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Ghaziabad News: गर्मी, उमस और प्रदूषण से त्वचा रोगी 20 फीसदी बढ़े
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संयुक्त जिला अस्पताल की ओपीडी में उमड़ी मरीजों की भीड़। संवाद
गाजियाबाद। भीषण गर्मी, बढ़ती उमस और लगातार खराब हो रही वायु गुणवत्ता का असर लोगों की त्वचा पर भी दिखाई देने लगा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में त्वचा संबंधी रोगियों की संख्या में 20 फीसदी से अधिक वृद्धि हुई है।
जिला एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 300 मरीज खुजली, फंगल संक्रमण, एलर्जी, घमौरी, एक्जिमा और त्वचा पर चकत्तों जैसी समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं। वहीं, संयुक्त अस्पताल में पिछले चार वर्ष से त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में पसीना अधिक आने, शरीर पर लंबे समय तक नमी बने रहने और प्रदूषण के संपर्क में रहने से त्वचा पर संक्रमण तेजी से फैलता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से एलर्जी की समस्या से जूझ रहे लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है। कई मरीज शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। इससे संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है।
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स्टेरॉयड युक्त क्रीम के इस्तेमाल से बचें
एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एके दीक्षित का कहना है कि गर्मी और उमस के कारण त्वचा पर बैक्टीरिया व फंगस तेजी से पनपते हैं। समय पर उपचार न कराया जाए तो संक्रमण शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकता है। उन्होंने सलाह दी कि लोग शरीर को साफ और सूखा रखें, सूती कपड़े पहनें और बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरॉयड युक्त क्रीम का इस्तेमाल न करें। डॉ. दीक्षित का कहना है कि इस समय त्वचा रोगियों की संख्या 20 फीसदी बढ़ी है।
प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचा रहे धूल और धूप
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. भावुक मित्तल का कहना है कि प्रदूषण, धूल और तेज धूप त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे एलर्जी, रैशेज और त्वचा में जलन की शिकायत बढ़ जाती है। डॉ. भावुक का कहना है कि हाल में हुए वैज्ञानिक शोध में भी यह सामने आया है कि बढ़ता तापमान, अधिक आर्द्रता और वायु प्रदूषण त्वचा संबंधी रोगों के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारण बन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जलवायु के कारण भविष्य में ऐसे मरीजों की संख्या और बढ़ सकती है, इसलिए समय रहते बचाव के उपाय अपनाना आवश्यक है।
त्वचा रोग के प्रमुख कारण
-अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण लंबे समय तक पसीना बना रहना।
-धूल, धुएं और वायु प्रदूषण के संपर्क में रहना।
-शरीर और त्वचा की पर्याप्त सफाई न करना।
-गीले या सिंथेटिक कपड़े लंबे समय तक पहनना।
-बिना डॉक्टर की सलाह के क्रीम या दवाओं का इस्तेमाल करना।
ऐसे करें बचाव
-त्वचा को साफ और सूखा रखें, नियमित स्नान करें।
-सूती और ढीले कपड़े पहनें।
-धूप में निकलते समय सनस्क्रीन व छाते का प्रयोग करें।
-पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखें।
-संक्रमण होने पर तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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जिला एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 300 मरीज खुजली, फंगल संक्रमण, एलर्जी, घमौरी, एक्जिमा और त्वचा पर चकत्तों जैसी समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं। वहीं, संयुक्त अस्पताल में पिछले चार वर्ष से त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में पसीना अधिक आने, शरीर पर लंबे समय तक नमी बने रहने और प्रदूषण के संपर्क में रहने से त्वचा पर संक्रमण तेजी से फैलता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से एलर्जी की समस्या से जूझ रहे लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है। कई मरीज शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। इससे संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है।
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स्टेरॉयड युक्त क्रीम के इस्तेमाल से बचें
एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एके दीक्षित का कहना है कि गर्मी और उमस के कारण त्वचा पर बैक्टीरिया व फंगस तेजी से पनपते हैं। समय पर उपचार न कराया जाए तो संक्रमण शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकता है। उन्होंने सलाह दी कि लोग शरीर को साफ और सूखा रखें, सूती कपड़े पहनें और बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरॉयड युक्त क्रीम का इस्तेमाल न करें। डॉ. दीक्षित का कहना है कि इस समय त्वचा रोगियों की संख्या 20 फीसदी बढ़ी है।
प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचा रहे धूल और धूप
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. भावुक मित्तल का कहना है कि प्रदूषण, धूल और तेज धूप त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे एलर्जी, रैशेज और त्वचा में जलन की शिकायत बढ़ जाती है। डॉ. भावुक का कहना है कि हाल में हुए वैज्ञानिक शोध में भी यह सामने आया है कि बढ़ता तापमान, अधिक आर्द्रता और वायु प्रदूषण त्वचा संबंधी रोगों के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारण बन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जलवायु के कारण भविष्य में ऐसे मरीजों की संख्या और बढ़ सकती है, इसलिए समय रहते बचाव के उपाय अपनाना आवश्यक है।
त्वचा रोग के प्रमुख कारण
-अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण लंबे समय तक पसीना बना रहना।
-धूल, धुएं और वायु प्रदूषण के संपर्क में रहना।
-शरीर और त्वचा की पर्याप्त सफाई न करना।
-गीले या सिंथेटिक कपड़े लंबे समय तक पहनना।
-बिना डॉक्टर की सलाह के क्रीम या दवाओं का इस्तेमाल करना।
ऐसे करें बचाव
-त्वचा को साफ और सूखा रखें, नियमित स्नान करें।
-सूती और ढीले कपड़े पहनें।
-धूप में निकलते समय सनस्क्रीन व छाते का प्रयोग करें।
-पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखें।
-संक्रमण होने पर तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।