{"_id":"6a91d5b3485808be820939dc","slug":"retired-senior-citizen-defrauded-after-being-kept-under-digital-arrest-for-eight-days-ghaziabad-news-c-30-gbd1036-964384-2026-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: सेवानिवृत्त बुजुर्ग को आठ दिन डिजिटल अरेस्ट रख 10 लाख रुपये ठगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: सेवानिवृत्त बुजुर्ग को आठ दिन डिजिटल अरेस्ट रख 10 लाख रुपये ठगे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजियाबाद। वैशाली स्थित जज कॉलोनी निवासी सेवानिवृत्त बुजुर्ग पूरण सिंह (77) साइबर ठगी का शिकार हो गए। साइबर ठगों ने उन्हें आठ दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके 10 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि पीड़ित पूरण सिंह के अनुसार, 10 अगस्त को उनके पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को पुलिस मुख्यालय का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर कुछ फर्जी सिम खरीदे गए हैं, उनका प्रयोग आतंकी गतिविधियों में हुआ है। ठगों ने पुलिस, एटीएस (ATS) और जेल भेजने का खौफ दिखाकर उनका घंटों मानसिक उत्पीड़न किया और मामले को रफा-दफा करने के नाम पर 10 लाख रुपये की मांग की। ठगों की मुस्तैदी का आलम यह था कि 14 और 15 अगस्त को बैंक बंद रहने के दौरान उन्होंने लगातार रकम का इंतजाम करने की धमकियां दीं। जब बुजुर्ग पैसे निकालने के लिए घर से बैंक गए, तब भी ठग वाट्सएप वॉयस कॉल के जरिए लगातार उन पर नजर बनाए रहे।
''आई एम सेफ, जय हिंद'' लिखकर भेजना होता था मैसेज
डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों ने बुजुर्ग पर सख्त बंदिशें लगा रखी थीं। आठ दिनों तक ज्यादातर समय वॉयस कॉल चालू रखी गई। इतना ही नहीं, बुजुर्ग को हर दो घंटे में ठगों के नंबर पर ''आई एम सेफ, जय हिंद'' लिखकर मैसेज भेजने की हिदायत दी गई थी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे पुलिस या परिवार के किसी सदस्य के पास नहीं गए हैं।
विज्ञापन
ऐसे हुआ ठगी का अहसास
ठगों के दबाव में आकर बुजुर्ग ने 10 लाख रुपये बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद जब ठगों ने 5 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग शुरू की तो पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और परिजनों को आपबीती बताकर पुलिस में मामला दर्ज कराया।
विज्ञापन
एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि पीड़ित पूरण सिंह के अनुसार, 10 अगस्त को उनके पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को पुलिस मुख्यालय का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर कुछ फर्जी सिम खरीदे गए हैं, उनका प्रयोग आतंकी गतिविधियों में हुआ है। ठगों ने पुलिस, एटीएस (ATS) और जेल भेजने का खौफ दिखाकर उनका घंटों मानसिक उत्पीड़न किया और मामले को रफा-दफा करने के नाम पर 10 लाख रुपये की मांग की। ठगों की मुस्तैदी का आलम यह था कि 14 और 15 अगस्त को बैंक बंद रहने के दौरान उन्होंने लगातार रकम का इंतजाम करने की धमकियां दीं। जब बुजुर्ग पैसे निकालने के लिए घर से बैंक गए, तब भी ठग वाट्सएप वॉयस कॉल के जरिए लगातार उन पर नजर बनाए रहे।
विज्ञापन
''आई एम सेफ, जय हिंद'' लिखकर भेजना होता था मैसेज
डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों ने बुजुर्ग पर सख्त बंदिशें लगा रखी थीं। आठ दिनों तक ज्यादातर समय वॉयस कॉल चालू रखी गई। इतना ही नहीं, बुजुर्ग को हर दो घंटे में ठगों के नंबर पर ''आई एम सेफ, जय हिंद'' लिखकर मैसेज भेजने की हिदायत दी गई थी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे पुलिस या परिवार के किसी सदस्य के पास नहीं गए हैं।
विज्ञापन
ऐसे हुआ ठगी का अहसास
ठगों के दबाव में आकर बुजुर्ग ने 10 लाख रुपये बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद जब ठगों ने 5 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग शुरू की तो पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और परिजनों को आपबीती बताकर पुलिस में मामला दर्ज कराया।