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Ghaziabad News: प्राथमिक विद्यालय में सात छात्राओं से की छेड़छाड़, आरोपी शिक्षक निलंबित
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गाजियाबाद। मुरादनगर ब्लाॅक के एक गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय में 42 साल के शिक्षक ने सात छात्राओं से छेड़छाड़ की। वह पढ़ाई के दौरान छात्राओं से अश्लील बातें भी करता था। छात्राओं ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकी देना लगा कि स्कूल की कोई बात बाहर नहीं जानी चाहिए। अगर किसी को बताया तो अच्छा नहीं होगा। हिम्मत करके एक छात्रा ने परिजनों को उसकी करतूत के बारे में बताया। तब जाकर मामला खुला। इसकी जांच कराने के बाद मंगलवार को बीएसए ओपी यादव ने उसे निलंबित कर उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए।
यह कार्रवाई तब की गई जब सोमवार को पीड़ित छात्राओं के अभिभावक स्कूल पहुंच गए। उन्होंने हंगामा करते हुए आरोपी शिक्षक की पिटाई कर दी। मौके पर पुलिस पहुंच गई थी। स्कूल के अन्य शिक्षकों ने अभिभावकों को आश्वासन दिया था कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ 24 घंटे में कार्रवाई हो जाएगी।
मंगलवार को एबीएसए जांच के लिए स्कूल पहुंचे। कक्षा छह, सात और आठ की सात छात्राओं ने एबीएसए के सामने अपना बयान दर्ज कराया। छात्राओं ने कहा कि शिक्षक कई महीने से ऐसी हरकतें कर रहा था लेकिन बदनामी के डर से वे चुप रहीं। जब उसकी हरकतें बढ़ने लगीं तो उन्हें परिजनों को बताना पड़ा। एबीएसए ने बताया कि छात्राओं के बयान से पुष्टि हो गई कि शिक्षक उनके साथ छेड़खानी करता था। बीएसए ओपी यादव ने बताया कि शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है।
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विरोध के बाद भी की छेड़छाड़
अभिभावकों ने एबीएसए को बताया कि उन्हें चार दिन पहले पूरे मामले का पता चला। शिक्षक ने छात्राओं को धमकी दी थी कि किसी को नहीं बताना है। अभिभावकों का कहना था कि उनसे गलती हुई जो उसकी हरकतों का पता चलने पर शांत रहे। इससे उसका दुस्साहस बढ़ गया। उसे लगा कि बच्चियां डर गई हैं। उसने फिर से छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया। इस पर स्कूल में पहुंचकर अपनी बात रखनी पड़ी। हालांकि, अभिभावकों ने उसके खिलाफ तहरीर देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि अगर केस दर्ज कराना है तो शिक्षा विभाग के अधिकारी कराएं। इसके पीछे उनकी दलील थी कि बच्चियां छोटी हैं। वे उन्हें पुलिस की जांच और कोर्ट के चक्कर में नहीं डालना चाहते हैं।
आरोप लगने पर हुआ था तबादला
जिस शिक्षक पर छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं, वह पहले ही इस तरह की हरकतें कर चुका है। अभिभावकों ने उसके बारे में जानकारी जुटाई है। उन्होंने बताया कि वह दो साल पहले पास के ही एक गांव में तैनात था। वहां भी छात्राओं ने उसके खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत की थी। इस पर उसे चेतावनी देकर उसका तबादला कर दिया गया था। अगर उसी समय उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई होती तो शायद उसका दुस्साहस फिर से ऐसी हरकतें करने का नहीं होता।
समिति से कर सकते हैं शिकायत
बीएसए ने बताया कि सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रबंध समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों के मोबाइल नंबर बोर्ड पर लिखे होते हैं। समिति में अभिभावक भी होते हैं। अगर किसी छात्र या छात्रा को कोई समस्या है तो वह किसी भी नंबर पर अपनी बात रख सकता है। समिति की जिम्मेदारी उस पर कार्रवाई कराने की है।
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यह कार्रवाई तब की गई जब सोमवार को पीड़ित छात्राओं के अभिभावक स्कूल पहुंच गए। उन्होंने हंगामा करते हुए आरोपी शिक्षक की पिटाई कर दी। मौके पर पुलिस पहुंच गई थी। स्कूल के अन्य शिक्षकों ने अभिभावकों को आश्वासन दिया था कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ 24 घंटे में कार्रवाई हो जाएगी।
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मंगलवार को एबीएसए जांच के लिए स्कूल पहुंचे। कक्षा छह, सात और आठ की सात छात्राओं ने एबीएसए के सामने अपना बयान दर्ज कराया। छात्राओं ने कहा कि शिक्षक कई महीने से ऐसी हरकतें कर रहा था लेकिन बदनामी के डर से वे चुप रहीं। जब उसकी हरकतें बढ़ने लगीं तो उन्हें परिजनों को बताना पड़ा। एबीएसए ने बताया कि छात्राओं के बयान से पुष्टि हो गई कि शिक्षक उनके साथ छेड़खानी करता था। बीएसए ओपी यादव ने बताया कि शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है।
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विरोध के बाद भी की छेड़छाड़
अभिभावकों ने एबीएसए को बताया कि उन्हें चार दिन पहले पूरे मामले का पता चला। शिक्षक ने छात्राओं को धमकी दी थी कि किसी को नहीं बताना है। अभिभावकों का कहना था कि उनसे गलती हुई जो उसकी हरकतों का पता चलने पर शांत रहे। इससे उसका दुस्साहस बढ़ गया। उसे लगा कि बच्चियां डर गई हैं। उसने फिर से छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया। इस पर स्कूल में पहुंचकर अपनी बात रखनी पड़ी। हालांकि, अभिभावकों ने उसके खिलाफ तहरीर देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि अगर केस दर्ज कराना है तो शिक्षा विभाग के अधिकारी कराएं। इसके पीछे उनकी दलील थी कि बच्चियां छोटी हैं। वे उन्हें पुलिस की जांच और कोर्ट के चक्कर में नहीं डालना चाहते हैं।
आरोप लगने पर हुआ था तबादला
जिस शिक्षक पर छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं, वह पहले ही इस तरह की हरकतें कर चुका है। अभिभावकों ने उसके बारे में जानकारी जुटाई है। उन्होंने बताया कि वह दो साल पहले पास के ही एक गांव में तैनात था। वहां भी छात्राओं ने उसके खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत की थी। इस पर उसे चेतावनी देकर उसका तबादला कर दिया गया था। अगर उसी समय उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई होती तो शायद उसका दुस्साहस फिर से ऐसी हरकतें करने का नहीं होता।
समिति से कर सकते हैं शिकायत
बीएसए ने बताया कि सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रबंध समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों के मोबाइल नंबर बोर्ड पर लिखे होते हैं। समिति में अभिभावक भी होते हैं। अगर किसी छात्र या छात्रा को कोई समस्या है तो वह किसी भी नंबर पर अपनी बात रख सकता है। समिति की जिम्मेदारी उस पर कार्रवाई कराने की है।