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Ghaziabad News: साॅफ्टवेयर इंजीनियर को डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 11.69 लाख

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2024 04:10 AM IST
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Software engineer digitally arrested and defrauded of Rs 11.69 lakh
गाजियाबाद। इंदिरापुरम क्षेत्र के रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर को साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट कर 11.69 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने मनीलॉड्रिंग के मामले में उनका नाम शामिल होने और एक साल के कारावास की सजा डर दिखाकर मामले को रफा-दफा करने के नाम पर रुपये की मांग कर ठगी की। जब रुपये की मांग लगातार की गई तो उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर अपराध थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
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सॉफ्टवेयर इंजीनियर का कहना है कि तीन जून को टेलीकॉम रेगुलारिटी ऑथॉरिटी ऑफ इंडिया के नाम से उनके पास कॉल आई। कॉलर ने उन्हें बताया कि उनके नंबर के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत मुंबई में दर्ज हुई है। इसके बाद उनसे एक महिला ने बता ती। उसने मुंबई पुलिस को कॉल ट्रांसफर की। फिर एक दूसरी महिला ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर उनसे बात की। अधिकारी बनकर महिला ने बताया कि नरेश गोयल नाम के व्यक्ति ने द्वारा की गई दो करोड़ की मनीलॉड्रिंग के मामले में उनका नाम भी सामने आया है। इस मामले में करीब 200 लोग शामिल हैं। नरेश के घर से उनके नाम का डेबिट कार्ड मिला है। ऐसे में उन्हें एक साल की जेल हो सकती है। पीड़ित का कहना है कि इससे वह डर गए और इसी बीच उस वर्दीधारी अधिकारी ने उन्हें वीडियो कॉल पर ले लिया। वीडियो कॉल पर उनके साथ एक दूसरा व्यक्ति भी वॉकी टॉकी के साथ बैठा हुआ नजर आया। एडीसीपी अपराध सच्चिदानंद ने बताया कि मामले में ठगी गई रकम को फ्रीज कराने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपियों की तलाश भी की जा रही है।
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पुलिस ही नहीं, जज भी नकली
इंजीनियर का कहना है कि वीडियो पर महिला पुलिस अधिकारी ने उनसे कहा कि ऑनलाइन कोर्ट में सीनियर सिटीजन और गर्भवती महिलाओं को लेकर आने की मंजूरी होती है, लेकिन वह प्रयास कर रही हैं कि तुम्हारे मामले में वीडियो कॉल पर ही पूछताछ हो जाए। इसके लिए वह जज से अनुमति ले रही हैं। कुछ देर बात उन्होंने कहा कि जज मान गए हैं। इसके बाद वॉकी-टॉकी के साथ एक व्यक्ति ने खुद को जज बताकर उनसे बात करनी शुरू की। पूछताछ के दौरान उनसे बैंक खाते का स्टेटमेंट देखने को कहा। इसके बाद जांच प्रक्रिया के नाम पर खाते में जो रकम है उसे भेजने को कहा। डर के कारण उन्होंने खाते में से 11.69 लाख रुपये उनके बताए खाते में भेज दिए। इसकी उन्हें एक रसीद भी दी गई। उन्होंने बताया गया कि अब आगे की जांच होगी। अगले दिन जब उनसे और रुपये मांगे गए तो उन्हें शक हुआ।
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