दिल्ली जू: चौकसी बढ़ी, लगेंगी शीशे की दीवारें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चिड़ियाघर मंगलवार जैसे हादसों से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी में जुटा था, लेकिन इस बीच हादसा हो गया। चिड़ियाघर में खतरनाक जानवरों के बाड़ों में शीशे की दीवार लगाने की योजना पर काम चल रहा है।
अभी तक यह व्यवस्था सिर्फ कुछ पक्षियों के बाड़े में ही उपलब्ध है। अब इसे शेर व बाघ जैसे खतरनाक जानवरों के बाड़ों में लगाने जाने की योजना पर काम शुरू हो गया था।
प्रयोग के तौर पर चिड़ियाघर के सफेद बाघ व बंगाल टाइगर के बाड़े नंबर 10 में इस पर काम भी शुरू हो गया है। इसमें सफल प्रयोग के बाद इसे चीता, बाघ और शेर के बाड़ों में भी लगाने की योजना है।
चिड़ियाघर में कुल 6 सफेद बाघ और बाघिन
चिड़ियाघर के प्रवक्ता रियाज खान ने बताया कि शीशे लगाने का मकसद यही है कि कोई व्यक्ति अंदर कुछ फेंक न सके। चूंकि शीशा पारदर्शी होता है, इसलिए जानवरों को देखने में भी दिक्कत नहीं होगी।
इस पर हल्के-फुल्के पत्थर से टूटने की संभावना न के बराबर होगी। अगर यह किसी वजह से टूटा भी तो किसी के लिए नुकसानदायक नहीं होगा। क्योंकि यह ग्लास जब भी टूटता है तो वह अलग नहीं होता सिर्फ चिटक जाता है।
दिल्ली चिड़ियाघर में कुल छह सफेद बाघ और बाघिन हैं। इसमें चार बाघिन और दो बाघ हैं। इसे अलग-अलग बाड़ों में रखा गया है। बाड़ा नंबर 8 में जहां हादसा हुआ वहां एक बाघ विजय और दो बाघिन रानी और कल्पना रहती है। बाड़ा नंबर 10 में एक बाघ विक्की और दो बाघिन पटटू और मदार रहती है।