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कागजों में सख्त, धरातल पर सुस्त: नगर निगम के ढीले रवैये से 400 से 600 पहुंचीं अवैध डेरियां

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2026 02:23 AM IST
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Strict on paper, sluggish on the ground: Illegal dairies rise from 400 to 600 due to the Municipal Corporation's lax attitude.
गाजियाबाद। नगर निगम क्षेत्र के आवासीय इलाकों में संचालित अवैध पशु डेरियां स्थानीय निवासियों के लिए जी का जंजाल बन चुकी हैं। शासन व प्रशासन की ओर से डेरियों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के लगातार फरमान जारी हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर इनका रत्ती भर असर नहीं दिख रहा। आलम यह है कि नगर निगम की ढीली कार्रवाई केवल नोटिस भेजने तक सीमित है, जिसके कारण अवैध डेरियों का जाल घटने के बजाय लगातार फैलता जा रहा है।
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नालियों में सीधा बह रहा गोबर, सीवरेज नेटवर्क ठप

वर्तमान में शहर के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में करीब 550 अवैध डेरियां बेधड़क चल रही हैं, जिनमें 10 हजार से अधिक मवेशी मौजूद हैं। इन डेरियों में गोबर निस्तारण का कोई प्रबंध नहीं है। डेयरी संचालक सबमर्सिबल पंप के पानी के दबाव से गोबर को सीधे नालियों और सीवर लाइनों में बहा रहे हैं। नतीजतन, नालियों में पानी का बहाव रुक गया है और सीवरेज लाइनें पूरी तरह चोक हो चुकी हैं, जिससे हर समय जलभराव और दुर्गंध की स्थिति बनी रहती है।
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2 साल में 400 से बढ़कर 600 हुईं डेरियां

नगर निगम की लचर कार्यशैली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दो साल पहले शहर में डेरियों की संख्या 400 थी, जो अब बढ़कर 600 पहुंच गई है। इस दौरान नगर निगम महज 50 डेरियों को ही बंद कराने में कामयाब हो सका। सख्त कार्रवाई न होने से डेयरी संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
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निजी जरूरत पर छूट, लेकिन गोबर बहाने की इजाजत नहीं

इस संबंध में नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष कुमार का कहना है कि शिकायत मिलने पर मौके की जांच कर नियम विरुद्ध पाई जाने वाली डेरियों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि जिन परिवारों ने अपनी निजी जरूरत के हिसाब से दो पशु पाल रखे हैं, उन्हें निगम की ओर से छूट दी गई है। हालांकि, उनके लिए भी सख्त नियम है कि वे गोबर और गंदगी को नाले या सीवर में नहीं बहाएंगे। यदि सीधे लोग भी गंदगी बहाते पाए गए तो उन पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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