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ऑनलाइन सट्टा : पॉश सोसायटी के फ्लैट में चल रहा था धंधा, ठगी करने का तरीका जानकर पुलिस भी चौंकी
Sat, 03 Apr 2021 09:24 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 03 Apr 2021 09:24 AM IST
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पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद के इंदिरापुरम पुलिस ने फ्लैट में चल रहे ऑनलाइन सट्टे के कारोबार कर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि सरगना समेत तीन आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से 10 मोबाइल, तीन लैपटॉप, 12 रजिस्टर, 16 पैनकार्ड, 40 एटीएम कार्ड, 14 मोहर, समेत 25 हजार रुपये बरामद किए हैं।
आरोपी छह माह में डेढ़ करोड़ से अधिक की ठगी अब तक कर चुके हैं। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। सीओ इंदिरापुरम अंशु जैन ने बताया कि इंदिरापुरम पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एसोटेक कबाना विंडसर सोसायटी के एक फ्लैट में ऑनलाइन सट्टे का कारोबार चल रहा है। एसएचओ इंदिरापुरम संजीव शर्मा, इंस्पेक्टर क्राइम सुनील सिंह ने टीम के साथ फ्लैट पर पहुंचकर छापा मारा। पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पकड़े गए आरोपियों ने ऑनलाइन सट्टा खिलवाने की बात कबूल की। पुलिस दोनों को पकड़कर थाने ले आई। पकड़े गए दोनों आरोपी प्रमोद कुमार निवासी एसोटेक कबाना विंडसर और प्रवेश विश्नोई निवासी ऑरेंज काउंटी सोसायटी नीति खंड हैं। पुलिस ने आरोपियों के फ्लैट से 10 मोबाइल, 3 लैपटॉप, 12 रजिस्टर जिनमें लेनदेन का डाटा उपलब्ध है जब्त किया है। साथ ही पुलिस ने मौके से 16 पैनकार्ड, 40 फर्जी खातों के एटीएम कार्ड, 14 मोहर, 3 वोटर आईडी, 2 ड्राइविंग लाइसेंस, 4 आधार कार्ड और 25 हजार रुपये बरामद किए हैं।
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पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनके तीन साथी अमरीश विश्नोई निवासी नोएडा सेक्टर 67, भरत बंसल और अंकित गर्ग अभी फरार हैं। गिरोह के सरगना अमरीश और भरत हैं। जबकि अंकित लेनदेन का पूरा काम देखता था। पकड़ा गया आरोपी प्रवेश और अमरीश दोनों सगे भाई हैं। मेरठ में प्रवेश का होटल का कारोबार है। आरोपी अब तक करीब डेढ़ करोड़ से अधिक की ठगी कर चुके हैं। सीओ ने बताया कि फर्जी खातों से लेनदेन का विवरण जुटाया जा रहा है। इसके बाद ही इसकी संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
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आरोपी छह माह में डेढ़ करोड़ से अधिक की ठगी अब तक कर चुके हैं। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। सीओ इंदिरापुरम अंशु जैन ने बताया कि इंदिरापुरम पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एसोटेक कबाना विंडसर सोसायटी के एक फ्लैट में ऑनलाइन सट्टे का कारोबार चल रहा है। एसएचओ इंदिरापुरम संजीव शर्मा, इंस्पेक्टर क्राइम सुनील सिंह ने टीम के साथ फ्लैट पर पहुंचकर छापा मारा। पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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पकड़े गए आरोपियों ने ऑनलाइन सट्टा खिलवाने की बात कबूल की। पुलिस दोनों को पकड़कर थाने ले आई। पकड़े गए दोनों आरोपी प्रमोद कुमार निवासी एसोटेक कबाना विंडसर और प्रवेश विश्नोई निवासी ऑरेंज काउंटी सोसायटी नीति खंड हैं। पुलिस ने आरोपियों के फ्लैट से 10 मोबाइल, 3 लैपटॉप, 12 रजिस्टर जिनमें लेनदेन का डाटा उपलब्ध है जब्त किया है। साथ ही पुलिस ने मौके से 16 पैनकार्ड, 40 फर्जी खातों के एटीएम कार्ड, 14 मोहर, 3 वोटर आईडी, 2 ड्राइविंग लाइसेंस, 4 आधार कार्ड और 25 हजार रुपये बरामद किए हैं।
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पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनके तीन साथी अमरीश विश्नोई निवासी नोएडा सेक्टर 67, भरत बंसल और अंकित गर्ग अभी फरार हैं। गिरोह के सरगना अमरीश और भरत हैं। जबकि अंकित लेनदेन का पूरा काम देखता था। पकड़ा गया आरोपी प्रवेश और अमरीश दोनों सगे भाई हैं। मेरठ में प्रवेश का होटल का कारोबार है। आरोपी अब तक करीब डेढ़ करोड़ से अधिक की ठगी कर चुके हैं। सीओ ने बताया कि फर्जी खातों से लेनदेन का विवरण जुटाया जा रहा है। इसके बाद ही इसकी संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
ऐसे करते थे ठगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि प्रमोद को नौकरी पर रखा गया था। अमरीश ही प्रमोद को लोगों के नंबरों का डाटा उपलब्ध कराता था। इसके बाद प्रमोद उन नंबरों पर ऑनलाइन गेम में हार-जीत का सट्टा लगाकर रुपये जितने के मेसेज भेजता था। जो लोग इच्छुक होते थे। वह संपर्क करते थे तो प्रमोद सट्टा लगाने के लिए आईडी-पासवर्ड देता था।
इसके लिए रुपये भी अपने खातों में डलवाता था। हार जीत के रुपये भी इन्हीं खातों में डलवाए जाते थे। इसके बाद इन खातों के एटीएम कार्ड से खातों में डाली गई रकम निकाल लेते थे। जो जीतता था उन्हें रुपये नहीं देते थे। यह सभी खाते कुछ लोगों को लोन दिलाने का झांसा देने के नाम पर लिए गए दस्तावेज से खोले गए हैं। उन्हीं के दस्तावेज से लगाकर विभिन्न बैंकों में खाते खोले गए थे। पुलिस को करीब 40 से 50 खाते मिले हैं। इन्हें से पुलिस ने तीन खातों को फ्रीज करा दिया है।
इसके लिए रुपये भी अपने खातों में डलवाता था। हार जीत के रुपये भी इन्हीं खातों में डलवाए जाते थे। इसके बाद इन खातों के एटीएम कार्ड से खातों में डाली गई रकम निकाल लेते थे। जो जीतता था उन्हें रुपये नहीं देते थे। यह सभी खाते कुछ लोगों को लोन दिलाने का झांसा देने के नाम पर लिए गए दस्तावेज से खोले गए हैं। उन्हीं के दस्तावेज से लगाकर विभिन्न बैंकों में खाते खोले गए थे। पुलिस को करीब 40 से 50 खाते मिले हैं। इन्हें से पुलिस ने तीन खातों को फ्रीज करा दिया है।