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गोरखालैंड आंदोलन के जनक सुभाष घीसिंग का निधन

Fri, 30 Jan 2015 01:08 AM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
एजेंसी/नई दिल्ली Updated Fri, 30 Jan 2015 01:08 AM IST
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Gorkhaland movement father Subhash Ghising died.

अलग गोरखा राज्य का आंदोलन छेड़ने वाले गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के संस्थापक सुभाष घीसिंग का बृहस्पतिवार को दिल्ली में निधन हो गया। घीसिंग 78 वर्ष के थे। वह लिवर की बीमारी से पीड़ित थे और उनका नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में इलाज चल रहा था।

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अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक उन्हें पांच दिल पहले भर्ती कराया गया था। वह लिवर सिरोसिस और कैंसर से पीड़ित थे। बृहस्पतिवार को सुबह साढ़े दस बजे गोरखा नेता ने आखिरी सांस ली। घीसिंग ने 1980 में गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट की स्थापना की थी।
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वह पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे। दार्जिलिंग में रहने वाले गोरखाओं के लिए अलग राज्य की मांग के समर्थन में उन्होंने लंबा आंदोलन छेड़ा था। जीएनएलएफ के आंदोलन की वजह से 1986 और 1988 में भारी हिंसा हुई।
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इसके बाद केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार से लंबी वार्ताओं का दौर चला। आखिर में 1988 में समझौते के तहत अर्द्ध स्वायत्त संस्था दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल की स्थापना की गई। इसका चुनाव जीतने के बाद घीसिंग इसके पहले अध्यक्ष बने।


घीसिंग का जन्म दार्जिलिंग के मंजू टी एस्टेट में 22 जून 1936 को हुआ था। वह 1954 में भारतीय सेना के गोरखा राइफल्स में शामिल हुए। लेकिन 1960 में उन्होंने सेना की नौकरी छोड़ दी। गोरखाओं के अधिकारों की लड़ाई तेज करने के लिए उन्होंने 1968 में नीलो झांडा नाम का संगठन शुरू किया।

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