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Ghaziabad News: कूड़े से गैस और जैविक खाद बनाने के लिए लगेगा प्लांट, आइओसीएल ने दिया प्रस्ताव
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शुभम गोयल
हापुड़। शहर से प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े से गैस और जैविक खाद बनाने की तैयारी है। इसके लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने पालिका अधिकारियों को प्रस्ताव दिया है। प्लांट लगाने के लिए कंपनी की ओर से करीब आठ एकड़ भूमि की मांग की गई है। इसमें प्रतिदिन लगभग 200 टन कूड़े का निस्तारण होगा। प्लांट के निर्माण और मशीनरी पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका पूरा खर्च कंपनी उठाएगी। गोरखपुर में लगाए जा रहे प्लांट की तर्ज पर जिले में भी प्लांट लगाने की तैयारी है। प्लांट लगने से रामपुर रोड पर लगे 25-30 फुट ऊंचे कूड़े के ढेर का निस्तारण सबसे पहले हो सकेगा।
बता दें कि नगरीय क्षेत्र से प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े के निस्तारण को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। मात्र तीन एमआरएफ सेंटरों में प्रतिदिन सूखे कूड़े को अलग-अलग करके उसका निस्तारण किया जा रहा है। इस मामले में जिला प्रशासन और नगर पालिका के अधिकारी पूरी तरह विफल रहे हैं। यही कारण है कि रामपुर रोड पर कूड़े का पहाड़ लग चुका है। निस्तारण न होने के कारण यह पहाड़ दिन-प्रतिदिन दिल्ली के कूड़े के पहाड़ जैसा बनता जा रहा है। इसके निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की आवश्यकता है, लेकिन पालिका क्षेत्र के दस किलोमीटर के दायरे में आठ एकड़ भूमि उपलब्ध न होने के कारण करीब नौ साल बाद भी प्लांट नहीं लग सका है।
यही कारण है कि सड़कों पर आए दिन कूड़े के ढेर लग जाते हैं। लोगों को बदबू का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कंपनी की ओर से प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया गया है, जिससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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गैस और खाद बेचकर होगी आय
कंपनी को गैस और खाद बेचकर आय होगी। वहीं, कंपनी की ओर से पालिका को प्रति टन कूड़े के हिसाब से धनराशि दी जाएगी। इससे पालिका की आय भी बढ़ेगी। प्लांट की क्षमता अधिक होने के कारण बाबूगढ़ नगर पंचायत और आसपास के गांवों से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण भी यहां हो सकता है। इससे इन क्षेत्रों की समस्या का समाधान भी हो सकेगा।
कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होगा गीला कूड़ा
गीले कूड़े को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। जैविक कचरे के प्रसंस्करण से निकलने वाले अवशेष से खाद तैयार होगी, जबकि उससे बनने वाली बायोगैस को शुद्ध कर कंप्रेस्ड बायोगैस के रूप में उपयोग किया जाएगा। इससे कूड़े के निस्तारण के साथ ऊर्जा और उपयोगी जैविक खाद का उत्पादन भी होगा।
नगर पालिका क्षेत्र की स्थिति
शहर की आबादी: करीब 3.75 लाख
वार्डों की संख्या: 41
प्रतिदिन निकलने वाला कूड़ा: 110 टन
भवनों की संख्या: करीब 35 हजार
यह कहते हैं अधिकारी
“मुख्य विकास अधिकारी से मिलने के बाद हापुड़ पालिका के ईओ को प्रस्ताव दिया है। कूड़े से गैस और खाद बनाने के लिए प्लांट लगाने की योजना है। प्लांट के लिए आठ एकड़ निशुल्क भूमि की मांग की गई है। कंपनी स्तर पर मशीनरी लगाने, इंस्टॉलेशन और प्लांट का संचालन किया जाएगा। गोरखपुर में कंपनी की ओर से एक प्लांट का निर्माण चल रहा है।”
— सौरभ सिंह, मुख्य प्रबंधक, वैकल्पिक ऊर्जा, आईओसीएल
आईओसीएल कंपनी के अधिकारी प्रस्ताव लेकर आए थे। उन्हें एक अच्छी पीपीटी बनाने को कहा है। इसके बाद जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के समक्ष प्रस्ताव जाएगा। शासन से हुए आदेश भी मांगे गए हैं। जमीन की मांग को भी उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। मैं स्वयं भी चाहता हूं कि कूड़े की इस समस्या का निस्तारण जल्द से जल्द हो।”
— संजय कुमार मिश्रा, अधिशासी अधिकारी
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हापुड़। शहर से प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े से गैस और जैविक खाद बनाने की तैयारी है। इसके लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने पालिका अधिकारियों को प्रस्ताव दिया है। प्लांट लगाने के लिए कंपनी की ओर से करीब आठ एकड़ भूमि की मांग की गई है। इसमें प्रतिदिन लगभग 200 टन कूड़े का निस्तारण होगा। प्लांट के निर्माण और मशीनरी पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका पूरा खर्च कंपनी उठाएगी। गोरखपुर में लगाए जा रहे प्लांट की तर्ज पर जिले में भी प्लांट लगाने की तैयारी है। प्लांट लगने से रामपुर रोड पर लगे 25-30 फुट ऊंचे कूड़े के ढेर का निस्तारण सबसे पहले हो सकेगा।
बता दें कि नगरीय क्षेत्र से प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े के निस्तारण को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। मात्र तीन एमआरएफ सेंटरों में प्रतिदिन सूखे कूड़े को अलग-अलग करके उसका निस्तारण किया जा रहा है। इस मामले में जिला प्रशासन और नगर पालिका के अधिकारी पूरी तरह विफल रहे हैं। यही कारण है कि रामपुर रोड पर कूड़े का पहाड़ लग चुका है। निस्तारण न होने के कारण यह पहाड़ दिन-प्रतिदिन दिल्ली के कूड़े के पहाड़ जैसा बनता जा रहा है। इसके निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की आवश्यकता है, लेकिन पालिका क्षेत्र के दस किलोमीटर के दायरे में आठ एकड़ भूमि उपलब्ध न होने के कारण करीब नौ साल बाद भी प्लांट नहीं लग सका है।
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यही कारण है कि सड़कों पर आए दिन कूड़े के ढेर लग जाते हैं। लोगों को बदबू का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कंपनी की ओर से प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया गया है, जिससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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गैस और खाद बेचकर होगी आय
कंपनी को गैस और खाद बेचकर आय होगी। वहीं, कंपनी की ओर से पालिका को प्रति टन कूड़े के हिसाब से धनराशि दी जाएगी। इससे पालिका की आय भी बढ़ेगी। प्लांट की क्षमता अधिक होने के कारण बाबूगढ़ नगर पंचायत और आसपास के गांवों से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण भी यहां हो सकता है। इससे इन क्षेत्रों की समस्या का समाधान भी हो सकेगा।
कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होगा गीला कूड़ा
गीले कूड़े को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। जैविक कचरे के प्रसंस्करण से निकलने वाले अवशेष से खाद तैयार होगी, जबकि उससे बनने वाली बायोगैस को शुद्ध कर कंप्रेस्ड बायोगैस के रूप में उपयोग किया जाएगा। इससे कूड़े के निस्तारण के साथ ऊर्जा और उपयोगी जैविक खाद का उत्पादन भी होगा।
नगर पालिका क्षेत्र की स्थिति
शहर की आबादी: करीब 3.75 लाख
वार्डों की संख्या: 41
प्रतिदिन निकलने वाला कूड़ा: 110 टन
भवनों की संख्या: करीब 35 हजार
यह कहते हैं अधिकारी
“मुख्य विकास अधिकारी से मिलने के बाद हापुड़ पालिका के ईओ को प्रस्ताव दिया है। कूड़े से गैस और खाद बनाने के लिए प्लांट लगाने की योजना है। प्लांट के लिए आठ एकड़ निशुल्क भूमि की मांग की गई है। कंपनी स्तर पर मशीनरी लगाने, इंस्टॉलेशन और प्लांट का संचालन किया जाएगा। गोरखपुर में कंपनी की ओर से एक प्लांट का निर्माण चल रहा है।”
— सौरभ सिंह, मुख्य प्रबंधक, वैकल्पिक ऊर्जा, आईओसीएल
आईओसीएल कंपनी के अधिकारी प्रस्ताव लेकर आए थे। उन्हें एक अच्छी पीपीटी बनाने को कहा है। इसके बाद जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के समक्ष प्रस्ताव जाएगा। शासन से हुए आदेश भी मांगे गए हैं। जमीन की मांग को भी उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। मैं स्वयं भी चाहता हूं कि कूड़े की इस समस्या का निस्तारण जल्द से जल्द हो।”
— संजय कुमार मिश्रा, अधिशासी अधिकारी