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Ghaziabad News: मेरठ से की जाएगी पीकू-नीकू वार्ड की निगरानी
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गाजियाबाद। संजयनगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए तैयार किए जा रहे पेडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) और नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (नीकू) वार्ड का काम अंतिम चरण में है। अगले सप्ताह से इन वार्डों में बच्चों का उपचार शुरू कर दिया जाएगा। इस वार्ड की निगरानी मेरठ मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सक करेंगे, जिससे बच्चों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
नीकू-पीकू वार्ड को मेरठ मेडिकल कॉलेज से जोड़ने के लिए अस्पताल में ‘स्पोक एंड हब’ मॉडल लागू किया गया है। इसके तहत अस्पताल में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और अन्य तकनीकी उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से विशेषज्ञ चिकित्सक रियल टाइम में मरीजों की स्थिति पर नजर रख सकेंगे और स्थानीय डॉक्टरों को जरूरी चिकित्सकीय सलाह दे सकेंगे। इससे गंभीर हालत वाले बच्चों का इलाज तेजी से और विशेषज्ञों की निगरानी में हो सकेगा।
डॉ. अर्चना ने बताया कि एक बड़ा केंद्र (हब यानी मेरठ मेडिकल कॉलेज) और उससे जुड़े हुए छोटे-छोटे उपकेंद्र (स्पोक्स यानी संयुक्त अस्पताल) में मरीजों का इलाज किया जाता है, लेकिन अगर कोई गंभीर मामला हो या विशेषज्ञ की जरूरत हो, तो हब से तुरंत सलाह ली जाती है। इसके लिए वीडियो कॉलिंग, कैमरे, डेटा शेयरिंग सिस्टम जैसे साधन लगाए जाते हैं। हब के विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज की रिपोर्ट देखकर लाइव वीडियो के जरिए स्थानीय डॉक्टर को गाइड करते हैं कि कैसे इलाज करना है।
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स्टाफ को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
पीकू और नीकू वार्ड के संचालन के लिए अस्पताल के स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। तीन-तीन बैच में स्टाफ नर्सों को कौशांबी स्थित यशोदा अस्पताल में छह दिन का प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बच्चों की गहन देखभाल, जीवन रक्षक उपकरणों के संचालन और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तकनीक सिखाई गई।
नई सुविधाओं के साथ अस्पताल का विस्तार
संयुक्त जिला अस्पताल के दूसरे तल पर छह-छह बेड के पीकू और नीकू वार्ड स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, दो पेडियाट्रिक वार्ड और एक डॉक्टर ड्यूटी रूम भी तैयार किया गया है। अस्पताल के सीएमएस डॉ.संजय गुप्ता ने बताया कि वार्ड के संचालन के लिए आवश्यक सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वार्मर, मॉनिटर, वेंटिलेटर जैसी आवश्यक चिकित्सा मशीनों को भी शिफ्ट कर दिया गया है। इंटरनेट और अन्य तकनीकी सुविधाएं भी सुनिश्चित कर दी गई हैं।
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नीकू-पीकू वार्ड को मेरठ मेडिकल कॉलेज से जोड़ने के लिए अस्पताल में ‘स्पोक एंड हब’ मॉडल लागू किया गया है। इसके तहत अस्पताल में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और अन्य तकनीकी उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से विशेषज्ञ चिकित्सक रियल टाइम में मरीजों की स्थिति पर नजर रख सकेंगे और स्थानीय डॉक्टरों को जरूरी चिकित्सकीय सलाह दे सकेंगे। इससे गंभीर हालत वाले बच्चों का इलाज तेजी से और विशेषज्ञों की निगरानी में हो सकेगा।
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डॉ. अर्चना ने बताया कि एक बड़ा केंद्र (हब यानी मेरठ मेडिकल कॉलेज) और उससे जुड़े हुए छोटे-छोटे उपकेंद्र (स्पोक्स यानी संयुक्त अस्पताल) में मरीजों का इलाज किया जाता है, लेकिन अगर कोई गंभीर मामला हो या विशेषज्ञ की जरूरत हो, तो हब से तुरंत सलाह ली जाती है। इसके लिए वीडियो कॉलिंग, कैमरे, डेटा शेयरिंग सिस्टम जैसे साधन लगाए जाते हैं। हब के विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज की रिपोर्ट देखकर लाइव वीडियो के जरिए स्थानीय डॉक्टर को गाइड करते हैं कि कैसे इलाज करना है।
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स्टाफ को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
पीकू और नीकू वार्ड के संचालन के लिए अस्पताल के स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। तीन-तीन बैच में स्टाफ नर्सों को कौशांबी स्थित यशोदा अस्पताल में छह दिन का प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बच्चों की गहन देखभाल, जीवन रक्षक उपकरणों के संचालन और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तकनीक सिखाई गई।
नई सुविधाओं के साथ अस्पताल का विस्तार
संयुक्त जिला अस्पताल के दूसरे तल पर छह-छह बेड के पीकू और नीकू वार्ड स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, दो पेडियाट्रिक वार्ड और एक डॉक्टर ड्यूटी रूम भी तैयार किया गया है। अस्पताल के सीएमएस डॉ.संजय गुप्ता ने बताया कि वार्ड के संचालन के लिए आवश्यक सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वार्मर, मॉनिटर, वेंटिलेटर जैसी आवश्यक चिकित्सा मशीनों को भी शिफ्ट कर दिया गया है। इंटरनेट और अन्य तकनीकी सुविधाएं भी सुनिश्चित कर दी गई हैं।