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Ghaziabad News: नामांतरण नहीं किया तो दंपती ने किया हंगामा, ओएसडी ने तत्काल कराया समाधान
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गाजियाबाद। जीडीए में संपत्ति का नामांतरण कराना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बिना चढ़ावा चढ़ाए यहां काम नहीं हो रहे हैं। अपने मकान का नामांतरण कराने के लिए दो माह से जीडीए में बाबुओं और अधिकारियों के चक्कर लगाकर थक चुके एक दंपती ने बुधवार को प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर हंगामा किया। शोर-शराबा सुनकर कर्मचारी और अधिकारी इकट्ठा हो गए। मामला ओएसडी गुंजा सिंह के पास पहुंचा तो उन्होंने प्रक्रिया पूरी कराकर नामांतरण पत्र दंपती को दिलाया। इसके बाद मामला शांत हुआ।
वैशाली निवासी रामा प्रसाद सिंह के मुताबिक वैशाली आवासीय योजना में उनकी पत्नी चंद्रवती के नाम एक ईडब्ल्यूएस है। कैंसर से पीड़ित पत्नी का इलाज कराने के लिए उन्हें रुपयों की जरूरत है। इसके लिए वह अपने इस फ्लैट पर ऋण लेना चाहते हैं। जीडीए के रिकॉर्ड में उनके नाम पर फ्लैट नहीं हैं और वह उसका नामांतरण कराना चाहते हैं। फ्लैट का नामांतरण कराने के लिए उन्होंने दो माह पूर्व ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन किया था। आरोप है कि दो माह से जीडीए के बाबू और अधिकारी उन्हें चक्कर कटवा रहे थे, लेकिन नामांतरण नहीं कर रहे। बुधवार को वह नामांतरण की जानकारी लेने जीडीए कार्यालय पहुंचे तो लिपिक ने उन्हें फिर से टरकाने का प्रयास किया। एक से दूसरे कार्यालय में भेजा गया। इससे परेशान होकर उन्होंने जीडीए कार्यालय परिसर में विरोध शुरू कर दिया। उनका शोर-शराबा सुनकर अन्य फरियाद, कर्मचारी और अधिकारी इकट्ठा हो गए। हंगामा बढ़ा तो यह प्रकरण जीडीए ओएसडी गुंजा सिंह के पास पहुंचा। उन्होंने नामांतरण विभाग के संबंधित लिपिक को बुलाकर डांट लगाई और तत्काल आनलाइन नामांतरण का पत्र दिलवाया। इसके बाद मामला शांत हुआ और पति-पत्नी प्रमाण पत्र लेकर लौट गए।
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वैशाली निवासी रामा प्रसाद सिंह के मुताबिक वैशाली आवासीय योजना में उनकी पत्नी चंद्रवती के नाम एक ईडब्ल्यूएस है। कैंसर से पीड़ित पत्नी का इलाज कराने के लिए उन्हें रुपयों की जरूरत है। इसके लिए वह अपने इस फ्लैट पर ऋण लेना चाहते हैं। जीडीए के रिकॉर्ड में उनके नाम पर फ्लैट नहीं हैं और वह उसका नामांतरण कराना चाहते हैं। फ्लैट का नामांतरण कराने के लिए उन्होंने दो माह पूर्व ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन किया था। आरोप है कि दो माह से जीडीए के बाबू और अधिकारी उन्हें चक्कर कटवा रहे थे, लेकिन नामांतरण नहीं कर रहे। बुधवार को वह नामांतरण की जानकारी लेने जीडीए कार्यालय पहुंचे तो लिपिक ने उन्हें फिर से टरकाने का प्रयास किया। एक से दूसरे कार्यालय में भेजा गया। इससे परेशान होकर उन्होंने जीडीए कार्यालय परिसर में विरोध शुरू कर दिया। उनका शोर-शराबा सुनकर अन्य फरियाद, कर्मचारी और अधिकारी इकट्ठा हो गए। हंगामा बढ़ा तो यह प्रकरण जीडीए ओएसडी गुंजा सिंह के पास पहुंचा। उन्होंने नामांतरण विभाग के संबंधित लिपिक को बुलाकर डांट लगाई और तत्काल आनलाइन नामांतरण का पत्र दिलवाया। इसके बाद मामला शांत हुआ और पति-पत्नी प्रमाण पत्र लेकर लौट गए।
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