{"_id":"65a3a345ceb6ac8ced01f52d","slug":"pneumonia-increases-in-children-as-cold-increases-ghaziabad-news-c-30-gbd1013-285145-2024-01-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: सर्दी बढ़ने के साथ ही बच्चों में बढ़ा निमोनिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: सर्दी बढ़ने के साथ ही बच्चों में बढ़ा निमोनिया
विज्ञापन
गाजियाबाद। सर्दी बढ़ने से बच्चों में निमोनिया के मामले बढ़ रहे हैं। एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 20 से 25 बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें से पांच से सात बच्चों को भर्ती भी किया जा रहा है। अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन उपाध्याय का कहना है कि निमोनिया संक्रामक नहीं है, लेकिन सांस की नली में रुके वायरस और बैक्टीरिया बीमारी का कारण बनते हैं। जब ये कीटाणु बच्चे के मुंह या नाक में होते हैं तो उसके खांसने और छींकने से रोग फैला जाता है। संक्रमित से इस्तेमाल किए गए टिश्यू या रूमाल छूने से भी निमोनिया फैल सकता है। अगर घर में किसी को श्वसन या गले का संक्रमण है, तो अपने पीने के गिलास और बर्तनों को परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखें। अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं। बीमार बच्चाें से स्वस्थ बच्चों को दूर रखें।
बच्चों में निमोनिया की रोकथाम
बाल रोग विशेषज्ञ एवं प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल का कहना है कि न्यूमोकोकल न्यूमोनिया को एक टीके से रोका जा सकता है। यह 13 प्रकार के न्यूमोकोकल न्यूमोनिया से बचाता है। बच्चों को दो महीने की उम्र से शुरू होने वाले टीके लगवाना शुरू कर देना चाहिए। टीके के बारे में अपने बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें। दो वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए एक और टीका उपलब्ध है, जिन्हें निमोनिया होने का अधिक खतरा होता है। डॉ नीरज का कहना है कि काली खांसी और फ्लू जैसी बीमारियों के बाद भी निमोनिया हो सकता है। बच्चा खांसता या छींकता है, तो उसे अपनी नाक और मुंह ढंकना सिखाएं।
-- --
विज्ञापन
बच्चों में निमोनिया की रोकथाम
बाल रोग विशेषज्ञ एवं प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल का कहना है कि न्यूमोकोकल न्यूमोनिया को एक टीके से रोका जा सकता है। यह 13 प्रकार के न्यूमोकोकल न्यूमोनिया से बचाता है। बच्चों को दो महीने की उम्र से शुरू होने वाले टीके लगवाना शुरू कर देना चाहिए। टीके के बारे में अपने बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें। दो वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए एक और टीका उपलब्ध है, जिन्हें निमोनिया होने का अधिक खतरा होता है। डॉ नीरज का कहना है कि काली खांसी और फ्लू जैसी बीमारियों के बाद भी निमोनिया हो सकता है। बच्चा खांसता या छींकता है, तो उसे अपनी नाक और मुंह ढंकना सिखाएं।
विज्ञापन