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संजय नगर में सरकारी मकान की छत गिरी, कर्मचारी दबा
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Fri, 25 Jul 2014 01:28 AM IST
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संजय नगर एफ-ब्लाक में बंद पड़े जर्जर सरकारी मकान की छत बृहस्पतिवार को भरभरा कर गिर गई। हादसे में पड़ोस में रहने वाला सरकारी कर्मचारी मलबे में दब गया।
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लोगों की मदद से उसे मलबे से निकालकर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुरी तरह कुचल जाने से डॉक्टरों ने उसका एक पैर टखने के पास से काट दिया है।
संजय नगर एफ-ब्लाक में 103 छोटे मकानों की सरकारी कालोनी है। पीडब्ल्यूडी के बनाए हुए इन मकानों को सरकारी विभागों में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को आवंटित किया गया है।
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मकान संख्या एफ-70 निवासी विंधेश्वर चोपाल कलक्ट्रेट में तैनात है। बृहस्पतिवार की सुबह उन्होंने खाली पड़े मकान एफ-68 की छत पर गेहूं सुखाए हुए थे। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे वह गेहूं उठाकर वापस ला रहे थे।
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जर्जर हो चुकी एफ-69 की छत पर जैसे ही वह पहुंचे, छत भरभराकर गिर गई और विंधेश्वर चोपाल मलबे में दब गए। आवाज सुनकर परिजन और पड़ोसी मौके पर पहुंचे और विंधेश्वर को मलबे से निकाला। गंभीर रूप से घायल विंधेश्वर को राजनगर के शिवम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
विंधेश्वर के बेटे शशिकांत ने बताया कि पैर की नसें बुरी तरह कुचल जाने की वजह से डॉक्टरों को एक पैर का पंजा काटना पड़ा। विंधेश्वर के परिजनों और पड़ोसियों में जबरदस्त आक्रोश है।
कालोनी के लोगों का कहना है कि जर्जर हो चुके मकानों की मरम्मत के लिए कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन सुनवाई नहीं होती।
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पीडब्ल्यूडी पर है मरम्मत की जिम्मेदारी
संजय नगर के ये 103 मकान पीडब्ल्यूडी ने बनाए थे। कर्मचारियों को इनका आवंटन डीएम करते हैं। इसकी एवज में कर्मचारियों को एचआरए नहीं दिया जाता। मकानों की मेंटीनेंस की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की होती है, लेकिन करीब एक दशक से इन मकानों की मरम्मत नहीं हुई है।