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Ghaziabad News: आगरा एनआरएचएम के टैक्सी घोटाले में दोषी को दो साल कारावास

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 30 Sep 2024 03:09 AM IST
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Two years imprisonment to the culprit in Agra NRHM taxi scam
आशुतोष यादव
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गाजियाबाद। आगरा स्वास्थ्य विभाग के एनआरएचएम में हुए टैक्सी घोटाले में विशेष सीबीआई कोर्ट ने वाहन उपलब्ध कराने वाले रामकुमार बंसल को दो साल कारावास की सजा सुनाई है। सरकारी बजट की क्षति करने पर अदालत के विशेष न्यायाधीश प्रमेंद्र कुमार ने दोषी पर 4.30 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष सीबीआई लोक अभियोजक के अनुसार एनआरएचएम योजना में शासन की गाइडलाइन के अनुसार सभी सीएमओ को टैक्सी और एंबुलेंस किराए पर लेने की अनुमति दी गई थी। विवेचना में पता चला कि तत्कालीन सीएमओ आगरा ने 2009 से 2012 के बीच मरीजों और डॉक्टरों के आने-जाने के लिए ब्लॉक स्तरीय पीएचसी और सीएचसी, स्वास्थ्य मेला में आवागमन, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, उप मुख्यचिकित्साधिकारी, महिला अस्पताल और पल्स पोलियाे अभियान के लिए टैक्सियां किराए पर ली गई थीं। वाहनों के रोजाना किराए के लिए 400 रुपये की दर तय हुई थी लेकिन, सरकारी धनराशि का दुरुपयोग करते हुए 750 रुपये, 800 रुपये और एक हजार रुपये रोजाना की दर से टैक्सी किराए पर ली गई। रामकुमार बंसल ट्रेवल प्वाइंट आगरा के संचालक रामकुमार बंसल ने 2011-12 में धोखाधड़ी से ठेका हासिल कर लिया था। उसने मैसर्स हरीश टूर एंड ट्रैवेल्स आगरा और मैसर्स जग्गी टूर एंड ट्रैवेल्स के नाम से फर्जी और जाली कुटेशन के आधार पर सीएमओ आगरा को किराए की टैक्सी आपूर्ति की थी। सीएमओ को झूठे बिल पेश करके एनआरएचएम फंड से 4.29 लाख रुपये लाभ लेकर सरकार को हानि पहुंचाई।
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हाईकोर्ट के आदेश पर हुई थी जांच
घोटाले की शिकायत होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 नवंबर 2011 को सीबीआई को जांच करने का आदेश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की थी। जांच पूरी करने के बाद सीबीआई को घोटाला मिला था। इसके बाद सीबीआई ने 22 जून 2015 को अदालत में आरोप पत्र पेश किया था। अदालत ने 14 अगस्त 2015 को आरोप पत्र पर संज्ञान लेकर लिया था। केस की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने 14 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए थे। वहीं, बचाव पक्ष की तरफ से एक गवाह पेश किया गया था। अदालत से मिली जानकारी के अनुसार रामकुमार पहले मुकदमे के विचारण के दौरान 4.29 लाख रुपये जमा कर चुका था। अदालत ने आदेश दिया था कि रामकुमार द्वारा इस केस में पहले जमा की गई धनराशि को अर्थदंड में समायोजित कर दी जाए।
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