब मनमाने तरीके से फीस नहीं ले सकेंगे। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति के तहत शैक्षणिक सत्र 2022-23 से देश के सभी तकनीकी संस्थानों की फीस निर्धारित करने जा रही है। फीस का ढांचा (स्ट्रक्चर)  निर्धारित करने के लिए गठित पूर्व जस्टिस श्रीकृष्णन कमेटी ने दिसंबर में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। अब इस कमेटी की सिफारिशों को रिव्यू करने के लिए सरकार ने रिपोर्ट दूसरी विशेषज्ञ कमेटी के पास भेजी है।

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तकनीकी संस्थानों की फीस ग्रामीण, शहरी, मेट्रो सिटी वर्ग में निर्धारित होएगी। फीस स्लैब  शिक्षकों को मिलने वाला वेतन, इंफास्ट्रक्चर, सीट कितनी भरी, कोर्स समेत अन्य सुविधाओं के आधार पर तय होगा। इससे कैपिटेशन फीस पर भी रोक लगेगी। अधिकारिक सूत्रों का मानना है कि मार्च में इसका विस्तृत ब्यौरा नोटिफिकेशन के साथ लागू हो जाएगा। क्योंकि उसी समय तकनीकी कॉलेजों को कोर्स, पाठ्यक्रम, सीट आदि के आधार पर अगले सत्र के लिए मंजूरी मिलने की प्रक्रिया शुरू होती है।
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अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) देशभर के तकनीकी कॉलेजों की फीस का ढांचा तय कर रही है। इसमें इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट  समेत अन्य कॉलेज विभिन्न मानकों के आधार पर फीस तय कर सकेंगेे। इसमें अलग-अलग वर्ग बनाकर न्यूनतम और अधिकतम फीस निर्धारित होगी।
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सरकार चाहती है कि फीस निर्धारित ढांचे से कॉलेज, छात्र, शिक्षक किसी को भी नुकसान नहीं होना चाहिए। कॉलेज हर दो साल बाद फीस में तय मानकों के तहत बढ़ोतरी कर सकेंगे। रिपोर्ट में पहले वर्ष से लेकर अंतिम वर्ष तक फीस का ढांचा एक रखने की भी बात कही गई है। फिलहाल फीस का ढांचा हर राज्य में अलग-अलग है। निजी और सरकारी ही नहीं, केंद्र और राज्य सरकारों के अधीन आने वाले संस्थानों की फीस में एकरूपता नहीं है।

अभी तक नहीं है कोई एकरूपता: 
दरअसल तकनीकी कॉलेजों की फीस को लेकर अभी तक कोई तय नियम नहीं हैं। इसीलिए इंजीनियरिंग कॉलेज सालाना डेढ़ लाख से लेकर दस लाख रुपये रुपये तक फीस लेते हैं। इससे छात्रों और अभिभावकों को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है।

हर कॉलेज की निगरानी होगी:
 तकनीकी कॉलेजों की फीस की नियमित निगरानी भी होगी। यदि कोई कॉलेज तय स्लैब के नियमों का उल्लंघन करते हैं तो फिर उन पर कार्रवाई होगी। समय-समय पर कॉलेजों के शिक्षकों को दिये जाने वाले वेतन की भी जांच होगी,उसमें सेलरी स्लिप शामिल रहेगी।  इसमें यह परखा जाएगा कि कहीं संस्थान ने फीस बढ़ाने के चलते शिक्षकों की वेतन की गलत जानकारी तो नहीं दी थी। इसके अलावा ऑडिट का भी प्रावधान रहेगा।


कुछ कॉलेजों की फीस में बढ़ोतरी:
अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि दक्षिण समेत मध्य भारत में कई बड़े तकनीकी कॉलेज हैं।उनकी फीस अधिक नहीं है। हालांकि सुविधाओं के आधार पर इन कॉलेजों की फीस में दस से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी होने तो कई कॉलेजों की फीस कम होगी।

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