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सर गंगाराम अस्पताल में फिर से होगी कोरोना जांच, दिल्ली सरकार ने दी अनुमति

Sat, 13 Jun 2020 06:37 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 13 Jun 2020 06:37 PM IST
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Government of Delhi allows Sir Ganga Ram Hospital to restore the facility of Covid 19 tests
गंगाराम अस्पताल - फोटो : सोशल मीडिया

दिल्ली सरकार ने सर गंगाराम अस्पताल को फिर से कोरोना जांच करने की अनुमति दे दी है। सर गंगाराम अस्पताल के प्रबंधन बोर्ड के चेयरमैन डॉ. डीएस राणा ने शनिवार शाम इसकी जानकारी दी। 

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मालूम हो कि दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों की गिनती में शामिल सर गंगा राम अस्पताल के खिलाफ पिछले दिनों दिल्ली सरकार ने कोविड-19 रेगुलेशन का उल्लंघन करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अस्पताल के खिलाफ महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।


इस दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली के कई अस्पतालों पर विपक्षी दलों के साथ मिलकर बदमाशी करने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद दिल्ली सरकार ने सर गंगाराम अस्पताल पर एफआईआर दर्ज करा दी थी। 

आईपीसी की धारा 154 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया गया था कि अस्पताल अपनी क्षमता के मुताबिक लोगों को सुविधाएं नहीं दे रहा है। उसपर भर्ती न करने और बेडों की कालाबाजारी का आरोप लगाया गया था।

आरटी-पीसीआर एप का इस्तेमाल नहीं करने के कारण कोरोना टेस्ट पर लगाई गई थी रोक
एफआईआर में कहा गया था कि अस्पताल कोरोना संदिग्धों की जांच में आरटी-पीसीआर एप का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। जो साफ तौर पर महामारी अधिनियम का उल्लंघन है। तीन जून को दिल्ली सरकार ने सर गंगा राम अस्पताल प्रशासन को एक पत्र भेजा था, जिसमें कहा गया था कि अस्पताल कोरोना संदिग्धों की जांच के लिए आरटी-पीसीआर एप का इस्तेमाल नहीं कर रहा है, जो महामारी अधिनियम का उल्लंघन है। इसलिए अब अस्पताल में कोरोना जांच नहीं की जाएगी। 
 


केजरीवाल सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश में अस्पताल प्रशासन को तत्काल प्रभाव से कोरोना टेस्ट पर रोक लगाने को निर्देश दिए गए थे। उसी दिन सरकार ने यह घोषणा भी की थी कि 675 बेड वाले इस अस्पताल में अब 80 फीसदी बेड कोरोना वायरस के मरीजों के लिए आरक्षित होने चाहिए। 

इस आदेश के बाद डॉक्टरों ने सोशल मीडिया पर इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि एक तरफ सरकार ने कोरोना टेस्ट के लिए मना कर दिया है और दूसरी ओर कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिए कहा गया है। 

इसके बाद आज ही अस्पताल प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अस्पताल ने अपने ऊपर की गई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई के लिए अदालत ने 15 जून की तारीख निर्धारित की है।

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