फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   UP three decades ago in bulandshahr dhanora enmity started in 31 years both sides 12 died

यूपी : तीन दशक पहले धनौरा में हुई थी खून की होली, तब शुरू हुई रंजिश, 31 सालों में 12 हत्याएं

Mon, 22 Mar 2021 12:31 PM IST
पूजा त्रिपाठी आबाद नकवी, अमर उजाला नेटवर्क, ककोड़/ बुलंदशहर
आबाद नकवी, अमर उजाला नेटवर्क, ककोड़/ बुलंदशहर Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 22 Mar 2021 12:31 PM IST
सार

- 31 वर्षों में अब तक दोनों पक्षों के 12 लोगों की हो चुकी हैं हत्याएं
- वर्ष 1990 में होली के दिन धनौरा में दोनों पक्षों में हुई थी फायरिंग
- जेल जाने पर बदल जाती थी लीडरशिप

विज्ञापन
UP three decades ago in bulandshahr dhanora enmity started in 31 years both sides 12 died
धनौरा में बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

31 साल पहले वर्ष 1990 में गांव धनौरा की होली का रंग खून के रंग से फीका पड़ गया था। होली का वह त्योहार गांव में अशांति बनकर आया था। गांव निवासी कालीचरण पक्ष और इंद्र सिंह पक्ष के बीच जमकर फायरिंग हुई थी। जिसमें कालीचरण पक्ष के तीन और इंद्र सिंह पक्ष के एक व्यक्ति की मौत हुई थी। उस होली से शुरू हुआ रंजिश का यह सिलसिला अब तक जारी है। इन 31 वर्षों में दोनों पक्षों के 12 लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं।

विज्ञापन


ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1990 में गांव निवासी कालीचरण और दूसरे पक्ष के इंद्र सिंह पक्ष के लोगों में होली के पर्व पर मूंछों की लड़ाई को लेकर विवाद हो गया था। दोनों पक्षों के लोगों ने एक दूसरे पर फायरिंग कर दी थी। फायरिंग में गोली लगने के कारण कालीचरण पक्ष के तेजपाल प्रधान, वीरपाल और वेदपाल की मौत हो गई थी।
विज्ञापन


वहीं, इंद्र सिंह पक्ष के महेंद्र की गोली लगने के कारण मौत हो गई। मामले में दोनों पक्षों के लोग जेल गए थे। कुछ समय बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया। कुछ समय बाद इंद्र के भाई रामवीर फौजी की बुलंदशहर में हत्या कर दी थी, रामवीर ट्रक चालक था।
विज्ञापन
विज्ञापन


रामवीर की हत्या का बदला लेने के लिए कालीचरण के पुत्र जगवीर की पंजाब में हत्या कर दी गई,  वह ट्रक ड्राइवर था। आरोप है कि इसके बाद इंद्र सिंह ने गांव निवासी दो लोगों की गांव में ही बस से उतारकर हत्या कर दी थी।

बताया गया कि कुछ समय बाद गांव में एक शादी समारोह के दौरान कालीचरण पक्ष ने इंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इंद्र सिंह की हत्या के बाद इंद्र पक्ष की कमान राजेंद्र फौजी ने संभाल ली थी। राजेंद्र की पत्नी की उसके मायके जाड़ौल, खानपुर में हत्या कर दी गई। राजेंद्र पक्ष ने उस दौरान कालीचरण पक्ष पर संदेह जताया था। जिसके बाद वर्ष 2014 में राजेंद्र के भाई जयप्रकाश पर थाना ककोड़ के सामने गोलियां बरसाईं गई थीं।

रीढ़ की हड्डी में गोली लगने के कारण वह घायल हो गया था। आरोप है कि बदला लेने के लिए राजेंद्र पक्ष ने जगपाल पुत्र कालीचरण के गांव निवासी एक साथी के भाई नीरज की ककोड़ थाने के पास हत्या कर दी थी। उसी रोज आरोपियों ने घर में घुसकर जगपाल की मां सिंगारी की हत्या कर दी थी। दोनों की हत्या के मामले में रामपाल, किरनपाल, राजेंद्र, छत्तर, अमित जेल गए थे।

घटना के समय अमित के नाबालिग होने के कारण वह जमानत पर छूट गया था। वहीं रामपाल, किरनपाल, राजेंद्र, छत्तर उक्त मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। वर्ष 2019 में जगपाल की पलवल में हत्या कर दी गई।

जगपाल की हत्या के कुछ महीने बाद ही 2019 में उसके पिता कालीचरण की भी थाना ककोड़ के पास हत्या कर दी गई थी। अब संदीप की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं घायल धर्मपाल, सुरक्षाकर्मी पुष्पेंद्र, पवन का अस्पताल में उपचार चल रहा है। 

समय के साथ बदलती रही खूनी संघर्ष की लीडरशिप

सिकंदराबाद के धनौरा में दो पक्षों के बीच खूनी रंजिश का खेल शुरू होने के बाद से ही समय के साथ नेतृत्व भी बदलता रहा। नेतृत्वकर्ता के जेल जाने, गोली का शिकार होने के बाद किसी दूसरे व्यक्ति के द्वारा नेतृत्व की कमान संभाल ली जाती थी।

वर्ष 1990 में धनौरा में जब दो पक्षों में खूनी रंजिश का खेल शुरू हुआ तो एक पक्ष का नेतृत्व कालीचरण तो दूसरे पक्ष का नेतृत्व इंद्र कर रहा था। कालीचरण की बढ़ती उम्र के कारण उसके पक्ष का नेतृत्व बेटा जगपाल उर्फ बराती करने लगा।

वहीं, इंद्र की मौत के बाद नरेंद्र फौजी ने इंद्र पक्ष का नेतृत्व संभाला। नरेंद्र फौजी की मौत के बाद राजेंद्र ने इंद्र पक्ष का नेतृत्व संभाला, तो वहीं जगपाल की मौत के बाद कालीचरण पक्ष का नेतृत्व जगपाल के भाई धर्मपाल ने संभाल लिया।

राजेंद्र को आजीवन कारावास की सजा के चलते जिला कारागार में बंद होने के कारण अब उसके पक्ष का नेतृत्व उसका पुत्र अमित कर रहा है। एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने घटना को लेकर दिए गए बयान में अमित की भूमिका का उल्लेख किया है। फिलहाल अमित भी हत्या के एक मामले में जिला कारागार में बंद है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed