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छापामारी की अफवाह से बाजार बंद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Sat, 12 Nov 2016 01:31 AM IST
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बाजार
- फोटो : अमर उजाला
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आयकर और वाणिज्य कर विभाग की छापामारी की अफवाह कुछ ऐसी फैली कि शुक्रवार को शहर के सभी बाजार बंद हो गए। खासतौर से सराफा बाजार, इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम बंद थे। चौपला बाजार में व्यापारी इकट्ठा भी हुए पर बाद में सभी व्यापारी अपनी दुकानें बंद करके चले गए।
गांधीनगर मार्केट, नवयुग मार्केट, अंबेडकर रोड मार्केट, तुराबनगर मार्केट, डासना गेट, घंटाघर, चौपला, दिल्ली गेट, सिहानी गेट आदि बाजार दोपहर को बंद हो गए।
केंद्र सरकार के 500 व 1000 के नोटों को चलन से बाहर करने के बाद अफवाहों का बाजार गर्म है। शुक्रवार को सुबह तय समय पर बाजार खुले। दोपहर को अचानक खबर फैली कि आयकर विभाग और वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी टीम बनाकर बाजारों में छापा मारने आ रहे हैं।
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यह खबर फैलते ही व्यापारियाें ने दुकानें बंद करनी शुरू कर दी। सराफा बाजार बिलकुल बंद कर दिया गया। नवयुग मार्केट में इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम भी बंद हो गए। सराफा एसोसिएशन के संरक्षक राज किशोर गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में ब्लैक मनी के बदले में गोल्ड बेचा गया है।
आयकर विभाग को भनक थी कि गाजियाबाद में भी ऐसा हुआ है। इसलिए कुछ अधिकारी ग्राहक बनकर चौपला बाजार गए थे, लेकिन रेड की खबर फैल गई और सभी दुकानदाराें ने दुकानें बंद कर दी। सराफा व्यापारियों ने बैठक करके सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जो व्यापारी बैक डेट पर बिलिंग करेगा, उसका बहिष्कार किया जाएगा।
उद्यमी हैं परेशान, प्रतिदिन का खर्चा कैसे निकालें
बाजार से 500 व 1000 के नोट बंद होने से उद्यमियों को प्रतिदिन का खर्चा निकालने में परेशानी आ रही है। लेबर समय पर फैक्ट्रियाें में पहुंच नहीं पा रही, जिस कारण उत्पादन भी गिरा है। केंद्र सरकार द्वारा 500 व 1000 के नोट बंद करने का असर उद्यमियों पर भी पड़ा है।
उद्यमी एक तरफ श्रमिकों को सैलरी नहीं दे पा रहे हैं। वहीं उनके दैनिक खर्चे भी ठप हो गए हैं। बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया के उद्यमी महेश सिंघल ने बताया कि बडे़ नोट को बंद करना कालाबाजारी को खत्म करना है, मगर इसके कारण इंडस्ट्री सेक्टर भी प्रभावित हुआ है।
लेबर आधे दिन की छुट्टी करके बैंकों के बाहर लाइन लगाकर खड़े हैं। दूसरी ओर प्रतिदिन के खर्चे निकालना मुश्किल हो गया है। किसी के पास भी 100 के नोट नहीं हैं। बैंक कम नोट दे रहे हैं। यदि एक दिन में 10 हजार रुपये दें तो उद्यमी अपना खर्चा निकाल सकेंगे। लेबर के आने से उत्पादन भी कम हुआ है। यदि ऐसा ही रहा तो काफी नुकसान होगा।
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गांधीनगर मार्केट, नवयुग मार्केट, अंबेडकर रोड मार्केट, तुराबनगर मार्केट, डासना गेट, घंटाघर, चौपला, दिल्ली गेट, सिहानी गेट आदि बाजार दोपहर को बंद हो गए।
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केंद्र सरकार के 500 व 1000 के नोटों को चलन से बाहर करने के बाद अफवाहों का बाजार गर्म है। शुक्रवार को सुबह तय समय पर बाजार खुले। दोपहर को अचानक खबर फैली कि आयकर विभाग और वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी टीम बनाकर बाजारों में छापा मारने आ रहे हैं।
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यह खबर फैलते ही व्यापारियाें ने दुकानें बंद करनी शुरू कर दी। सराफा बाजार बिलकुल बंद कर दिया गया। नवयुग मार्केट में इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम भी बंद हो गए। सराफा एसोसिएशन के संरक्षक राज किशोर गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में ब्लैक मनी के बदले में गोल्ड बेचा गया है।
आयकर विभाग को भनक थी कि गाजियाबाद में भी ऐसा हुआ है। इसलिए कुछ अधिकारी ग्राहक बनकर चौपला बाजार गए थे, लेकिन रेड की खबर फैल गई और सभी दुकानदाराें ने दुकानें बंद कर दी। सराफा व्यापारियों ने बैठक करके सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जो व्यापारी बैक डेट पर बिलिंग करेगा, उसका बहिष्कार किया जाएगा।
उद्यमी हैं परेशान, प्रतिदिन का खर्चा कैसे निकालें
बाजार से 500 व 1000 के नोट बंद होने से उद्यमियों को प्रतिदिन का खर्चा निकालने में परेशानी आ रही है। लेबर समय पर फैक्ट्रियाें में पहुंच नहीं पा रही, जिस कारण उत्पादन भी गिरा है। केंद्र सरकार द्वारा 500 व 1000 के नोट बंद करने का असर उद्यमियों पर भी पड़ा है।
उद्यमी एक तरफ श्रमिकों को सैलरी नहीं दे पा रहे हैं। वहीं उनके दैनिक खर्चे भी ठप हो गए हैं। बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया के उद्यमी महेश सिंघल ने बताया कि बडे़ नोट को बंद करना कालाबाजारी को खत्म करना है, मगर इसके कारण इंडस्ट्री सेक्टर भी प्रभावित हुआ है।
लेबर आधे दिन की छुट्टी करके बैंकों के बाहर लाइन लगाकर खड़े हैं। दूसरी ओर प्रतिदिन के खर्चे निकालना मुश्किल हो गया है। किसी के पास भी 100 के नोट नहीं हैं। बैंक कम नोट दे रहे हैं। यदि एक दिन में 10 हजार रुपये दें तो उद्यमी अपना खर्चा निकाल सकेंगे। लेबर के आने से उत्पादन भी कम हुआ है। यदि ऐसा ही रहा तो काफी नुकसान होगा।