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Ghaziabad News: बसों में लगाए हेल्पलाइन नंबर कहीं अधूरा तो किसी पर नहीं जा रही घंटी
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- डिपो एआरएम के नंबर भी गलत हैं अंकित
ज्योती यादव
साहिबाबाद। एनसीआर क्षेत्र में महिलाओं के साथ अपराध की बढ़ती वारदात के बावजूद शासन के निर्देशों का परिवहन विभाग पालन नहीं कर रहा है। दो साल पहले प्रदेश सरकार ने सभी बसों में अधिकारियों के नंबर और हेल्पलाइन लिखने के निर्देश दिए थे। रोडवेज बसों में अधिकारियों के नंबर तो अंकित किए गए, लेकिन उनको आधा अधूरा ही लिखा गया। मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से इसकी पड़ताल की गई तो पूरा सच सामना आ गया। विभाग के जिन अधिकारियों के नंबर लिखे गए हैं, उनमें कई बंद हैं तो कुछ पर घंटी जाती है, लेकिन कोई जवाब नहीं आता है। आखिर ऐसी हालत में महिलाओं की सुरक्षा रोडवेज बसों में किसके भरोसे है।
रोडवेज बसों में महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए अंकित किए गए हेल्पलाइन और टोल फ्री नंबर भी काम नहीं कर रहे हैं। गाजियाबाद, साहिबाबाद और मेरठ समेत अलग-अलग डिपो की बसों में महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित नंबर लिखे हैं, लेकिन इन नंबरों पर फोन करने पर संपर्क नहीं हो सका। वहीं, मेरठ के वैशाली डिपो की बस एक भी नंबर लिखा नहीं मिला। महिलाओं के साथ हो रही दरिंदगी के बावजूद रोडवेज की बसों में महिला सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। मंगलवार की दोपहर पड़ताल के दौरान रोडवेज की बसों में महिला सुरक्षा से खिलवाड़ के कई सबूत मिले।
इतना ही नहीं, गाजियाबाद डिपो की बस में लिखे डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) का नंबर भी 10 अंक की जगह केवल नौ अंकों में ही मिला है। बस संख्या-यूपी 12एटी-1008 और यूपी 81बीटी-5116 पर अंकित हेल्पलाइन नंबर 9415049606 पर फोन नहीं लगा। ऐसे में यात्रा के दौरान किसी महिला यात्री के साथ बदसलूकी या अन्य परेशानी होने पर बस में लिखे नंबर से मदद लेने की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। बसों में लगाया गया टोल-फ्री नंबर भी बंद पाया गया।
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महिला सुरक्षा के लिए जरूरी नंबर
1. आपातकालीन नंबर-112
2. महिला हेल्पलाइन नंबर-1090
3. टोल फ्री नंबर- 18001802877
4. चिकित्सा-108
5. चाईल्ड-1098
6. पुलिस-112
7. अग्निशमन-101
8. संबंधित डिपो के एआरएम का नंबर अंकित होगा-
क्या है नियम
भारत में सार्वजनिक परिवहन (बसों) में महिलाओं की सुरक्षा के लिए इमरजेंसी बटन, व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और महिला सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर अंकित करने का मुख्य केंद्रीय आदेश दिसंबर 2018 में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी किया गया था। वहीं, उत्तर प्रदेश (यूपीएसआरटीसी) की बसों के लिए दिसंबर 2019 में दामिनी हेल्पलाइन (81142-77777) की शुरुआत करते हुए 15 जनवरी 2020 तक सभी रोडवेज बसों और बस स्टेशनों के भीतर इस नंबर को अनिवार्य रूप से पेंट (अंकित) करने का आदेश दिया गया था।
जिन बसों में गलत नंबर लिखे गए हैं या फोन नंबर नहीं लग रहे हैं उनकी जांच की जाएगी। अनुबंधित वाहन स्वामी और रोडवेज बस में गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। -केसरी नंदन चौधरी, क्षेत्रीय प्रबंधक, गाजियाबाद
ज्योती यादव
साहिबाबाद। एनसीआर क्षेत्र में महिलाओं के साथ अपराध की बढ़ती वारदात के बावजूद शासन के निर्देशों का परिवहन विभाग पालन नहीं कर रहा है। दो साल पहले प्रदेश सरकार ने सभी बसों में अधिकारियों के नंबर और हेल्पलाइन लिखने के निर्देश दिए थे। रोडवेज बसों में अधिकारियों के नंबर तो अंकित किए गए, लेकिन उनको आधा अधूरा ही लिखा गया। मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से इसकी पड़ताल की गई तो पूरा सच सामना आ गया। विभाग के जिन अधिकारियों के नंबर लिखे गए हैं, उनमें कई बंद हैं तो कुछ पर घंटी जाती है, लेकिन कोई जवाब नहीं आता है। आखिर ऐसी हालत में महिलाओं की सुरक्षा रोडवेज बसों में किसके भरोसे है।
रोडवेज बसों में महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए अंकित किए गए हेल्पलाइन और टोल फ्री नंबर भी काम नहीं कर रहे हैं। गाजियाबाद, साहिबाबाद और मेरठ समेत अलग-अलग डिपो की बसों में महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित नंबर लिखे हैं, लेकिन इन नंबरों पर फोन करने पर संपर्क नहीं हो सका। वहीं, मेरठ के वैशाली डिपो की बस एक भी नंबर लिखा नहीं मिला। महिलाओं के साथ हो रही दरिंदगी के बावजूद रोडवेज की बसों में महिला सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। मंगलवार की दोपहर पड़ताल के दौरान रोडवेज की बसों में महिला सुरक्षा से खिलवाड़ के कई सबूत मिले।
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इतना ही नहीं, गाजियाबाद डिपो की बस में लिखे डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) का नंबर भी 10 अंक की जगह केवल नौ अंकों में ही मिला है। बस संख्या-यूपी 12एटी-1008 और यूपी 81बीटी-5116 पर अंकित हेल्पलाइन नंबर 9415049606 पर फोन नहीं लगा। ऐसे में यात्रा के दौरान किसी महिला यात्री के साथ बदसलूकी या अन्य परेशानी होने पर बस में लिखे नंबर से मदद लेने की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। बसों में लगाया गया टोल-फ्री नंबर भी बंद पाया गया।
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महिला सुरक्षा के लिए जरूरी नंबर
1. आपातकालीन नंबर-112
2. महिला हेल्पलाइन नंबर-1090
3. टोल फ्री नंबर- 18001802877
4. चिकित्सा-108
5. चाईल्ड-1098
6. पुलिस-112
7. अग्निशमन-101
8. संबंधित डिपो के एआरएम का नंबर अंकित होगा-
क्या है नियम
भारत में सार्वजनिक परिवहन (बसों) में महिलाओं की सुरक्षा के लिए इमरजेंसी बटन, व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और महिला सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर अंकित करने का मुख्य केंद्रीय आदेश दिसंबर 2018 में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी किया गया था। वहीं, उत्तर प्रदेश (यूपीएसआरटीसी) की बसों के लिए दिसंबर 2019 में दामिनी हेल्पलाइन (81142-77777) की शुरुआत करते हुए 15 जनवरी 2020 तक सभी रोडवेज बसों और बस स्टेशनों के भीतर इस नंबर को अनिवार्य रूप से पेंट (अंकित) करने का आदेश दिया गया था।
जिन बसों में गलत नंबर लिखे गए हैं या फोन नंबर नहीं लग रहे हैं उनकी जांच की जाएगी। अनुबंधित वाहन स्वामी और रोडवेज बस में गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। -केसरी नंदन चौधरी, क्षेत्रीय प्रबंधक, गाजियाबाद