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Ghaziabad News: एमएमजी अस्पताल में टोकन व्यवस्था बंद, मरीज परेशान
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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में डिस्प्ले बोर्ड खराब होने से टोकन व्यवस्था बंद हो गई है, जबकि संयुक्त अस्पताल में बिना टोकन व्यवस्था के ही मरीजों को इलाज के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी एमएमजी अस्पताल में बच्चों की ओपीडी का है। परिजन बच्चों को गोद में लेकर घंटों लाइन में खड़े रहने लिए मजबूर हो रहे हैं। बच्चों की ओपीडी में कुर्सियों की भी व्यवस्था नहीं है।
एमएमजी अस्पताल, संयुक्त और महिला अस्पताल में लगभग पांच महीने पहले दिल्ली के अस्पतालों की तर्ज पर ओपीडी में टोकन व्यवस्था लागू की गई थी। इसका उद्देश्य था कि मरीजों को घंटों लाइन में खड़े होने से बचाना था। कई बार मरीज बेहोश होकर गिर पड़ते थे। टोकन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए तीनों अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों के बैठने के लिए कुर्सियों की भी व्यवस्था की गई है। संयुक्त और महिला अस्पताल में प्रबंधन मरीजों को ओपीडी की लाइन में खड़े होने की जगह अपनी बारी का इंतजार करने के लिए प्रेरित नहीं कर पा रहा है।
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि डिस्प्ले बोर्ड जल्द सही करा दिया जाएगा, इसके अलावा बाल चिकित्सा विभाग के बाहर तीमारदारों के लिए कुर्सी की व्यवस्था भी कराई जा रही है। वहीं संयुक्त और जिला महिला अस्पताल के सीएमएस का कहना है कि स्टाॅफ को निर्देश दिया गया है कि टोकन व्यवस्था से ही मरीजों को ओपीडी में इलाज के लिए भेजा जाए।
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एमएमजी अस्पताल, संयुक्त और महिला अस्पताल में लगभग पांच महीने पहले दिल्ली के अस्पतालों की तर्ज पर ओपीडी में टोकन व्यवस्था लागू की गई थी। इसका उद्देश्य था कि मरीजों को घंटों लाइन में खड़े होने से बचाना था। कई बार मरीज बेहोश होकर गिर पड़ते थे। टोकन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए तीनों अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों के बैठने के लिए कुर्सियों की भी व्यवस्था की गई है। संयुक्त और महिला अस्पताल में प्रबंधन मरीजों को ओपीडी की लाइन में खड़े होने की जगह अपनी बारी का इंतजार करने के लिए प्रेरित नहीं कर पा रहा है।
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एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि डिस्प्ले बोर्ड जल्द सही करा दिया जाएगा, इसके अलावा बाल चिकित्सा विभाग के बाहर तीमारदारों के लिए कुर्सी की व्यवस्था भी कराई जा रही है। वहीं संयुक्त और जिला महिला अस्पताल के सीएमएस का कहना है कि स्टाॅफ को निर्देश दिया गया है कि टोकन व्यवस्था से ही मरीजों को ओपीडी में इलाज के लिए भेजा जाए।
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