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Ghaziabad News: तारकोल की सुस्त सप्लाई ने थामी विकास की रफ्तार, तीन से छह महीने की डिलीवरी डेट
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साहिबाबाद। शहर में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य तारकोल की पर्याप्त उपलब्धता न होने से प्रभावित हो रहे हैं। मथुरा रिफाइनरी से तारकोल की आपूर्ति के लिए निर्माण एजेंसियों को तीन से छह महीने की डिलीवरी डेट मिल रही है। इससे सीएम ग्रिड योजना सहित कई विकास कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
तारकोल सड़क निर्माण की एक प्रमुख सामग्री है। इसकी मांग भेजने के बाद भी आपूर्ति में लंबी देरी हो रही है। जिन सड़कों का बेस तैयार है, वहां अंतिम परत बिछाने का काम रुका हुआ है। मरम्मत और मुख्य विकास प्रोजेक्ट भी धीमी गति से चल रहे हैं। वसुंधरा जोन निर्माण विभाग के अवर अभियंता संजय गंगवार ने बताया कि सीएम ग्रिड के काम सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। डामर सड़कों के लिए तारकोल सबसे प्रमुख सामग्री है।
देरी और बढ़े हुए रेट का असर
समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। तारकोल की लेट डिलीवरी ही एकमात्र चुनौती नहीं है, बल्कि बढ़े हुए रेट भी काम प्रभावित कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय युद्ध के कारण इसकी आपूर्ति में कमी आई है, जिससे मांग और रेट दोनों बढ़े हैं। नगर निगम और अन्य विभागों की सड़क मरम्मत परियोजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। अधूरे कार्यों से धूल, गड्ढे और जाम की समस्या बनी हुई है।
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तारकोल सड़क निर्माण की एक प्रमुख सामग्री है। इसकी मांग भेजने के बाद भी आपूर्ति में लंबी देरी हो रही है। जिन सड़कों का बेस तैयार है, वहां अंतिम परत बिछाने का काम रुका हुआ है। मरम्मत और मुख्य विकास प्रोजेक्ट भी धीमी गति से चल रहे हैं। वसुंधरा जोन निर्माण विभाग के अवर अभियंता संजय गंगवार ने बताया कि सीएम ग्रिड के काम सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। डामर सड़कों के लिए तारकोल सबसे प्रमुख सामग्री है।
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देरी और बढ़े हुए रेट का असर
समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। तारकोल की लेट डिलीवरी ही एकमात्र चुनौती नहीं है, बल्कि बढ़े हुए रेट भी काम प्रभावित कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय युद्ध के कारण इसकी आपूर्ति में कमी आई है, जिससे मांग और रेट दोनों बढ़े हैं। नगर निगम और अन्य विभागों की सड़क मरम्मत परियोजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। अधूरे कार्यों से धूल, गड्ढे और जाम की समस्या बनी हुई है।
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