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Ghaziabad News: 91 साल पहले गाजियाबाद आए थे गांधी जी, जिस चौकी पर बैठे वह आज भी सुरक्षित

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 02:32 AM IST
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Gandhi ji visited Ghaziabad 91 years ago; the outpost where he sat remains intact to this day.
(महात्मा गांधी की जयंती पर संस्मरण)
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गाजियाबाद। महात्मा गांधी भले ही एक बार गाजियाबाद आए हों, लेकिन यहां से भी गहरा नाता जोड़ गए। बापू 91 साल पहले वर्ष 1935 में गाजियाबाद आए थे। तब शहर की हरिजन बस्ती, जिसे आज वाल्मीकि बस्ती के नाम से जाना जाता है, में उन्होंने रात बिताई थी। यहां उन्होंने छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के साथ समाज में एकजुटता और स्वदेशी का संदेश दिया था। गांधीजी के उस प्रवास की याद आज भी एक चौकी के रूप में सुरक्षित है। इसी चौकी पर बैठकर उन्होंने लोगों से संवाद किया और भोजन किया था।
नयागंज निवासी उद्यमी उपेंद्र गोयल बताते हैं कि उनके बाबा स्वर्गीय हीरालाल गोयल भी गांधी जी के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। बाबा से सुने संस्मरण को याद करते हुए वह बताते हैं कि शाम के समय गांधी जी दिल्ली से गाजियाबाद पहुंचे थे। उस समय शहर चार गेटों के बीच बसा हुआ था। नवयुग मार्केट के पास स्थित वाल्मीकि बस्ती में उनका कार्यक्रम हुआ था।
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उपेंद्र गोयल के अनुसार, गांधी जी देर रात तक बस्ती के लोगों से संवाद करते रहे। उन्होंने छुआछूत और भेदभाव को दूर कर समाज को एकजुट करने व स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया। बड़ी संख्या में लोग गांधी जी को देखने और सुनने के लिए जुटे थे। कार्यक्रम के दौरान ‘रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम’ के गायन से माहौल गूंज उठा था। गांधी जी ने रात बस्ती में ही बिताई और अगले दिन सुबह दिल्ली लौट गए।
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पांच हजार रुपये में नीलाम हुई थी चौकी
उपेंद्र गोयल बताते हैं कि गांधी जी के जाने के अगले दिन वह चौकी नीलामी में रखी गई, जिस पर बैठकर उन्होंने लोगों से संवाद किया था। उनके बाबा हीरालाल गोयल ने इसे पांच हजार रुपये में खरीदा था। परिवार के अनुसार, नीलामी से मिली रकम बस्ती के विकास पर खर्च की गई थी। गोयल परिवार ने इस चौकी को सहेजकर रखा है। करीब साढ़े तीन फीट लंबाई और साढ़े चार फीट चौड़ाई वाली यह चौकी अब परिवार की तीसरी पीढ़ी के पास सुरक्षित है। घर के आंगन में रखी यह चौकी परिवार के लिए महज एक वस्तु नहीं, बल्कि गाजियाबाद में गांधी जी के प्रवास की स्मृति है।

करीब 85 वर्षीय इतिहासकार व साहित्यकार एसएन शर्मा बताते हैं कि जब गांधी जी गाजियाबाद आए थे, तब उनका जन्म नहीं हुआ था। उन्होंने अपने बुजुर्गों से गांधी जी के गाजियाबाद आने और वाल्मीकि बस्ती में ठहरने के बारे में सुना। उनके अनुसार, गांधी जी लोगों से जनसंपर्क के लिए अक्सर पैदल ही जाते थे और सादगी से रहते थे। आज के नेताओं की तरह वह लाव-लश्कर लेकर नहीं चलते थे।
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