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राधा रानी ही संसार से लगाएंगी पार
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 07 Aug 2016 12:09 AM IST
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धार्मिक
- फोटो : अमर उजाला
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‘मानव जन्म देवताओं को भी दुर्लभ है। इसे प्रभु को याद करके बिताना चाहिए। जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की और उन्होंने मनुष्य को बनाया तो उन्हें बड़ा आनंद आया।’ चतु: संप्रदाय के स्वामी रास बिहारी दास काठिया बाबा ने यह बातें अपने प्रवचन के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि प्रार्थना में बड़ी शक्ति है और संसार सागर से राधा रानी ही पार लगा सकती हैं।
क्लासिक रेजीडेंसी राजनगर एक्सटेंशन में सत्संग के दूसरे दिन शनिवार को महंत रास बिहारी दास काठिया बाबा ने कहा कि 84 लाख योनियों के बाद मनुष्य जन्म लेने का सौभाग्य मिलता है।
उसको कई मनुष्य सिर्फ दुनिया के भोगों में लिप्त होकर समाप्त कर देते हैं। जानवरों की तरह कमाना, खाना, सोना और बच्चे पैदा करना ही जीवन सफल मान लेते हैं। लेकिन मनुष्य जीवन तभी सफल होता है, जब ईश्वर का भजन किया जाए।
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उन्होंने कहा कि मानव जीवन में ही सत्संग का सौभाग्य प्राप्त होता है लेकिन हम माया प्रपंच के दलदल में फंसकर अमूल्य जीवन को ऐसे ही गंवा देते हैं। कथा के बीच में उन्होंने भजन गाया-कर दो, कर दो बेड़ा पार, राधे अलबेली सरकार...। इस मौके पर अरुनामो सिकंदार, पीएस सुराल, गौतम घोष, दिलीप शाह मुख्य रूप से मौजूद रहे।
देश विदेश में करते हैं हिंदू धर्म का प्रचार
ब्रज विदेही चतु: संप्रदाय के महंत श्री श्री 108 स्वामी रास बिहारी काठियाबाबा निम्बार्क कुलतिलक संप्रदाय के 57वें गुरु हैं। इन्होंने सात साल की उम्र में ही संन्यास ले लिया और 21 वर्ष की उम्र में महंत बन गए।
बाबा देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों में भी हिंदू धर्म का प्रचार प्रसार और सत्संग करते हैं। वह अपनी काम इंद्रियों पर नियंत्रण करने के लिए काठ की एक बेल्ट पहनते हैं।
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क्लासिक रेजीडेंसी राजनगर एक्सटेंशन में सत्संग के दूसरे दिन शनिवार को महंत रास बिहारी दास काठिया बाबा ने कहा कि 84 लाख योनियों के बाद मनुष्य जन्म लेने का सौभाग्य मिलता है।
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उसको कई मनुष्य सिर्फ दुनिया के भोगों में लिप्त होकर समाप्त कर देते हैं। जानवरों की तरह कमाना, खाना, सोना और बच्चे पैदा करना ही जीवन सफल मान लेते हैं। लेकिन मनुष्य जीवन तभी सफल होता है, जब ईश्वर का भजन किया जाए।
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उन्होंने कहा कि मानव जीवन में ही सत्संग का सौभाग्य प्राप्त होता है लेकिन हम माया प्रपंच के दलदल में फंसकर अमूल्य जीवन को ऐसे ही गंवा देते हैं। कथा के बीच में उन्होंने भजन गाया-कर दो, कर दो बेड़ा पार, राधे अलबेली सरकार...। इस मौके पर अरुनामो सिकंदार, पीएस सुराल, गौतम घोष, दिलीप शाह मुख्य रूप से मौजूद रहे।
देश विदेश में करते हैं हिंदू धर्म का प्रचार
ब्रज विदेही चतु: संप्रदाय के महंत श्री श्री 108 स्वामी रास बिहारी काठियाबाबा निम्बार्क कुलतिलक संप्रदाय के 57वें गुरु हैं। इन्होंने सात साल की उम्र में ही संन्यास ले लिया और 21 वर्ष की उम्र में महंत बन गए।
बाबा देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों में भी हिंदू धर्म का प्रचार प्रसार और सत्संग करते हैं। वह अपनी काम इंद्रियों पर नियंत्रण करने के लिए काठ की एक बेल्ट पहनते हैं।