दिल्ली सरकार की कड़ी कार्रवाई, 5 प्रिंसिपलों की जाएगी नौकरी
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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को स्कूल फंड, स्टूडेंट वेलफेयर फंड, छात्रवृत्ति फंड, वेतन व दाखिले में हेराफेरी के सबूत सामने आने पर पांच सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल को नौकरी से हटाने का निर्देश विभाग को जारी किया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार व गैरजिम्मेदारी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस बताया है।
दिल्ली सरकार की तरफ से जारी विज्ञप्ति के अनुसार पहला मामला निठारी स्थित गवर्नमेंट ब्वॉयज सीनियर सेंकेडरी स्कूल का है। यहां के प्रिंसिपल अशोक कुमार सिंह ने एससी-एसटी, ओबीसी, माइनॉरिटी, मेरिट स्कॉलरशिप और लाल बहादुर शास्त्री योजना में छात्रवृत्ति की राशि में करीब 30 लाख रुपये की हेराफेरी की।
सिंह छात्रों के लिए आए रुपये निकालकर अपने पास रखते गए। मनीष सिसोदिया ने 2008 से 2013 तक की गई इन धांधली पर 49 दिन की सरकार में अशोक कुमार सिंह को निलंबित भी किया था।
पेनाल्टी की कार्रवाई में नौकरी से निकालने की प्रक्रिया शुरू
मामले की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जनवरी 2016 में सीवीसी से भी राय ली गई। सीवीसी की राय को देखते हुए अशोक कुमार सिंह के ऊपर मेजर पेनाल्टी की कार्रवाई में नौकरी से निकालने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
दूसरा मामला रेलवे कॉलोनी तुगलकाबाद के स्कूल का है। यहां प्रिंसिपल रहते अशोक कुमार ने 10वीं फेल छात्र को 11वीं में जानबूझकर दाखिला दिया। अशोक कुमार को भी नौकरी से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
तीसरा मामला लाजपत नगर स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय के प्रिंसिपल रहते हुए मुकेश चंद का है। इन्होंने 11वीं की विज्ञान और कॉमर्स की क्लास में 12 छात्रों को फर्जी मार्कशीट पर एडमिशन दिया। जांच में पाया गया कि मुकेश चंद ने जानबूझकर ये गड़बड़ी की थी। शिक्षा मंत्री ने मुकेश कुमार को नौकरी से हटाने का निर्णय लिया है।
चौथा मामला हिरनकूदना स्थित को-एड स्कूल का है
चौथा मामला हिरनकूदना स्थित को-एड स्कूल का है। यहां प्रिंसिपल रहते हरिप्रसाद मीणा ने छात्र कल्याण फंड का पैसा निकालकर एक आईटी असिस्टेंट की जून महीने के वेतन में दिखा दिया, जबकि आईटी असिस्टेंट ने जुलाई में नौकरी ज्वॉइन की थी। हरिप्रसाद मीणा पर मिड-डे मील बांटने वाली एजेंसी के साथ मिलकर एक फर्जी कर्मचारी दिखाकर पैसा गबन के आरोपों के चलते उन्हें भी नौकरी से हटाने का निर्णय लिया गया है।
पांचवा मामला जंगपुरा के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल रहते ओमप्रकाश पर स्कूल मैगजीन छपवाने में धांधली करने का है। यहां मैगजीन सप्लाई करने के पहले प्रिंटर को पैसा जारी कर दिया गया। पुरानी मैगजीन के पन्नों को ही रि-प्रिंट दिखाकर मैगजीन बनाने की औपचारिकता पूरी कर ली। शिक्षा मंत्री ने ओम प्रकाश को भी नौकरी से हटाने का निर्णय लिया है।
उपमुख्यमंत्री ने अवकाश प्राप्त एडहॉक दानिक्स अधिकारी सूरजभान की पेंशन रोकने की सिफारिश राष्ट्रपति से करने का निर्णय लिया है। आरोप है कि सूरजभान ने पटेल नगर में एसडीएम रहते हुए प्रॉपर्टी विवाद में दोनों पक्षों को सुने बिना ही एक पक्ष को अवैध लाभ पहुंचाने के लिए फैसला किया था। विजलेंस डिपार्टमेंट ने इस मामले में उपमुख्यमंत्री से दिशा-निर्देश मांगे थे, जिस पर उपमुख्यमंत्री ने उनकी पेंशन रोके जाने की सिफारिश राष्ट्रपति से किए जाने का निर्णय लिया है।