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Ghaziabad News: दुष्कर्म पीड़िताओं के घर जाएगी पुलिस टीम, जख्मों पर रखेगी मरहम
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गाजियाबाद। दुष्कर्म के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पीड़िता और उसके परिवार की मुश्किलें खत्म नहीं होतीं। आरोपी या उसके परिजनों की धमकी, समझौते का दबाव और मुकदमे की लंबी प्रक्रिया के बीच कई परिवार खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। इसे देखते हुए कमिश्नरेट पुलिस ने अब पुराने मामलों की पीड़िताओं से सीधे संपर्क करने की पहल की है। पुलिस पिछले पांच वर्षों में दुष्कर्म की शिकार हुई महिलाओं और बच्चियों के घर पहुंचकर उनकी मौजूदा स्थिति की जानकारी लेगी। जरूरत के मुताबिक सुरक्षा और अन्य मदद भी उपलब्ध कराई जाएगी।
पहल के पहले चरण में मिशन शक्ति की महिला पुलिसकर्मी और दरोगा पीड़िताओं के घर जाएंगे। टीम पीड़िता और उसके अभिभावकों से बातचीत कर घटना के बाद की स्थिति की जानकारी लेगी। खासतौर पर यह देखा जाएगा कि आरोपी या उसके परिजन पीड़िता अथवा परिवार पर किसी तरह का दबाव या धमकी तो नहीं डाल रहे हैं। मुकदमा वापस लेने या समझौते के लिए दबाव की भी जानकारी जुटाई जाएगी।
पुलिस यह भी देखेगी कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसके परिवार को किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही है। आरोपियों की वर्तमान गतिविधियों और उनकी लोकेशन पर भी नजर रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें कानून के प्रावधानों की जानकारी देकर चेतावनी भी दी जाएगी। 12 वर्ष तक की उम्र वाली दुष्कर्म पीड़ित बच्चियों को भी इस पहल में शामिल किया गया है।
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टीम आरोपियों की वर्तमान गतिविधियों की भी जानकारी जुटाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि आरोपी किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में तो शामिल नहीं हैं।
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दोबारा जिंदगी से जोड़ने की कोशिश
पहल के दूसरे चरण में सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िताओं की काउंसलिंग पर जोर दिया जाएगा। महिला पुलिसकर्मी उनकी समस्याओं को समझने के साथ उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े अवसरों की जानकारी भी देंगी। पुलिस के अनुसार इसका उद्देश्य पीड़िताओं को सामाजिक जीवन में दोबारा जुड़ने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।
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एक-दो दिन में घर पहुंचेंगी टीमें
डीसीपी पुलिस मुख्यालय बलवंत चौधरी ने बताया कि पहल के तहत पहले चरण में करीब 150 पीड़िताओं और उनके परिवारों का विस्तृत ब्योरा तैयार किया गया है। एक अक्तूबर से इसकी शुरुआत कर दी गई है। एक-दो दिन में महिला पुलिसकर्मियों की टीमें सादे कपड़ों में पीड़िताओं के घर जाएंगी। इससे उनकी सुरक्षा और मुकदमे से जुड़ी समस्याओं की लगातार निगरानी करने में मदद मिलेगी।
पहल के पहले चरण में मिशन शक्ति की महिला पुलिसकर्मी और दरोगा पीड़िताओं के घर जाएंगे। टीम पीड़िता और उसके अभिभावकों से बातचीत कर घटना के बाद की स्थिति की जानकारी लेगी। खासतौर पर यह देखा जाएगा कि आरोपी या उसके परिजन पीड़िता अथवा परिवार पर किसी तरह का दबाव या धमकी तो नहीं डाल रहे हैं। मुकदमा वापस लेने या समझौते के लिए दबाव की भी जानकारी जुटाई जाएगी।
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पुलिस यह भी देखेगी कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसके परिवार को किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही है। आरोपियों की वर्तमान गतिविधियों और उनकी लोकेशन पर भी नजर रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें कानून के प्रावधानों की जानकारी देकर चेतावनी भी दी जाएगी। 12 वर्ष तक की उम्र वाली दुष्कर्म पीड़ित बच्चियों को भी इस पहल में शामिल किया गया है।
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टीम आरोपियों की वर्तमान गतिविधियों की भी जानकारी जुटाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि आरोपी किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में तो शामिल नहीं हैं।
दोबारा जिंदगी से जोड़ने की कोशिश
पहल के दूसरे चरण में सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िताओं की काउंसलिंग पर जोर दिया जाएगा। महिला पुलिसकर्मी उनकी समस्याओं को समझने के साथ उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े अवसरों की जानकारी भी देंगी। पुलिस के अनुसार इसका उद्देश्य पीड़िताओं को सामाजिक जीवन में दोबारा जुड़ने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।
एक-दो दिन में घर पहुंचेंगी टीमें
डीसीपी पुलिस मुख्यालय बलवंत चौधरी ने बताया कि पहल के तहत पहले चरण में करीब 150 पीड़िताओं और उनके परिवारों का विस्तृत ब्योरा तैयार किया गया है। एक अक्तूबर से इसकी शुरुआत कर दी गई है। एक-दो दिन में महिला पुलिसकर्मियों की टीमें सादे कपड़ों में पीड़िताओं के घर जाएंगी। इससे उनकी सुरक्षा और मुकदमे से जुड़ी समस्याओं की लगातार निगरानी करने में मदद मिलेगी।