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Ghaziabad News: दो लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 12.51 लाख रुपये

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 23 Nov 2024 03:07 AM IST
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Two people were digitally arrested and defrauded of Rs 12.51 lakh
गाजियाबाद। साइबर ठगों ने साहिबाबाद निवासी हिमांशु और विजयनगर निवासी शिल्पी मित्तल को डिजिटल अरेस्ट कर 12.51 लाख रुपये ठग लिए। ठगी का अहसास होने पर दोनों पीड़ित 15 से 20 मिनट के अंदर साइबर अपराध थाने पहुंचे और मामले की जानकारी दी। पुलिस ने भी सक्रियता दिखाते हुए ठगों के खातों को फ्रीज करा दिया जिसमे राशि ट्रांसफर की गई थी। हालांकि, शिल्पी मित्तल ने जिस खाते में राशि भेजी थी, उसमें से ठगों ने 63 हजार रुपये निकाले लिए थे।
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एडीसीपी अपराध सच्चिदानंद ने बताया कि आठ नवंबर को हिमांशु कुमार को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट किया था। ठगों ने उन्हें उनके नाम से कुरियर बुक होने व उसमें ड्रग्स होने की बाम कही। इसके बाद नारकोटिक्स विभाग का जांच अधिकारी बनकर बात की। मामले से उनका नाम निकालने के एवज में पहले तीन लाख रुपये लिए। इसके बाद कुरियर के पैकेट को हटाने की बात के नाम पर दूसरी बार में 3.38 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराए। बिहार के अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांजेक्शन होने पर हिमांशु को शक हुआ। उसके बाद वह तुरंत साइबर थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। इस पर साइबर टीम ने खातों में ट्रांसफर किए गए 6.38 लाख रुपये फ्रीज करा दिए।
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वहीं, शिल्पी मित्तल ने बताया कि 14 नवंबर को वीडियो कॉल पर पुलिस जैसी वर्दी और कैप लगाए बैठे व्यक्ति ने उनके खाते से मनी लाॅन्डि्रंग होने की बात कही। वीडियो काल पर कॉलर का चेहरा स्पष्ट नहीं था जबकि बैकग्राउंड से पुलिस थाना जैसा था। जेल भेजने की धमकी देकर उनके द्वारा बताए गए बैंक खाते में एक लाख रुपये मोबाइल से और 5.13 लाख रुपये का चेक बैंक में जमा किया। शिल्पी को शक हुआ तो वह साइबर थाने पहुंची। जहां टीम ने उन्हें साइबर ठगी होने की बात बताई। जिसके बाद बैंक से चेक रद्द कराया गया। जबकि पेटीएम से जमा एक लाख रुपये में से 63 हजार रुपये ठगों ने निकाल लिए। एडीसीपी अपराध ने बताया कि शिल्पी के 6.13 में से 5.50 लाख रुपये वापस कराए गए।
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नया नया तरीका अपना रहे साइबर ठग

साइबर ठग वीडियो कॉल कर लोगों को सीबीआई अधिकारी, क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर अथवा नारकोटिक्स का अधिकारी बताकर किसी मामले में फंसने का डर दिखाते हैं। वीडियो कॉल के दौरान बैंक ग्राउंड में थाने का सेटअप दिखाकर साइबर अपराधी लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इसके बाद बताते हैं कि उन्होंने एक कुरियर बुक किया था, जिसमें ड्रग्स मिली है और नारकोटिक्स की टीम जांच कर रही है। जेल भेजने की धमकी देकर या बचाने के नाम पर बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर करा लेते हैं। यदि कोई कुरियर की बात से इन्कार करता है तो ऐसे में साइबर ठग मनी लाॅन्डि्रंग का डर की बात कहते हैं। ठग पीड़ित को इतना भयभीत कर देते हैं कि वह घंटों बाद सदमे से बाहर आ पाता है।



4.53 करोड़ रुपये दो माह में ठगे

मनी लाॅन्डि्रंग, कुरियर में ड्रग्स, पॉर्न वेबसाइट पर सर्च, आतंकवादी गतिविधि और मुनाफे का लालच देकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। पिछले दो माह में 24 लोगों को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट 4.53 करोड़ रुपये ठग लिए हैं।


ऐसे करें बचाव

- यूपीआई से भुगतान करते समय अपना पिन साझा न करें।

- अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें और ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए सार्वजनिक वाई-फाई का प्रयोग न करें।

- डिजिटल धोखाधड़ी से बचने के लिए गेमिंग एप्स या अन्य सॉफ्टवेयर केवल आधिकारिक स्टोर्स से ही डाउनलोड करें।

- सोशल मीडिया पर अनजान से मित्रता न करें और मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें।

- साइबर दोस्त एप अथवा हेल्पलाइन नंबर 1930 को सूचना जरूर दें।
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