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Ghaziabad News: इमरजेंसी में बढ़े मरीज तो हाथ में ड्रिप पकड़ा भेज दिए वार्ड

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jul 2023 01:20 AM IST
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Patients increased in emergency, then caught drip in hand and sent to ward
गाजियाबाद। जिला संयुक्त अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों की संख्या बढ़ी तो पहले से भर्ती मरीजों को हाथ में ग्लूकोज की डि्रप पकड़ा पैदल ही वार्ड में भेज दिया गया। वहीं, एमएमजी अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड नहीं मिल रहा है। एक-एक बेड पर दो से तीन मरीज भर्ती हैं। इमरजेंसी से वार्ड तक मरीजों को पहुंचाने के लिए व्हील चेयर और स्ट्रेचर भी नहीं मिल रही है। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले भर्ती मरीजों को बिजली कटौती से भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। गर्मी से बचाव के लिए तीमारदार मरीजों को हाथ से पंखा कर रहे हैं। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने एमएमजी और संयुक्त अस्पताल की पड़ताल की। दोनों अस्पतालों में अव्यवस्था फैली दिखाई दी। पर्चा बनवाने और दवाई लेने के काउंटर पर मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई थी।
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संयुक्त अस्पताल की इमरजेंसी में दोपहर 1:05 बजे मरीजों की भीड़ बढ़ी तो पहले से भर्ती मरीजों को वार्ड में जाने के लिए बोल दिया गया। इमरजेंसी से जाने वाले मरीजों की मदद के लिए न कोई वार्डबॉय आया न ही तीमारदारों को व्हील चेयर या स्ट्रेचर मिली। जो मरीज पैदल जा सकते थे, वह हाथ में ग्लूकोज की बोतल लेकर वार्ड तक गए। जो नहीं जा सकते थे, उनके तीमारदार पीठ पर लादकर वार्ड में भर्ती करने ले गए।
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वहीं, एमएमजी अस्पताल में पुरुष वार्ड में बुखार और डायरिया से बीमार व्यक्ति भर्ती था। वार्ड में पंखा चल रहा था लेकिन उमस और गर्मी से पंखे की हवा नाकाफी थी। महिला हाथ से पंखा कर रही थी। वार्ड में कूलर तो रखे हैं लेकिन कई महीने से खराब पड़े हैं। अस्पताल के सीएमएस डॉ. विनोद चंद्र पांडेय का कहना है कि इमरजेंसी गेट पर व्हील चेयर और स्ट्रेचर रखे हुए हैं।
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एमएमजी में सोमवार को पहुंचे 2412 मरीज
सोमवार को एमएमजी अस्पताल में 2412 मरीज इलाज कराने पहुंचे। इनमें से 491 बच्चे उल्टी-दस्त, बुखार और आई फ्लू से ग्रसित थे। 271 मरीजों को बुखार और 362 को पेट से संबंधित दर्द की परेशानी थी। गंभीर रूप से बीमार 113 मरीजों को भर्ती किया गया, इनमें से 86 मरीज उल्टी, दस्त, बुखार और डायरिया के थे। संयुक्त अस्पताल में 1206 मरीज इलाज कराने पहुंचे। इनमें से 45 डायरिया के मरीज थे, जबकि 165 बुखार और 206 पेट दर्द के मरीज थे। एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा का कहना है कि उमस और नमी से कई तरह के विषाणु औ जीवाणु पैदा हो जाते हैं, इस कारण से खाद्य पदार्थ जल्दी दूषित हो जाते हैं। बरसात होने के बाद पानी के पानी दूषित होने और पाचन क्षमता कमजोर होने से कोई भी दूषित खाद्य पदार्थ लेने, कटे व सड़े हुए फल जाने-अंजाने खा लेने से लोगों में संक्रमण हो जाता है। इस कारण से उल्टी-दस्त की परेशानी हो जाती है।
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