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Ghaziabad News: बंदू-बूंद पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण, पानी की टंकियां बनी शोपीस

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2026 12:34 AM IST
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Villagers yearn for every drop of water, water tanks become showpieces
मोदीनगर। जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों की लागत से बनी पानी की टंकिंयां ग्रामीणों के लिए शोपसी बन गई है। टंकिंयों का अधूरा निर्माण और अधूरी पाइपलाइन व अन्य तकनीकी खामियों के कारण ये टंकियां चालू नहीं हो पाई हैं। इससे ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। इससे ग्रामीण साधारण हैंडपंप से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। निर्माणाधीन पानी की टंकियों पर कार्य ठप होने से सामान खराब हो रहे हैं।
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भोजपुर के गांव चुड़ियाला में लगभग तीन वर्ष पूर्व पानी की टंकी का निर्माण कार्य शुरू हुआ। टंकी निर्माण लगभग डेढ़ वर्ष में पूरा हो जाना था, जो आज भी अधर में है। लगभग पचास प्रतिशत ग्रामीणों के यहां पानी का कनेक्शन हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार कार्यदायी संस्था काफी समय पूर्व पानी की टंकी का निर्माण बीच में ही छोड़कर भाग गई।
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अधूरी निर्माणाधीन टंकी के चारों तरह शटरिंग लगी है जो गल गई है। इससे वहां कभी भी हादसा होने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा परिसर में बड़े बड़े झाड़ झंकाड़ उग गए है। इससे जानवरों के अलावा अपराधिक वारदात होने का डर सताता है।
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ग्राम प्रधानपति अमित प्रधान बैंसला ने बताया कि गांव की आबादी पांच हजार से अधिक है। टंकी शुरू नहीं होने के कारण ग्रामीण दूषित पानी पीने के लिए मजबूर है। कई बार जल निगम के अधिशासी अभियंता समेत उच्चाधिकारियों से निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की गई मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
इसके अलावा भोजपुर के गांव भटजन पलौता में भी पानी की टंकी का यही हाल है। यहां पेयजल व्यवस्था दम तोड़ रही है। गांव में पानी की टंकी तिरछी बना दी गई है। ग्रामीण बुद्धप्रकाश, रामपाल, अख्तर और संतराम ने बताया कि गांव की आबादी लगभग तीन हजार से ज्यादा है। पानी की टंकी चालू नहीं होने के कारण ग्रामीण पानी का तरस रहे है। यहां भी ग्रामीण साधारण हैंडपंप का प्रदूषित पानी पीने के लिए मजबूर है। दोनों गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के कारण लोगों बीमारियों से ग्रस्त हो रहें है। परियोजना अधर में होने से ग्रामीणों में आक्रोश और मायूसी है।

वहीं जल निगम के अधिशासी अधिकारी बृजभूषण सिंह का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत जो कार्य 90 प्रतिशत हो गया है उसके लिए बजट स्वीकृत हुआ है। लक्ष्य है कि अन्य स्थानों के शेष कार्य के लिए भी चार से छह माह में 90 प्रतिशत काम कराकर बजट स्वीकृत कराया जाए।
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