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Ghaziabad News: 35.37 करोड़ की स्क्रैप खरीद में 6.36 करोड़ की कर चोरी पकड़ी
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गाजियाबाद। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने डेटा विश्लेषण के आधार पर एल्युमिनियम और ब्रास स्क्रैप की खरीद करने वाली फर्म एमएस ऑटोमैट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की जांच की। फर्म ने दिल्ली की फर्मों से 35.37 करोड़ रुपये की स्क्रैप खरीद दिखाकर 6.36 करोड़ रुपये की बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल करने का मामला सामने आया है। विभाग के अनुसार फर्म एग्रीकल्चरल इक्विपमेंट, स्प्रिंकलर और उसके कंपोनेंट्स का निर्माण करती है। इन उत्पादों की घरेलू आपूर्ति के साथ अमेरिका और ब्रिटेन समेत अन्य देशों को निर्यात भी किया जाता है।
ई-वे बिल ने खोली गड़बड़ी की परत
जीएसटी की संयुक्त कमिश्नर सुजाता सिंह ने बताया कि डेटा विश्लेषण के दौरान फर्म के ई-वे बिलों में भी कई विसंगतियां मिलीं। वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक फर्म से जुड़े 204 ई-वे बिल, जिनका कुल मूल्य 11.31 करोड़ रुपये कैंसिल किए गए। वहीं, 1600 ई-वे बिल, जिनका मूल्य 14.20 करोड़ रुपये था, एक्सटेंड किए गए हैं। इन विसंगतियों के आधार पर विभाग ने फर्म की जांच की।
स्टॉक मिलान में भी बड़ा अंतर
जांच के दौरान फर्म के वास्तविक स्टॉक और रिकॉर्ड में भी अंतर मिला। विभाग के मुताबिक जांच में 14.08 करोड़ रुपये का स्टॉक कम और 8.45 करोड़ रुपये का स्टॉक अधिक पाया गया। इससे खरीद, बिक्री, स्टॉक और आईटीसी से जुड़े रिकॉर्ड पर विभाग की जांच और गहरा गई है।
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छह सदस्यीय टीम ने दो दिनों तक की कार्रवाई
जीएसटी के अपर आयुक्त ग्रेड टू जोन प्रथम रामकेश्वर ने बताया कि विभाग ने मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है। खरीद-बिक्री के दस्तावेज, ई-वे बिल, स्टॉक और आईटीसी से संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच के आधार पर कर एवं आईटीसी संबंधी देनदारी निर्धारित की जाएगी। साहिबाबाद स्थित फर्म में दो दिन तक जांच चली।
ई-वे बिल ने खोली गड़बड़ी की परत
जीएसटी की संयुक्त कमिश्नर सुजाता सिंह ने बताया कि डेटा विश्लेषण के दौरान फर्म के ई-वे बिलों में भी कई विसंगतियां मिलीं। वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक फर्म से जुड़े 204 ई-वे बिल, जिनका कुल मूल्य 11.31 करोड़ रुपये कैंसिल किए गए। वहीं, 1600 ई-वे बिल, जिनका मूल्य 14.20 करोड़ रुपये था, एक्सटेंड किए गए हैं। इन विसंगतियों के आधार पर विभाग ने फर्म की जांच की।
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स्टॉक मिलान में भी बड़ा अंतर
जांच के दौरान फर्म के वास्तविक स्टॉक और रिकॉर्ड में भी अंतर मिला। विभाग के मुताबिक जांच में 14.08 करोड़ रुपये का स्टॉक कम और 8.45 करोड़ रुपये का स्टॉक अधिक पाया गया। इससे खरीद, बिक्री, स्टॉक और आईटीसी से जुड़े रिकॉर्ड पर विभाग की जांच और गहरा गई है।
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छह सदस्यीय टीम ने दो दिनों तक की कार्रवाई
जीएसटी के अपर आयुक्त ग्रेड टू जोन प्रथम रामकेश्वर ने बताया कि विभाग ने मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है। खरीद-बिक्री के दस्तावेज, ई-वे बिल, स्टॉक और आईटीसी से संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच के आधार पर कर एवं आईटीसी संबंधी देनदारी निर्धारित की जाएगी। साहिबाबाद स्थित फर्म में दो दिन तक जांच चली।