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Ghaziabad News: रामपुर रोड पर फैक्टरी में बनाया जा रहा था नकली उर्वरक, अधिकारियों ने मारा छापा
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रामपुर रोड पर एक गोदाम के अंदर जमीन पर फैली नकली डीएपी को दिखाते कृषि अधिकारी। संवाद
हापुड़। कृषि विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने शनिवार शाम पुलिस बल के साथ रामपुर रोड पर नकली उर्वरक बनाने की फैक्टरी का भंडाफोड़ किया है। टीम की भनक मिलने के कारण आरोपी फैक्टरी छोड़कर फरार हो गए। टीम ने मौके से 90 बोरे नकली पोटाश और 20 बोरे डीएपी के बरामद किए हैं। फैक्टरी किसकी है और किसकी शह पर यह कार्य किया जा रहा था, टीम इसकी जांच में जुटी है। शुक्रवार को भी टीम ने यूरिया को पीसने वाली एक फैक्टरी को पकड़ा था।
अधिकारियों के अनुसार जिले में नकली उर्वरक बनाने की सूचना प्राप्त हो रही थीं। जिसके बाद डीएम कविता मीना की ओर से अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए गए कि इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ कर कानूनी कार्रवाई करें। जिसके बाद अधिकारी लगातार इस प्रयास में जुटे थे। शनिवार को अधिकारियों को रामपुर रोड पर चल रही इस फैक्टरी के बारे में सूचना मिली। सूचना के आधार पर जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रताप, नायब तहसीलदार प्रताप सिंह व कोतवाली पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची। लेकिन यहां पहुंचने से चंद मिनट पहले यहां कार्य कर रहे लोगों को पुलिस के आने की भनक लग गई और आरोपी फैक्टरी को खुला छोड़कर मौके से भाग गए।
अधिकारियों ने बताया कि फैक्टरी में पोटाश और डीएपी भरे 110 बोरे मिले हैं। यहां से केमिकल भी बरामद किया गया है। बड़ी बात है कि यह उर्वरक कृषि में प्रयोग होने वाला अनुदान का खाद था। टीम जांच कर रही है कि इसे कहां-कहां सप्लाई किया जा रहा था। यह भी संभव है कि इसका प्रयोग मुर्गी दाना बनाने वाली फैक्टरियों में किया जाता हो। कृषि विभाग के अधिकारियों ने सैंपल लेने के साथ ही फैक्टरी को सील कर दिया है। वहीं गहनता से जांच की जा रही है।
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बता दें कि कृषि विभाग की टीम ने शुक्रवार को बुलंदशहर रोड पर अवैध रूप से चल रही एक अन्य फैक्टरी में यूरिया पिसाई का मामला पकड़ा था। मौके से शासकीय अनुदान के करीब 300 बोरे यूरिया को बरामद किए गए थे।
जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रताप ने बताया कि नकली उर्वरक के अलावा कुछ केमिकल और गंधक जैसा पदार्थ भी यहां से बरामद हुए हैं। इन सभी के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे जा रहे हैं। फैक्टरी के मालिक और इसका संचालन करने वाली की जांच की जा रही है। जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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ठिकाने बदल बदलकर काम कर रहे माफिया--
जिले में पहले सीमा से सटे कुछ इलाकों में नकली कीटनाशक, उर्वरक बनाने का कार्य होता था। यह क्षेत्र मेरठ और हापुड़ की सीमा में आते थे। जहां से बाजारों में आसानी से माल पहुंचा दिया जाता था। इस काम में जुटे लोग इतने शातिर होते हैं कि जब उन्हें लगता है हापुड़ से सख्ती होगी तो मेरठ की ओर खिसक जाते हैं और जब मेरठ से सख्ती की उम्मीद होती है तो खुद को उस क्षेत्र से बाहर कर लेते हैं। पिछले दो दिनों की कार्रवाई से अंदाजा लगाया जा रहा है कि आरोपी इन स्थानों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां गोदाम अधिक हैं या यह क्षेत्र बिल्कुल सुनसान जंगल के बीच है।
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पहले भी पकड़ी जा चुकी हैं खेप--
पिछले दिनों कृषि अधिकारियों ने बुलंदशहर रोड पर यूरिया की खेप पकड़ी थी। मुर्गीदाना बनाने वाली फैक्टरी में यूरिया पकड़ा गया था, सैकड़ों कट्टे गोदाम में थे। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, साथ ही कट्टों की निलामी कराई गई। इसके साथ ही एक प्लाईवुड फैक्टरी में भी यूरिया सप्लाई किए जाने का वीडियो वायरल हुआ था। इसके अलावा पिछले साल मोहल्ला कासमपुरा में भी नकली उर्वरक बनाने का मामला सामने आया था।
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अधिकारियों के अनुसार जिले में नकली उर्वरक बनाने की सूचना प्राप्त हो रही थीं। जिसके बाद डीएम कविता मीना की ओर से अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए गए कि इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ कर कानूनी कार्रवाई करें। जिसके बाद अधिकारी लगातार इस प्रयास में जुटे थे। शनिवार को अधिकारियों को रामपुर रोड पर चल रही इस फैक्टरी के बारे में सूचना मिली। सूचना के आधार पर जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रताप, नायब तहसीलदार प्रताप सिंह व कोतवाली पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची। लेकिन यहां पहुंचने से चंद मिनट पहले यहां कार्य कर रहे लोगों को पुलिस के आने की भनक लग गई और आरोपी फैक्टरी को खुला छोड़कर मौके से भाग गए।
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अधिकारियों ने बताया कि फैक्टरी में पोटाश और डीएपी भरे 110 बोरे मिले हैं। यहां से केमिकल भी बरामद किया गया है। बड़ी बात है कि यह उर्वरक कृषि में प्रयोग होने वाला अनुदान का खाद था। टीम जांच कर रही है कि इसे कहां-कहां सप्लाई किया जा रहा था। यह भी संभव है कि इसका प्रयोग मुर्गी दाना बनाने वाली फैक्टरियों में किया जाता हो। कृषि विभाग के अधिकारियों ने सैंपल लेने के साथ ही फैक्टरी को सील कर दिया है। वहीं गहनता से जांच की जा रही है।
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बता दें कि कृषि विभाग की टीम ने शुक्रवार को बुलंदशहर रोड पर अवैध रूप से चल रही एक अन्य फैक्टरी में यूरिया पिसाई का मामला पकड़ा था। मौके से शासकीय अनुदान के करीब 300 बोरे यूरिया को बरामद किए गए थे।
जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रताप ने बताया कि नकली उर्वरक के अलावा कुछ केमिकल और गंधक जैसा पदार्थ भी यहां से बरामद हुए हैं। इन सभी के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे जा रहे हैं। फैक्टरी के मालिक और इसका संचालन करने वाली की जांच की जा रही है। जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ठिकाने बदल बदलकर काम कर रहे माफिया
जिले में पहले सीमा से सटे कुछ इलाकों में नकली कीटनाशक, उर्वरक बनाने का कार्य होता था। यह क्षेत्र मेरठ और हापुड़ की सीमा में आते थे। जहां से बाजारों में आसानी से माल पहुंचा दिया जाता था। इस काम में जुटे लोग इतने शातिर होते हैं कि जब उन्हें लगता है हापुड़ से सख्ती होगी तो मेरठ की ओर खिसक जाते हैं और जब मेरठ से सख्ती की उम्मीद होती है तो खुद को उस क्षेत्र से बाहर कर लेते हैं। पिछले दो दिनों की कार्रवाई से अंदाजा लगाया जा रहा है कि आरोपी इन स्थानों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां गोदाम अधिक हैं या यह क्षेत्र बिल्कुल सुनसान जंगल के बीच है।
पहले भी पकड़ी जा चुकी हैं खेप
पिछले दिनों कृषि अधिकारियों ने बुलंदशहर रोड पर यूरिया की खेप पकड़ी थी। मुर्गीदाना बनाने वाली फैक्टरी में यूरिया पकड़ा गया था, सैकड़ों कट्टे गोदाम में थे। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, साथ ही कट्टों की निलामी कराई गई। इसके साथ ही एक प्लाईवुड फैक्टरी में भी यूरिया सप्लाई किए जाने का वीडियो वायरल हुआ था। इसके अलावा पिछले साल मोहल्ला कासमपुरा में भी नकली उर्वरक बनाने का मामला सामने आया था।