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मजदूर के नाम पर करोड़ों का लेन-देन: आयकर विभाग ने भेजा सात करोड़ का नोटिस, DM और SP से लगाई न्याय की गुहार
Fri, 13 Jun 2025 11:05 PM IST
अनुज कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, पिलखुवा
संवाद न्यूज एजेंसी, पिलखुवा
Published by: अनुज कुमार
Updated Fri, 13 Jun 2025 11:05 PM IST
सार
गाजियाबाद से सटे पिलखुवा में एक मजदूर को आयकर विभाग ने एक नोटिस भेज दिया है। इतना ही नहीं जवाब भी मजदूर से मांगा है। जिसने उसकी रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है।
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आयकर विभाग
- फोटो : ANI
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विस्तार
मोहल्ला राणा पट्टी महादेव निवासी सुभाष मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। आयकर विभाग के एक नोटिस ने उनकी रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। हालांकि सात करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध आय का यह नोटिस विभाग ने फरवरी 2024 में भेजा था, लेकिन जानकारी के अभाव में इस पर ध्यान नहीं दिया। अब सुभाष ने शुक्रवार को जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मिलकर पूरे मामले की शिकायत करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
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मोहल्ला निवासी सुभाष 40 गज के मकान में रहते हैं। ऐसे में विभाग की ओर से आए नोटिस से सुभाष और परिजन भी सकते में हैं। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020-21 के लिए आयकर विभाग को धौलाना स्थित एक निजी अस्पताल से जीएसटी से संबंधित दो बड़े ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली है। इस लेन-देन में सुभाष का नाम सामने आया है। विभाग के अनुसार, सुभाष के नाम पर जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी में क्रमश 3,27,40,680 और 3,75,74,085 रुपये के ट्रांजेक्शन दर्ज हैं।
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इस आधार पर हापुड़ स्थित आयकर विभाग के अधिकारी जितेन्द्र सिंह ने नौ फरवरी 2024 को नोटिस जारी करते हुए सुभाष से 19 फरवरी तक जवाब मांगा कि इन ट्रांजेक्शन का उनसे क्या संबंध है। लेकिन ज्यादा पढ़ा लिखा न होने और जानकारी के अभाव में सुभाष ने इस पर ध्यान नहीं दिया। विभाग की सख्ती हुई तो सुभाष ने शुक्रवार को जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मिलकर मामले की शिकायत करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने अधिकारियों से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और असली दोषियों को सामने लाया जाए।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि सुभाष एक सीधे-साधे व्यक्ति हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं लगती कि उनके नाम पर करोड़ों का लेन-देन हो सके। मोहल्ले में चर्चा है कि किसी ने उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर लिया है। अब सुभाष को यह सिद्ध करना होगा कि ये लेन-देन उनसे संबंधित नहीं हैं। यदि वे ऐसा नहीं कर सके तो विभाग इसे अघोषित आय मानते हुए बड़ी कार्रवाई कर सकता है।
आयकर अधिकारी जितेंद्र सिंह का कहना है कि अभी इस संबंध में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है। फिलहाल वे कार्यालय से बाहर हैं, कार्यालय पहुंचने के बाद ही मामले की जानकारी कर विस्तार से बताया जा सकेगा।