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Ghaziabad News: व्यास ने भीष्म स्तुति का किया वर्णन, राजा परीक्षित की कथा सुनाई

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 10:42 PM IST
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Vyasa praised Bhishma and narrated the story of King Parikshit.
गंगानगरी में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते व्यास। संवाद
ब्रजघाट। गंगानगरी में स्थित श्रीकृष्णा आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के दूसरे दिन शुक्रवार को व्यास स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने भीष्म स्तुति का वर्णन किया। इसके साथ ही कलियुग के आगमन, राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा का श्रवण भक्तों को कराया। व्यास ने संस्कृत श्लोकों के साथ भगवान श्रीकृष्ण, गुरु परम्परा और व्यास का वंदन किया।
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शुकदेव के आगमन के उपरांत “कुर्वा स्तुति“ के माध्यम से सृष्टि के कर्ता श्री हरि की महिमा बखान किया। वहीं, व्यास ने भीष्म पितामह द्वारा रचित भीष्म स्तुति का पाठ भी कराया। शर-शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह ने मृत्यु के समय भगवान श्रीकृष्ण के जिस महा स्वरूप का दर्शन किया था, भक्तों ने उसका सजीव वर्ण सुना। जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। शुकदेव के आगमन की कथा सुनाते हुए व्यास ने कलियुग के आगमन, राजा परीक्षित के जीवन से जुडे़ प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कलियुग ने राजा से केवल तीन स्थानों में निवास करने की आज्ञा मांगी। जिनमें से एक वस्तु स्वर्ण भी शामिल था।
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स्वर्ण मुकुट धारण करते ही राजा भी कलियुग के प्रभाव में आ गए। जंगल में शिकार के दौरान उन्होंने श्रृंगी ऋषि के गले में मृत सांप डाल दिया। ऋषि ने उन्हें सात दिन के अंदर तक्षक सर्प के डसने से मृत्यु होने का श्राप दिया। श्राप से मृत्यु को निकट जानकर राजा गंगा तट पर निर्जल व्रत करते हुए बैठ गए। तभी 16 वर्ष के बालयोगी शुकदेव का आगमन हुआ। उनसे राजा परीक्षित ने जीवन-मरण के रहस्य और मोक्ष का मार्ग पूछा।
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कथा व्यास ने बताया कि शुकदेव के आगमन से ही भागवत कथा का वास्तविक प्रारंभ होता है। उन्होंने ही सात दिन में राजा को भागवत कथा का रसपान कराया था। इस कथा के प्रभाव से जीव सभी कष्टों से मुक्त होकर बैकुंठ को प्राप्त करता है। इस दौरान किशन गोपाल, कमलेश अग्रवाल, गोपाल प्रसाद, भगवती अग्रवाल, श्याम सुंदर, राधा अग्रवाल, प्रभुदयाल, रमेश चंद्र, सुषमा गर्ग, ललित, ज्योति, रूचि, सीमा आदि मौजूद रहे।
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